बुधवार, 9 जुलाई 2014

भाजपा के नए शाह - अमित भाई अनिल चंद्र शाह

16 वीं लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले अभूतपूर्व जनादेश ने राजनीतिक पंडितों को दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर कर दिया। चुनाव परिणामों के पहले तक राजनीतिक विश्लेषण के दिग्गज़ माने जाने वाले लोग भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा के इस अभूतपूर्व विजय की कल्पना भी नहीं कर पाए थे। उससे भी हैरत अंगेज रहा उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन जहां 81 लोकसभा सीटों में से पार्टी ने 71 सीटें अपनी झोली में डाल लीं। मजे की बात ये रही कि राज्य की सत्रह सुरक्षित सीटों में से एक भी किसी अन्य दल के खाते में नहीं गईं। पार्टी का ये प्रदर्शन हैरतअंगेज करने वाला था। कमंडल के लहर पर सवार भाजपा भी सफलता के ये झँडे नहीं गाड़ पाई थी। पार्टी के इस रिकार्डतोड़ प्रदर्शन के पीछे आखिर था क्या ..। निस्संदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के चमत्कारिक असर को ज़मीन पर आम जनता के मन में बिठाने के पीछे एक व्यक्ति और था जिनका नाम है अमित भाई अनिल चंद्र शाह यानि की अमित शाह। संगठन को अभूतपूर्व सफलता दिलाने की दिशा में दरअसल अमित शाह का ये कारनामा न तो पहला है और न आखिरी। अमित शाह 1995 से ही गुजरात विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते रहे लेकिन अपनी सांगठनिक क्षमता से पार्टी के दिग्गज़ों का ध्यान अमित शाह ने दिसंबर 2002 में तब खिंचा जब 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 126 सीटें जीत कर कांग्रेस को धूल धूसरीत कर दिया। खुद अमित शाह ने सरखेज़ विधानसभा सीट से रिकार्ड तोड़ 1, 60, 000 मतों के अंतर से जीत कर विधानसभा में कदम रखा। जीत के इस अंतर को 2007 में फिर बढ़ा कर दो लाख चालीस हजार मतों के अंतर तक ले गए।
1964 में बांबे में जन्में अमित शाह कल तक पार्टी में महासचिव थे। अमित शाह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वसनीयतम सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है। मृदुभाषी और चमक दमक से दूर रहने वाले अमित शाह के परदे के पीछे की भूमिकाओं ने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राह आसान बनाने में अहम किरदार निभाया है। यही वजह रही कि अमित शाह पहले पार्टी में महासचिव बनाए गए और फिर 16 वीं लोकसभा के चुनाव घमासान में उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में चुनाव प्रचार की कमान सौंपी गईं और अपने करिश्में से उन्होंने मृतप्राय हो चुकी पार्टी में प्राण फूंक दिए। पांच बार के विधायक रहे बायो कैमेस्ट्री के बैचलर डिग्री धारी अमित शाह का सामाजिक राजनीतिक सफर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एक कार्यकर्ता के तौर पर शुरू हुआ। छात्र नेता के तौर पर अमित शाह ने लंबा वक्त अखिल भारतीय विधार्थी परिषद में भी बिताया। मार्च 2010 में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाया गया।
उत्तर प्रदेश में अभूतपूर्व प्रदर्शन के जरिए ही न केवल बल्कि एक बार फिर अमित शाह ने अपने मौन से सबको चौंका दिया। यही वजह रही कि परिणाम के बाद से लगातार पार्टी की कई राज्य इकाईयों की ओर से पार्टी नेतृत्व के सामने अमित शाह को उनके राज्यों की जिम्मेदारी सौंपे जाने की डिमांड लगातार बढ़ने लगी थी। ऐसे में पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए अमित शाह का चयन निस्संदेह पार्टी के अतीत और भविष्य के लिए एक बेहतर संधि काल साबित होगा।