रविवार, 30 सितंबर 2007

आसमान में धान


शेखर पेशे से पत्रकार हैं। स्टार न्यूज़ में काम करते हैं। अक्सर मुझे कविताएं भेजते रहते हैं। ये कविताएं विभिन्न विषयों पर होती हैं। इन सबमें इंसानियत के प्रति उनकी संवेदना का अहसास तारी होता है। एक बार फिर उन्होंने ये कविता मुझे भेजी है। मुझे अच्छी लगी। आप भी इसे पढ़ सकते हैं...

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मैं किसान हूँ.........
आसमान में धान बो रहा हूँ.........
कुछ लोग कह रहे हैं कि पगले !
आसमान में धान नहीं जमा करता.........
मैं कहता हूँ पगले !
अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है तो
आसमान में धान भी जम सकता है.............
और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा
या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा..............
या आसमान में धान जमेगा......................

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