रविवार, 15 मार्च 2009

अल्पमत का लोकतंत्र !


लोक सभा के चुनाव फस्‍ट पास्ट द पोस्ट चुनाव प्रणाली से कराए जाते हैं। इस प्रणाली के अधीन कुल मतदान में से सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी विजयी घोषित किया जाता है। फिर चाहे उसके कुल मतदान या कुल वोटों का कितना भी प्रतिशत क्यों न हो।
२००४ के आम चुनावों में लोकसभा की ५४३ सीटों में से २१९ सांसदों ने अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में कुल मतदान के ५० प्रतिशत या उससे अधिक मत प्राप्त किए थे। इसका अर्थ ये हुआ कि शेष ३२४ सीटों पर ( कुल ५४३ सीटों का लगभग ६० प्रतिशत ) विजयी उम्मीदवार कुल मतदान के ५० प्रतिशत वोट प्राप्त नहीं कर सके थे।

देश के विभिन्न राज्यों में मतदानगत खुबियों की वजह से काफी अलग अलग हैं। उदाहरण के तौर पर जहाँ तमिलनाडु में अधिकांश सीटों पर विजेता प्रत्याशियों ने कुल मतदान के ५० प्रतिशत से अधिक मत ( ३९ में से ३४ स्थानों पर ) प्राप्ता किये , वहीं उत्तर प्रदेश में ८० सीटों में से केवल ९ सीटों पर इतने प्रत्याशियों ने अंतर से वोट प्राप्त किये । प्रतिशत की दृष्टि से तमिलनाडु में ८७ प्रतिशत से अधिक स्थान ५० प्रतिशत ये उससे अधिक मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों को मिले जबकि उत्तर प्रदेश में केवल ११।२५ प्रतिशत विजेता उम्मीदवार ही इस प्रतिशत तक पहुंच पाए।

तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के अलावा लोकसभा की अधिक सीटों वाले कुछ अन्य राज्यों में अलग अलग खुबी देखी गईं। आंध्र प्रदेश में लोकसभा की ४२ सीटों में से २९ सीटों पर विजेता प्रत्याशियों ने ५० प्रतिशत या अधिक मत प्राप्त किये , जबकि बिहार में ४० विजेता प्रत्याशियों में से मात्र ४० प्रत्याशियों में से मात्र ११ प्रत्याशी ही इस अंतर को पा‍ट सके।

दक्षिण के दो अन्य राज्य जैसे कर्नाटक और केरल को भी इस दृष्‍ि़ट से कोई विशेष सफलता प्राप्त नहीं हुई। कर्नाटक में लोक सभा की २८ सीटों में से केवल पांच सीटों पर ही विजेता प्रत्याशी ५० प्रतिशत से अधिक मता प्राप्त कर सके, जबकि केरल में २० में से केवल चार विजेता प्रत्याशी ही कुल मतदान के ५० प्रतिशत से अधिक वोट प्रप्त कर सके। तथापि महाराष्ट्र की स्थिति बेहतर रही। वहां लोकसभा के ४८ सदस्यों में से १५ सदस्य कुल मतदान के ५० प्रतिशत से अधिक मतों के अंतर से विजयी रहे।

इसके विपरीत पश्चिम बंगाल , राजस्थान और उड़ीसा राज्यों ने अपने आधे से अधिक सांसद ५० प्रतिशत से अधिक के अंतर से वोट पाने वाले सदस्य लोक सभा में भेजे। ( पश्चिम बंगाल ने ४२ में से २३ , राजस्थान ने २५ में से १४ और उड़ीसा ने २१ में से ११ ) । तथापि गुजरात और मध्य प्रदेश इस मामले में थोड़े पिछड़ गए । उन्होंने क्रमश २६ में से १२ और २९ में १३ सदस्य ही लोकसभा में भेजे।

जहां तक अनुपातिक दृश्टि से कम सीटों वाले राज्यों का संबंध है असम ने अपने १४ सांसदों में से केवल एक सांसद ही ऐसा भेजा जिसने ५० प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किए थे जबकि इतनी सीटों वाले झारखंड ने ऐसे तीन सांसद और पंजाब ने १३ में से ऐसे तीन सांसद भेजे थे।
हरियाणा में १० में से केवल एक ही विजेता प्रत्याशी ५० प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त कर सका। इसके विपरीत दिल्ली ही एक मात्र ऐसा केंद्र शासित प्रदेश था जहां सातों सांसदों ने ५० प्रतिशत से अधिक मत प्राप्त किये थे।

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