गुरुवार, 22 सितंबर 2016

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी माना, कैराना से हुआ हिंदुओं का पलायन

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश की सियायत को गरमाने वाले कैराना पलायन मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रिपोर्ट जारी हो गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की एक जांच टीम ने पाया है कि उत्तर प्रदेश में कैराना से कई परिवारों ने अपराध में बढ़ोतरीऔर वहां कानून एवं व्यवस्था की गिरतीस्थिति के डर से पलायनकिया। उसके तथ्यों के आधार पर आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस भेजकर टीम की टिप्पणियों और सिफारिशों पर आठ हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
एनएचआरसी ने एक बयान में कहा, टीम ने कैराना के सांसद के पीएस से 346 विस्थापित परिवारों या व्यक्तियों की एक सूची भी हासिल की. उस सूची में तीन आवासीय जगहों का चुनाव हुआ और छह कथित पीड़ितों या विस्थापित परिवारों या व्यक्तियों को सत्यापन के लिए चुना गया.
आयोग की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कैराना से सैकड़ों परिवार पलायन कर चुके हैं। कैराना का आबादी अनुपात भी बदला है। यहां अल्पसंख्यक हिन्दू महिलाओं के साथ छेड़छाड़ आम घटना है। आयोग के मुताबिक आए दिन मिलने वाली धमकियों से घबराकर दो पेट्रोल पंप समेत कई और व्यापार भी बंद हुए हैं। आयोग ने कत्ल जैसे अपराधों में भी पुलिस की कार्रवाई को लचर बताया है।
रिपोर्ट में एक पहलू यह भी है जिसमें माना गया है कि कैराना में कुछ मुस्लिम युवक हिंदुओं की बहू-बेटियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं।  इन युवकों के डर की वजह से पीड़ित परिवार पुलिस तक शिकायत करने नहीं जाता। रिपोर्ट में एक कश्यप परिवार की महिला के साथ गैंगरेप और फिर उसकी हत्या किए जाने का मामला भी उठाया गया है। इसमें आयोग ने माना कि स्थानीय पुलिस ने परिजनों की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं की।  इस मामले में दो मुस्लिम युवकों के नाम सामने आए थे, लेकिन पुलिस ने तब कोई कार्रवाई नहीं की।  बाद में जब महिला का शव मिला और ग्रामीणों ने हंगामा किया तब पुलिस ने आरोपियों को नामजद कर केस दर्ज किया।  आरोप है कि पुलिस ने पीड़ित परिवार के ही दो युवकों को इस केस में शामिल कर दिया, जबकि ग्रामीणों ने उन्हें निर्दोष बताया था।  कैराना में दो हिंदु व्यापारियों की हत्या का मामला भी रिपोर्ट में शामिल किया गया है। आयोग ने माना है कि कैराना में डर और दहशत की वजह से हिंदू परिवार वहां से पलायन कर रहे हैं।
20 प्वाइंट पर सौंपी गई रिपोर्ट में प्रदेश सरकार के लिए कई सुझाव भी दिए गए हैं। मसलन कैराना से पलायन कर दूसरे स्थानों पर विस्थापित हुए लोगों से बातचीत करने और उन्हें वापस लाने के लिए बातचीत करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी के गठन का भी सुझाव दिया गया है। आपको यह भी बताते चलें कि भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया था कि कैराना में बढ़ते अपराध और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण के कारण एक खास वर्ग के लोगों को कैराना से पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने इससे जुड़ी एक सूची भी सौंपी थी जिसमें सैंकड़ों परिवारों के नाम थे।
बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता मोनिका की ओर से आयोग में शिकायत दर्ज करायी गई थी। अधिवक्ता मोनिका का एक एनजीओ भी है, उसी एनजीओ के माध्यम से यह शिकायत की गई थी।  जिसके बाद आयोग ने इस मामले में एक जांच कमिटी का गठन किया था। जांच कमिटी में एक डिप्टी एसपी और तीन इंस्पेक्टर शामिल थे। इस जांच कमिटी ने कैराना के अलावा शामली, पानीपत, मुजफ्फरनगर और अन्य स्थानों पर जाकर अपनी जांच की। कैराना से पलायन करने वालों से फोन पर भी जानकारी की।

भारत ने दिया उड़ी हमले का करारा जबाव : नियंत्रण रेखा पार कर स्पेशल फोर्सेज ने किए बीस आतंकी ढेर

Photo Courtesy : The Quint 
नई दिल्ली : उड़ी हमले का मुंहतोड़ जबाव देते हुए भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर एक साहसिक अभियान में कम से कम बीस आतंकियों को मार गिराया है। ऑन लाइन न्यूज़ पोर्टल द क्वींटके मुताबिक इलीट 2 पैरा के दो युनिट के कम से कम 18-20 जवानों ने सैन्य हेलिकॉप्टर की मदद से नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इस खतरनाक अभियान को अंजाम देते हुए आतंकियों के तीन शिविर पर हमला बोला जिसमें कम से कम बीस आतंकवादी मारे गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक हमले में मारे गए 20 आतंकियों के अलावा कम से कम 200 लोग जख्मी हैं। सैन्य सूत्रों से प्राप्त इस जानकारी की पुष्टि द क्वींट ने दो अन्य स्वतंत्र सूत्रों से भी की जिसके मुताबिक 20-21 सितंबर के बीच इस अभियान को अंजाम दिया गया।
20 सितंबर की रात को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) को नो फ्लाई जोन घोषित करने के पाकिस्तानी कार्रवाई के पीछे भारतीय सैनिकों के इसी अभियान को वजह बताया जा रहा है। इस एयर स्पेश प्रतिबंध को ही पाकिस्तान के राष्ट्रीय विमानवाहक पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन (पीआईए) की ओर से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगिट और स्कर्दू सहित उत्तरी इलाकों के शहरों के लिए जाने वाली फ्लाइटों को रद्द किए जाने की वजह बताया जा रहा है। पीआईए ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) स्थित गिलगिट-बाल्टिस्तान इलाके में स्थित गिलगिट और स्कर्दू और खैबर-पख्तुनख्वा प्रांत के चित्राल के लिए जाने वाली अपनी फ्लाइट रद्द करने की घोषणा की थी। पीआई प्रवक्ता डेनियल गिलानी ने मंगलवार देर शाम ये जानकारी ट्वीट करके साझा किया था।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में दिए जाने वाले अपने भाषण से पहले जिसमें वो कश्मीर मुद्दा उठाने वाले थे, अपने थल सेनाध्यक्ष जनरल रहील शरीफ से टेलिफोन पर बात की। ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने इस बातचीत में भारतीय सेना के इस अभियान पर भी विचार विमर्श किया।
इससे पहले बुधवार को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि उड़ी हमले का मुंहतोड़ जबाव दिया जा सकता है। उन्होंने कहा, “भारत क्या कर सकता है, इसको विस्तार में नहीं बताउंगा लेकिन कभी-कभी ठोस जबाव देना जरूरी होता है। उड़ी हमला में 18 जवानों के शहीद होने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था हमले के पीछे शामिल लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा। भारत ने उड़ी हमले के पीछे पाकिस्तान में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया था।

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में उड़ी आतंकी हमले में इस्तेमाल किए गए जीपीएस जिसमें हमला स्थल तक पहुंचने की जानकारी है, पाकिस्तान के मुहर वाले ग्रेनेड, संचार से संबंद्ध कुछ दस्तावेज, संचार उपकरण सहित पाकिस्तान में निर्मित भोजन सामग्री, दवाइयां और कपड़े सहित कुछ अन्य सामग्री बरामद किए गए हैं। विदेश सचिव एस जयशंकर ने भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को बुधवार को समन किया और पाकिस्तान में भारत विरोधी आतंकी नेटवर्क के खिलाफ पाकिस्तान के कार्रवाई की मांग की। 

मंगलवार, 20 सितंबर 2016

भूकंप संभावित क्षेत्रों का मानचित्र जारी, तहसील स्‍तर का विवरण भी शामिल

Photo Courtesy : PIB
नई दिल्ली : भूकंप प्रतिरोधी निर्माण को सक्षम बनाने के लिए राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्द्धन परिषद (बीएमपीटीसी) ने देश के भूकंप संभावित क्षेत्रों का एक सरल’ मानचित्र जारी किया है। इसमें जिला और तहसील स्‍तर के विवरण भी दिए गए हैं। इन मानचित्रों को आज यहां आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्री श्री एम. वेंकैया नायडू ने जारी किया।

इन मानचित्रों को ‘कलर कोड’ के आधार पर बनाया गया हैजिनमें पांच विभिन्‍न क्षेत्रों को प्रदर्शित किया गया है जहां भूकंप की संभावना सबसे अधिक है। इसका उद्देश्‍य आवश्‍यक तकनीकी सहयोग से आपदा प्रतिरोधी निर्माण की योजना बनाने में सहायता करना है। एनडीएमए की पहल पर इन मानचित्रों को बीएमपीटीसी और आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन मंत्रालय ने तैयार किया है।
Photo Courtesy  : PIB
एनडीएमए और बीएमपीटीसी के संयुक्‍त प्रयास की प्रशंसा करते हुए श्री नायडू ने दोनों एजेंसियों से आग्रह किया कि वे अतिशीघ्र इन मानचित्रों का डिजिटलीकरण करें ताकि जनता इन्‍हें आसानी से इस्‍तेमाल कर सके। उन्‍होंने सुझाव दिया कि इन मानचित्रों का मोबाइल ऐप्‍प भी तैयार किया जाए। उन्‍होंने कहा कि इन मानचित्रों से वस्‍तुकारोंइंजीनियरोंयोजनाकारोंबीमा एजेंसियों और आपदा शमन एजेंसियों इत्‍यादि को सहायता होगी।
बीएमपीटीसी के कार्यकारी निदेशक श्री शैलेश अग्रवाल ने कहा कि देश के 304 मिलियन मकानों में से लगभग 95 प्रतिशत मकान किसी न किसी स्‍तर पर भूकंप का प्रतिरोध करने में सक्षम नहीं हैं। बीएमटीसी ने इन मानचित्रों को भारतीय सर्वेक्षण विभागभारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षणभारत मौसम विज्ञान विभाग और भारत की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर बनाया है। मानचित्रों में आवास और जनसंख्‍या आकंड़ेरेलवे लाइनएक्‍सप्रेस वे ,  राजमार्गनदीजलस्रोत,भूगर्भीय फॉल्‍ट लाइन आदि की जानकारी भी शामिल की गई है

वाराणसी समेत 12 राज्यों के 27 नए शहर स्मार्ट सिटी में शामिल, सूची में अमृतसर सबसे उपर

Photo Courtesy : PIB 
नई दिल्ली : केंद्र सरकार द्वारा घोषित तीसरी सूची में 27 नये स्‍मार्ट शहरों में स्‍वर्ण मंदिर के शहर अमृतसर को पहला स्‍थान मिला है। स्‍मार्ट शहरों की तीसरी सूची में जिन तीर्थ और पर्यटन संबंधी 8 शहरों को स्‍थान मिला है, उनमें उज्‍जैन, तिरुपति, आगरा, नासिक, मदुरै, तंजावुर, अजमेर और वाराणसी शामिल हैं। इसके साथ ही स्‍मार्ट सिटी योजना के तहत वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त करने वाले शहरों की संख्‍या 60 हो गई है।
मंगलवार को जारी 27 नए शहरों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को भी जगह दी गई ङै। स्मार्ट शहरों की इस तीसरी लिस्ट के लिए 63 शहरों के नामिनेशन किया था जिनमें 27 शहरों का चुनाव किया गया है। सूची में वडोदरा, आगरा, नागपुर, अजमेर, अमृतसर, ग्वालियर, ठाणे और थंजावुर को भी उन शहरों में शामिल किया गया है जिन्हें सरकार स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करेगी। इन 27 शहरों को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने में 66,883 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सूची में महाराष्ट्र के पांच शहरों को शामिल किया गया है। 4 शहर तमिलनाडू और कर्नाटक से, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्था से 3 शहर और मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गुजरात, सिक्किम और नागालैंड से एक एक शहर को चुना गया है।
अभी तक शहरी विकास मंत्रालय ने तीन चरणों में साठ शहरों को चुना है। ये 60 शहर 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हैं। अब सिर्फ 9 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश रह गए हैं जिन्हें इस सूची में जगह नहीं मिल पाई है। इनमें उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर भी शामिल हैं। इस योजना के तहत प्रथम वर्ष के लिए केंद्रीय सहायता के तौर पर 200 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे और इसके बाद लगातार तीन वित्त वर्ष के दौरान 100 करोड़ रुपये से अधिक राशि प्रदान की जाएगी।

मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक अभी तक चुने गए 60 शहरों पर 1.44 लाख करोड़ रूपये के निवेश का प्रस्ताव है। अधिकारियों ने बताया कि 20 स्मार्ट सिटी के पहले बैच में 82 प्रोजेक्टस पर काम शुरू हो चुका है और 111 प्रोजेक्ट्स पर जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। नायडू ने कहा कि अगले एक साल में हम स्मार्ट सिटी को मूर्त रूप लेते देखेंगे।