बुधवार, 26 सितंबर 2007

जीत गए भई जीत गए .........


क्रिकेट के नए मैगी... बस दो मिनटिया ट्वेंटी ट्वेंटी संस्करण में भारत विश्वविजेता बन गया। हरफ़नमौला खिलाड़ियों से लबरेज धोनी के नेतृत्व में युवाओं की टीम ने चमत्कार कर दिया। चौबीस साल के अंतराल पर हमने देखा विश्व कप में कैसा जीता जाता है। एक पूरी पीढ़ी ने महसूस किया विश्व कप की जीत के बाद भारतीय तिरंगा का लहराना कैसा होता है। एक पूरी पीढ़ी मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि हममें से कई नौजवान ऐसे थे जिन्होंने १९८३ में कपिलदेव की टीम को लार्डस में जितते नहीं देखा था बस सुना था ... उस वक्त वाकई देश भर में लगभग ऐसा ही कुछ माहौल रहा होगा। बहरहाल धोनी की टीम ने देखते ही देखते इतिहास रच दिया। इसके साथ ही विश्व कप में पाकिस्तान को लगातार पटखनी देने का अपना रिकार्ड भी अक्षुण्ण बना रहा। बहरहाल इन सबमें एक बात जो मुझे निरंतर खल रही है... पाकिस्तानी कप्तान को वो बयान जिसमें हार के बाद रवि शास्त्री से बात करते हुए अपनी हार के लिए दुख का इज़हार करते हुए उनने पूरे मुस्लिम जगत से माफी मांगी। क्या पाकिस्तानी कप्तान का ये बयान जायज़ था ? क्या पाकिस्तानी टीम पूरे मुस्लिम जगत का प्रतिनिधित्व करती है ? दरअसल ये बयान कुछ वैसा ही है जो पाकिस्तान के राजनेताओं का रहता आया है। पाकिस्तानी राजनेताओं के इस तरह के बयानों का मतलब तो आसानी से समझा जा सकता है। एक राष्ट्र राज्य के रूप में पाकिस्तान की असफलता को तो आसानी से इस्लामी मुखौटे के पीछे छिपाया जा सकता है। क्योंकि पाकिस्तानी के नीति नियंताओं के पास इसके अलावा और कोई विकल्प भी नहीं। चोरी छिपाए चलाए जा रहे पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को इस्लामी बम कहने तक को राजनीतिक रूप से जायज माना लेते हैं ये सोच कर कि चलो उनकी मजबूरी है। लेकिन क्रिकेट के मैदान में हार जीत को धार्मिक स्वरूप देने की बात कहाँ तक जायज़ है ? क्या भारत के विरूद्ध क्रिकेट मैच को धर्मयुद्ध या ज़िहाद के चश्मे से देखा जाना उचित है ? ऐसे में जबकि भारत में मुसलमानों की जनसंख्या पाकिस्तान जैसे देशों से कहीं अधिक है। इस लिहाज़ से जब युसूफ पठान पाकिस्तानी गेंदबाजों की लपलपाती गेंद को बाउंड्री के दर्शन करा रहे तब तो वो इस्लाम के विरूद्ध काम कर रहे थे ??? पाकिस्तानी गेंदबाजों को उन्हें आउट करने से पहले फिर तो सोचना चाहिए था ... आखिर वो एक मुसलमान को आउट करके इस्लाम विरूद्ध काम कर रहे थे। फिर इरफ़ान पठान की गेंद का तो हर पाकिस्तानी गेंदबाज को सम्मान करना चाहिए था ... आख़िर वो एक मुसलमान की गेंद को कैसे पीट सकते हैं ??? हे भगवान पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने पूरे मैच में इस्लाम के विरूद्ध काम किया । अब वो किस मूंह से खुद को इस्लाम के बंदे कह पाएंगें ??? दरअसल जो भी ऐसे बयान दे कर अपनी असफलता को छिपाने का कुत्सित प्रयास करते आये हैं वो न तो इस्लाम को जानते हैं न हीं धर्म के मर्म को। जिस धरम के नाम पर मुहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान बनवाने में सफल रहे उसी धरम का वो कभी भी सम्मान नहीं कर पाए। ज़िन्ना कितने आधार्मिक किस्म के थे और किस तरह से शराब और सिगार के शौकिन थे ये किसी से छिपी नहीं है। आज़ाद भारत और पाकिस्तान के हुक्मरानों को कम से कम अब छह दशक के बाद ये बात आसानी से समझ में आ जाना चाहिए था कि पाकिस्तान का जन्म एक राजनीतिक कदम था न कि धार्मिक ... बहरहाल पाकिस्तान के कप्तान का इस तरह का बयान न केवल फिजुल था बल्कि अपनी असफलता को छिपाने की कुत्सित प्रयास के रूप में भी इसे देखा जाना चाहिए। ऐसे में क्या क्रिकेट की अंतर्राष्ट्रीय संस्था आईसीसी इस पूरे मामले में कोई कार्रवायी करेगी ?

15 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

वैसे तो ब्लाग पर लिखा आपका ये लेख अच्छा है पर मेरी सोच आपसे कुछ अलग है। मेरा मानना है
"हम अच्छे है क्योंकी वो बुरे है, ऐसी कोई बात नही है... हम अच्छे इस लिए है क्योंकी अच्छाई हमारे अन्दर है "
"हमने मैच इस लिए जीता क्योंकी हमने ज्यादा अच्छा खेला, इस लिए नही क्योंकि उनलोगों ने बुरा खेला"
और हर कोई अपना बचाव करने की कोशिश करता है, और पाकिस्तानी कप्तान वही कर रहा था। खैर ऐसे बयानों के पीछे
मकसद जो भी हो मुझे पता नही,पर हमें दूसरो की नही अपनी गलती पर पहले ध्यान देना चाहिए। सारे खिलाड़ियों को
उनके संबंधित राज्य सरकारों ने ईनाम देने की घोषणा की पर गुजरात सरकार ने पठान बंधुओ को ले कर कोई घोषणा नही की। क्या इस जीत में उनका योगदान नही था। जिसे फ़ाइनल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान मिला
उसे अपने ही राज्य में कुछ नहीं मिलेगा। वाह ...आलोचना तो मोदी सरकार की होनी चाहिए... जिन्हें सुनिता
विलियम्स के साथ तो तस्वीरें खिंचवाने में अपना सम्मान नज़र आता है लेकिन इरफ़ान पठान को वो इसलिए सम्मानित
नहीं करते क्योंकि वो एक मुसलमान है। क्या देश को एतिहासिक जीत दिलाने वाले नायक को अपने ही देश में सिर्फ उसके
धर्म की वज़ह से सम्मान से वंचित रखा जाएगा। ये कहाँ का न्याय है ....ज़ाहिर है ऐसी आलोचनाओं की बजाए
पहले हमें अपनी कमियों को दूर करने पर ध्यान देना होगा ।
शशि आनंद , चंडीगढ़

Shashi Anand ने कहा…

वैसे तो ब्लाग पर लिखा आपका ये लेख अच्छा है पर मेरी सोच आपसे कुछ अलग है। मेरा मानना है
"हम अच्छे है क्योंकी वो बुरे है, ऐसी कोई बात नही है... हम अच्छे इस लिए है क्योंकी अच्छाई हमारे अन्दर है "
"हमने मैच इस लिए जीता क्योंकी हमने ज्यादा अच्छा खेला, इस लिए नही क्योंकि उनलोगों ने बुरा खेला"
और हर कोई अपना बचाव करने की कोशिश करता है, और पाकिस्तानी कप्तान वही कर रहा था। खैर ऐसे बयानों के पीछे
मकसद जो भी हो मुझे पता नही,पर हमें दूसरो की नही अपनी गलती पर पहले ध्यान देना चाहिए। सारे खिलाड़ियों को
उनके संबंधित राज्य सरकारों ने ईनाम देने की घोषणा की पर गुजरात सरकार ने पठान बंधुओ को ले कर कोई घोषणा नही की। क्या इस जीत में उनका योगदान नही था। जिसे फ़ाइनल का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का सम्मान मिला
उसे अपने ही राज्य में कुछ नहीं मिलेगा। वाह ...आलोचना तो मोदी सरकार की होनी चाहिए... जिन्हें सुनिता
विलियम्स के साथ तो तस्वीरें खिंचवाने में अपना सम्मान नज़र आता है लेकिन इरफ़ान पठान को वो इसलिए सम्मानित
नहीं करते क्योंकि वो एक मुसलमान है। क्या देश को एतिहासिक जीत दिलाने वाले नायक को अपने ही देश में सिर्फ उसके
धर्म की वज़ह से सम्मान से वंचित रखा जाएगा। ये कहाँ का न्याय है ....ज़ाहिर है ऐसी आलोचनाओं की बजाए
पहले हमें अपनी कमियों को दूर करने पर ध्यान देना होगा ।
शशि आनंद , चंडीगढ़

Shashi Anand
Manager (operations)
Mob.No. 9816611668 (himanchal)
Mob.No. 9316070006 (punjab)
Mail Id : shashi.dwary@gmail.com

बेनामी ने कहा…

संदीप भाई,
मैं आपकी बात से बिल्कुल सहमत हूं। "पाकिस्तान का जन्म एक राजनीतिक कदम था न कि धार्मिक"। आपने बिल्कुल सही कहा है। बहुत अच्छी तरह से लिखा आपने और बहुत सही भी। इस तरह की अच्छी स्टोरी लिखते रहिए और हम लोगों को भी सूचित करते रहिए ताकि हमें भी कुछ पता चले कि क्या बारिकियां हैं इन छोटी छोटी बातों में ..
आपका
गौरव दीक्षित

Unknown ने कहा…

Well said bhaiya, now the time comes when everybody have to understand the power of unity, and nobody should be discriminate because of his caste and religion, because first of all we all are human beings. and for Pakistan it was might be their bad luck but the comment from their captain showed their short mindedness nothing else.
By the way, carry on bhaiya in the same way.

Abhijit, Delhi

pradip... ने कहा…

sahi kaha hai kisi ne ..khel ko khel ki dirsti se dekho na ki ise rajniti or religious ka chonga pahnao jis tarah se pakistan captain ne iss sarmnak haar ko pahnane ka kosis kiya hai....
sahi likhe ho boss aur khub likhe hao......lage raho....

frozen_in_time ने कहा…

Good effort....writing style is good....nice flow of thoughts...cmpletely enjoyed reading it

Cheers
Rocky

सुभाष मौर्य ने कहा…

बधाई हो संदीप। ब्‍लाग जगत में एक अच्‍छी शुरूआत करने के लि‍ये। आपका लेख दुरूस्‍त है।

बेनामी ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
कुमार आलोक ने कहा…

Jha jee agar aap pakistan main paida hote to aapko shoib mallick ki majboori samajh main aa jaati. 1994 main ek baar main akram ka interview padh raha thaa , usne kaha ki kisi bhee desh se pakistan haar jaaye hum khiladiyon ko dar nahee lagtaa lekin agar hindustan se haar jayee to samajhiye ki jaan saansat main rahtee hai , ghar walon ki suraksha ki chintaa satane lagtee hai pakistani cricket premiyon ko ye sonch badalna hoga. aapne lambe lambe drishtaant diye hai kyon bharat ki tulana pakistan se karte hai wahan democracy ki aisi taisi aaj se nahee balki uske buniyaad se hi rahee hai, hamare desh ne loktantra ki misaal ya kahen ki deepak sabon ko dikhlaayee hamara sanvidhaan hi hamere democracy kaa aina hai aur wahan aaien ka matlab kabhee /ia ul haque vad hai to kabhee mussraraf waad hai isliye tulna bharat ki kam se kam pakistan se mat kijiye

ANALHAQ ने कहा…

this match is infact a conspiracy 2 servive ths game again in indian subcontinent. as itz a large revenue generation area. itz totally a fixd approach to adjust darking cricket in light zone.

बेनामी ने कहा…

mast guru.. mast...

बेनामी ने कहा…

नमस्कार,
प्यारे मित्र बहुत बढ़िया प्रयास है आपका, लेखनी में भी धार दिख रही है। एक अच्छी सोच को कलमबद्ध करना आप बहुत बेहतर जानते हैं।
आपका
मुकेश झा

बेनामी ने कहा…

प्रिय संदीप,
जिस मुद्दे को आपने उठाया वो बेहद गंभीर है। ये न केवल सभी खेल समुदाय के लिए बल्कि सभी खेल प्रेमियों के साथ साथ विश्व राजनीति के लिए भी बहुत गंभीर है। मैच के बाद किसी कप्तान द्वारा दिया गया ये बयान न ही अच्छा था और न ही जिम्मेदारी भरा। हालांकि मीडिया भारतीय जीत की खुशी और उत्साह को कवर करने में लगा हुआ था बावजूद इसके इस बयान को अनदेखा नहीं किया जा सकता। मेरे विचार से किसी खास समुदाय के नाम से माफी मांगने जैसा बचकाना बयान किसी अपराध से कम नहीं है। एक भारतीय बस एक भारतीय है किसी भी खेल में वो हिन्दु मुस्लिम सिक्ख या इसाई के रूप में नहीं बल्कि एक भारतीय के रूप में जुड़ा होता है। हरेक खेल को हमें खेल भावना से देखना चाहिए । एक बात जो मैं यहां उठाना चाहुंगा वो टीम मैनेंजमैंट की स्तर का है..प्रत्येक मैंनेजमैंट की ये जिम्मेदारी होनी चाहिए की उसका खिलाड़ी मीडिया से किस तरह से बात करे। खिलाडियों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए कि वो मीडिया और आम लोगों से कैसे पेश आएं। यही वजह है कि किसी भी टीम में मीडिया मैनेजर की भूमिका बहुत महत्वपुर्ण हो जाती है। ये दरअसल मीडिया मैनेजर की जिम्मेदारी होती है कि उसका खिलाड़ी मीडिया के सामने और बांकि लोंगों के सामने किस तरह से पेश आता है। इस तरह का गैर जिम्मेदाराना बयान समुदाय के भावनाओँ को भड़का सकता है इसलिए बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। जब हम सामान्य खिलाड़ी न होकर पेशेवर खिलाड़ी हो जाते हैं तो हमें इन छोटी छोटी बातों का ख्याल रखना ही होता है। कुल मिलाकर आपने जिस तरह से साधारण खेल की स्टोरी को राजनीति और आम व्यक्ति की पसंद से जोड़ कर पेश किया है वो काबिले तारीफ है। निसंदेह बहस के लिए ये बढ़िया मुद्दा उठाया आपने। कई पहलुओं को जोड़ने के बाद ये स्टोरी और भी प्रभावपूर्ण बन सकती है।भविष्य में आपके और भी बेहतर लेखनी के लिए आपको शुभकामनाएं।
आपका
हर्षेंद्र वर्धन

बेनामी ने कहा…

this match is infact a conspiracy 2 servive ths game again in indian subcontinent. as itz a large revenue generation area. itz totally a fixd approach to adjust darking cricket in light zone.

sushant jha ने कहा…

Ummid hai ki ye vimarsh pakistan ke janma ki taraf mud jaye..kuch chhilke utariye..aur...shuruat acchi hai...sawal ko aur bhi vyapak banaya ja sakata hai..agar pure bhartiya khel jagat ki uplabdhiyon(?) per bhi koyi vimarsh ho...meri shubhkamana sweekar karein.