झारखंड से खबर आ रही है कि इस्पात आईकान मित्तल टाटा की राह पर चल निकले हैं। झारखंड की खूंटी ज़िले के टोरपा में मित्तल की प्रस्तावित चालीस हज़ार करोड़ की एकीकृत स्टील प्लांट की योजना को पलिता लग सकता है। दरअसल विस्थापन विरोधी समुहों द्वारा स्टील प्लांट के पुरज़ोर विरोध की वजह से मित्तल ने प्लांट को झारखंड में ही कहीं और ले जाने का तो फैसला कर लिया है लेकिन अगर बात फिर भी नहीं बनी तो हो सकता है राज्य को चालीस हज़ार करोड़ रूपए की इस महत्वपूर्ण परियोजना से हाथ धोना पड़ जाए।मित्तल को अपनी इकाई लगाने के लिए छह हज़ार एकड़ जमीन की जरूरत थी लेकिन विस्थापन विरोधी कुछ आंदोलनकारियों ने इसके लिए ज़मीन देने से ये कह कर इंकार कर दिया है कि वो किसी प्लांट की स्थापना के लिए किसी भी कीमत पर अपनी खेतिहर ज़मीन नहीं देंगे। लिहाज़ा मामल फंस गया है। वर्ष २००५ में मित्तल ने झारखँड सरकार के साथ १२ मिलियन टन उत्पादन वाली स्टील प्लांट लगाने संबंधी एक समझौते पत्र पर हस्ताक्षर किया था। हालांकि फिलहाल प्लांट के लिए किसी वैकल्पिक स्थान का चयन नहीं किया गया है।
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