रविवार, 3 जनवरी 2010

झरिया जब जल रहा है तब बीसीसीएल बंशी बजा रहा है

झरिया  स्थित एक घर जिसके पीछे तीन रिहायश जमींदोज हो गए

   झरिझया झरिया : भू धसान और जमीन के नीचे लगी आग से विरान पड़ा सिनेमा घर। 
झरिया: धरती के नीचे लगी आग। ज    जमीन ज  





झरिया : वीरान पड़ा पुराना रेलवे स्टेशन।




पैरों के नीचे धरती जल रही है। जीवन सामान्य दिखने को अभिशप्त।



भूधसान की वजह से वीरान पड़े घर





कास्ट खदान: समस्या की सबसे बड़ी वजह
ओपन



अंगारे पर बसा झरिया
जलते 


















कोयला की आग से रौशन धनबाद शहर
झरिया

















मंदिर भी पड़े हैं वीरान
घर

झरिया : कभी भी जमीन पर उभर आते हैं दरार और जिन्दगियों को लील लेती हैं
जमीन




2 टिप्‍पणियां:

अरविंद चतुर्वेदी ने कहा…

कोयला खनिक जय हो। उस ज़मीन की जय हो जहां ये काला सोना मिलता है। लेकिन अभी इस जय जयकार में शामिल कीजिए दलालों को जो मजदूर लेकर आते है ठेकेदारों को जो खून चूसते हैं। और उन नेताओं को भी जो इस कोयले के खेल में अपने वोट तलाशते हैं।

Randhir Singh Suman ने कहा…

दलालों को जो मजदूर लेकर आते है ठेकेदारों को जो खून चूसते हैं। और उन नेताओं को भी जो इस कोयले के खेल में अपने वोट तलाशते हैं।nice