आर्थिक मामलों के आला अफसरों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित बैठक सरकार के लिए अगले 100 दिन की कार्ययोजना बनाई जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह अच्छे प्रशासन के लिए 10 सूत्री खाका तैयार किया था जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, उर्जा व सड़क क्षेत्रों के साथ साथ बुनियादी ढांचा तथा पर्यावरण क्षेत्र में सुधारों को शीर्ष प्राथमिकता देने की बात सामने आई है। इसके बाद नरेंद्र मोदी सभी मंत्रालयों से 100 दिन की कार्ययोजना बनाने को कहा था।
इस बैठक को इस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिसमें नरेंद्र मोदी ने प्रशासन और सार्वजनिक सेवा को कसने और उन्हें जनोपयोगी बनाने का वादा किया था। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री इस बैठक में अपनी अपेक्षाएं आला अफसरों के सामने रख सकते हैं और सचिवों से उनके अनुसार विस्तृत कार्य योजना बनाने को कह सकते हैं। विभिन्न विभागों के सचिवों को बैच (समूहों) में जोड़ दिया गया है। वित्त मंत्रालय में सभी सचिव बैच-ए में होंगे जबकि बिजली, पेट्रोलियम, कोयला, अक्षय उर्जा तथा खान मंत्रालयों के आला अफसर बैच-बी में आएंगे। जबकि बुनियादी ढांचे से जुड़े सभी मंत्रालय के आला अफसर ग्रुप सी का हिस्सा होंगे। इस तरह ए से जी तक के सात समूह बनाए गए हैं जिनसे प्रधानमंत्री बारी बारी से मुलाकात करेंगे। इसके अतिरिक्त दो अन्य समूह भी बनाए गए हैं। प्रत्येक समूह के लिए दस मिनट का समय निर्धारित किया गया है जिसमें उन्हें दस दस बिन्दुओं का स्लाइड प्रेंजेंटेशन का वक्त दिया गया है।
ऐसा माना जा रहा है कि सचिवों को पिछली सरकार की सफलताओं और विफलताओं का ब्यौरा दिए जाने के साथ साथ अगले पांच साल की कार्ययोजना का ब्यौरा दिए जाने को कहा जा सकता है। ज़ाहिर है, अपने भविष्य की कार्ययोजना के तहत आला अफसरों की ओर से अपने अपने मंत्रालयों के लंबित मुद्दों का ज़िक्र भी उठ सकता है। जानकार मानते हैं कि लंबित मुद्दों के त्वरित निपटारों के साथ ही बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को तयशुदा वक्त में पूरा कर आर्थिक वृद्धि को गति प्रदान करने के संकेत इस बैठक से उभर कर सामने आ सकते हैं।
ज़ाहिर है आने वाले वक्त में सरकार के कामकाज की रूपरेखा और ऐजेंडा इस बैठक के बाद ही तय हो पाएगा। लिहाज़ा इस हिसाब से इसी संदर्भ में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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