सोमवार, 26 दिसंबर 2016

चीन से इटली तक भारत की रेंज में, शक्तिशाली एटमी मिसाइल अग्नि 5 का कामयाब परीक्षण

Pic Courtesy : DPR 
नई दिल्ली: लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि-5 का ओडिशा के अब्दुल कलाम आइलैंड में सोमवार को किए चौथे सफल परीक्षण के बाद परमाणु युक्त अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) बनाने वाला भारत पांचवां देश बन गया है। इससे पहले रूस, अमेरिका, फ्रांस और चीन इस तरह की मिसाइल विकसित कर चुके हैं। मिसाइल की पूरी मारक क्षमता के साथ किये गये परीक्षण में सभी राडार और ट्रैकिंग सिस्टम ने मिसाइल के प्रदर्शन से जुड़े अलग-अलग मापदंडों की निगरानी की गई और पाया गया कि इसने अपने सभी लक्ष्य कामयाबी से पूरे किए हैं। इस सफल परीक्षण से देश में स्वदेशी मिसाइल निर्माण की क्षमता में इजाफा हुआ है। सेना में शामिल होने से पहले इसके और दो तीन टेस्ट किए जाएंगे फिर इसका उत्पादन होगा। खास बात ये है कि जरूरत पड़ने पर इसकी रेंज 5000 से अधिक भी बढ़ाई जा सकती है।
क्यों खास है अग्नि 5-
पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान और इटली समेत करीब आधा यूरोप इसकी जद में
चीन, रूस, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस तक निशाना लगाने की क्षमता
भारत की सबसे मारक मिसाइल का सफल परीक्षण, चीन-पाकिस्तान तक मारक क्षमता
5000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम
1000 किलो तक वारहेड ले जाने में सक्षम
85 फीसदी स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल
20 मिनट में लक्ष्य पर हिट कर सकती है
अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक मिसाइल
तीन चरणों और सतह से सतह तक मार करने में सक्षम
नेवीगेशन, गाइडेंस, वारहेड और इंजन से जुड़ी नई तकनीकें शामिल
मिसाइल को आसानी से डिटेक्ट करना मुश्किल
मिसाइल में रिंग लेजर गायरो बेस्ड इनरशियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और माइक्रो नेविगेशन      सिस्टम (MINS) टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे सटीक निशाना लगाने में माहिर।
मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) टेक्नीक के इस्तेमाल से एकसाथ कई टारगेट       पर वार कर सकेगी।
कई परमाणु वारहेड एक साथ छोड़े जा सकते हैं। एक बार छोड़ने के बाद रुकना नामुमकिन
17 मीटर लंबी अग्नि-5 का वजन 50 टन है। लॉन्चिंग सिस्टम में कैनस्टर टेक्नीक का इस्तेमाल किया     गया है। इसकी वजह से मिसाइल को आसानी से कहीं भी ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
अग्नि में 85% स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
मिसाइल की तीन स्टेज हैं। ये सॉलिड फ्यूल से चलती है। कई न्यूक्लियर वॉरहेड एक साथ छोड़े जा सकेंगे।   एक बार छोड़ने पर इसे रोका नहीं जा सकेगा।

मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध ‘नर्तकी’ है मां पार्वती, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का दावा

Pic Courtesy : harappa.com
इतिहासकार का दावा है कि नर्तकी मां पार्वती है क्योंकि जहां शिव हैं, वहां शक्ति होनी ही चाहिए।

नई दिल्ली:  सिंधु घाटी सभ्यता के निवासी भगवान शिव के उपासक थे, इस तथ्य के पक्ष में और अधिक प्रमाण देते हुए भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के हिन्दी जर्नल इतिहास में छपी एक नई शोध पत्र में दावा किया गया है कि मोहनजोदड़ो से उत्खनन में मिली प्रसिद्ध नर्तकी मां पार्वती हैं।
राजधानी दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के मुताबिक सिंधु घाटी सभ्यता का संबंध वैदिक सभ्यता से जोड़ते हुए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा ने अपने इस शोध पत्र ‘वैदिक सभ्यता का पुरातत्व’ में दक्षिणपंथी इतिहासकारों के उस दावे को दोहराया है जिसमें ये कहा जाता रहा है कि सिंधु घाटी सभ्यता के निवासी भगवान शिव के उपासक थे। ये पहली बार है कि उत्खनन में मिली 2500 ई.पू की कांस्य नर्तकी की हिंदू देवी के रूप में व्याख्या की गई हो।
शोध पत्र आगे लिखता है कि मोहनजोदड़ो से खुदाई में प्राप्त कई कलाकृतियां उस काल में भगवान शिव की पूजा परंपरा के प्रचलन के साक्ष्य हैं। श्री वर्मा के मुताबिक, चारों ओर से जानवरों से घिरे योगमुद्रा में बैठे सिंगधारी योगी की तस्वीर वाली प्रसिद्ध मुहर भगवान शिव की पूजा के प्रचलन का ठोस साक्ष्य है। हालांकि मुहर में अंकित छवि की पहचान पर इतिहासकारों में अब तक मतैक्य नहीं रहा है। पुरातत्ववेत्ता जॉन मार्शल ने 1931 में योगी की इस मुद्रा की व्याख्या ‘आदि शिव’ के रूप में की थी। हालांकि बाद में कई इतिहासकार इस व्याख्या से सहमत नहीं हुए और कई इतिहासकारों ने तो इसे महिला की छवि बताया।
Pic Courtesy : wikiwand.com
सिंधु घाटी सभ्यता में भगवान शिव की पूजा के समर्थन में वर्मा और भी तर्क देते हैं। इसी क्रम में वर्मा मोहनजोदड़ों से उत्खनन में प्राप्त एक अन्य ‘पूरोहित’ की मूर्ति के शॉल पर तिपतिया पैटर्न का जिक्र करके उन्हें हिन्दू देवता का उपासक बताते हैं। वर्मा तिपतिया पैटर्न का संबंध हिन्दू धार्मिक पद्धति में विल्ब (बेलपत्र) पत्रों से जोड़कर बताते हैं कि विल्ब पत्रों का उपयोग भगवान शिव की उपासना के लिए आज भी किया जाता है।

हालांकि अन्य इतिहासकार श्री वर्मा की इस संकल्पना से सहमति नहीं जताते हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और इतिहासकार सुप्रिया वर्मा कहती हैं कि ये पहली बार है कि किसी ने कहा है कि नर्तकी देवी पार्वती हो सकती हैं। आज तक किसी भी पुरातत्वविद् ने नर्तकी की व्याख्या देवी पार्वती या किसी अन्य देवी के रूप में नहीं की है। इस कलाकृति को एक युवती के रूप में ही अब तक देखा गया है। इससे ज्यादा इस पर कुछ कहना मुश्किल है। टेराकोटा कलाकृति की मार्शल ने मातृशक्ति के रूप में व्याख्या की थी हालांकि उन्होंने टेराकोटा की अन्य महिला कृतियों को खिलौना या जादू टोने से संबंद्ध बताया था।

इतिहास का ये ताजा अंक पिछले महीने प्रकाशित किया गया है। वाई एस राव के भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ये इतिहास पत्रिका का पहला प्रकाशन है। इतिहासकार सच्चिदानंद सहाय जर्नल के संपादक हैं।

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

बड़े पैमाने पर लगातार धरे जा रहे नकदी के पीछे आखिर कौन सा ‘जिन्न’ कर रहा है काम

Pic Courtesy : NDTV
नई दिल्ली:  शुक्रवार को राजस्व विभाग ने बताया कि नोटबंदी के बाद से अब तक तीन सौ करोड़ रुपये की नकदी देश भर में जब्त की गई है। जिस तरह टैक्स अधिकारियों के छापे में धड़ाधड़ धरे जा रहे हैं नए नोटों के बंडल, उससे आम भारतीयों के मन में ये सवाल तो जरूर आ रहे हैं कि आखिर टैक्स अधिकारियों को मिल रही इस सफलता का राज क्या है?  इस सफलता के लिए नए नोट के सामने आने के बाद से कई तरह की थ्योरी सामने आई। किसी ने कहा कि नोटबंदी के बाद जारी किए गए नए नोट में चिप्स लगे हैं जिससे उसकी स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। किसी ने बताया कि नए नोट में रेडियोएक्टिव इंक है जिससे उनकी लोकेशन स्पष्ट हो जाती है।
दरअसल इस रहस्य के पीछे है बैंकिग सॉफ्टवेयर। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आठ नवंबर को नोटबंदी के एलान के बहुत पहले ही बैंकों के कम्युटर सॉफ्टवेयर में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए थे। इस बदलाव के बाद अपग्रेड किए गए इन सॉफ्टवेयर में नए सीरिज के नोट के छपने और बाद में उसके वितरण के डाटा संग्रहित हैं।
देश के अंदर विभिन्न इलाकों के लिए अलग अलग सिरीज की नकदी छापी गईं। इसलिए जब देश के एक राज्य का नोट किसी दूसरे राज्य में स्थित बैंक के पास पहुंचता है तो बैंक इस सूचना के जरिए आयकर विभाग और वित्त विभाग की खुफिया शाखा को सतर्क करती है। सॉफ्टवेयर की मदद से इस बात का पता बड़ी आसानी से लग जाता है कि किस खाताधारक को ये नोट जारी किए गए थे जिसके बाद छापे की कार्रवाई शुरू की जाती है और किसी भी तरह का संदेह होने पर वो धर लिए जाते हैं। इसलिए नोटबंदी के बाद धड़ाधड़ धरे जा रहे नए नोटों के पीछे हमारी वित्तीय इंटेलिजेंस, पुलिस और प्रौद्योगिकी के बीच समन्वय के जरिए इस सफलता की गाथा लिखी जा रही है।
दवाइयों के बोतल या टेब्लेट के पत्तों पर एक बैच नंबर लिखा होता है जिससे उसके थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेताओं की पहचान थोड़ी सी ही मशक्कत के बाद साफ की जा सकती है। नए सिरीज के इन नकदी के साथ भी बिल्कुल इसी तरह की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है। इससे ये पता बड़ी आसानी से लग जाता है कि किस राज्य के कौन से जिले की किस बैंक की कौन सी शाखा से ये नोट निकाले गए हैं। अगर किसी बैंक की शाखा से बड़ी संख्या में नोटों के बंडल जारी किए जाते हैं तो उपर बैठे इंटेलिजेंस के लोगों के पास खतरे की घंटी टन टना जाती है।
आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर वित्तीय मामलों का खुफिया सेल बैंक की संदिग्ध शाखाओं और खाताधारकों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। जैसे ही संदिग्ध ट्रांजेक्सन का अंदेशा होता है आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय राजस्व विभाग, खुफिया विभाग और पुलिस हरकत में आ जाती है।
देश भर में फैले पुलिस के गुप्तचरों के जाल का भी नोटबंदी के बाद बड़े पैमाने पर पकड़े जा रहे नकदी के पीछे बड़ा हाथ बताया जा रहा है। कई मामलों में समाज में अमीरों और गरीबों की बीच की बड़ रही खाई से उपजे असंतोष ने भी बड़े पैमाने पर पकड़ी जा रही नकदी के पीछे अपनी भूमिका निभाई है। मसलन अवैध तरीकों से कमाए धन से नवधनाढ्य बने लोगों को ड्राइवरों या नौकरों का असंतोष भी खुफिया अधिकारियों या पुलिस के लिए बड़े पैमाने पर सूचना जुटाने के लिए उपयोगी साबित हुआ है।

रविवार, 11 दिसंबर 2016

नकदी का हिसाब किताब छोड़िए मालिक ! करोड़पति होना है तो ई-पेमेंट कीजिए !

Pic Courtesy: The Economic Times
नकदी का हिसाब किताब छोड़िए मालिक ! करोड़पति होना है तो ई-पेमेंट कीजिए। जी हां, आप सही पढ़ रहे हैं। डिजिटल पेमेंट कीजिए और करोड़पति हो जाइए। क्या कहा, ऐसे कैसे मिल जाएगा करोड़ रुपये?  अरे साहब, नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार का सारा जोर अब नकद लेन देन की आदत पर लगाम लगाने की है और वो डिजीटल बटुए को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ रही है।
ऐसे में नीति आयोग ने एक योजना बनाई है जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के मकसद से आयोग एक करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार देगी। ये पुरस्कार उनको दिया जाएगा जो डिजिटल पेमेंट करते हैं।
आयोग ने इसके लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) योजना की रुपरेखा बनाने और उसको जल्द लांच करने को कहा है। सूत्रों की माने तो इसके लिए एनपीसीआई फंड से 125 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की सारी तैयारी भी पूरी कर ली गई है। एनपीसीआई यानि नेशनल फाइनेंशियल इन्क्लुशन फंड रिटेल पेमेंट सिस्टम को चलाने वाला वो संगठन है जिसकी छतरी के तले एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ोदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आई सी आई सी आई, एचडएफसी बैंक, सिटी और एचएसबीसी बैंक अपनी पेमेंट प्रणाली चलाती हैं।
इस प्रोत्साहन पुरस्कार योजना का मकसद गांवों और छोटे शहरों में डिजिटल बटुए को लोकप्रिय बनाना है। सूत्र बता रहे हैं कि एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि के लिए प्रत्येक पंद्रह दिनों में डिजिटल ट्रांजेक्शन आईडी के ड्रॉ निकाले जाएंगें। इस योजना में फोकस देश के गरीब, निम्न मध्य वर्ग और छोटे व्यापारियों को रखा जाएगा। यही नहीं एक करोड़ रुपये के इस पुरस्कार के लिए अलावा दस ग्राहको औऱ दस व्यापारियों को प्रति सप्ताह दस दस लाख रुपये के भी पुरस्कार दिए जाएंगे।
नीति आयोग का मानना है कि नोटबंदी के एलान के बाद से डिजिटल ट्रांजेक्शन में अच्छी खासी बढोत्तरी हुई है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के एलान के बाद डिजिटल पेमेंट में तीन सौ फीसदी की बढोत्तरी हुई है।
इस योजना के तहत सभी ग्राहक और व्यापारी जो USSD, UPI  और RuPay कार्ड आदि तरीकों से पेमेंट कर रहे हैं वो इस पुरस्कार राशि पाने की पात्रता रखते हैं। जानकारी के मुताबिक आयोग इस महीने के अंत तक इस योजना को लांच करेगा औऱ जिन्होंने भी नोटबंदी के एलान के बाद इस डिजिटल बटुए का इस्तेमाल किया हो वो करोड़पति होने के इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं।
तो चलिए क्या पता अगली लॉटरी आप ही की निकल जाए ! हम भी दिल थाम कर इंतजार करते हैं कि आखिर कौन बनेगा पहला करोड़पति?

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

कन्याकुमारी के तट पर सियासी शून्यता

Pic Courtesy: Twitter Account of PM Narendra Modi
फाइटर जयललिता नहीं रहीं। एमजीआर की समाधी के बगल में ही पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार आज किया गया। अपनी बीमारी से लड़ती जयललिता जीवन और मौत के संघर्ष की आखिरी और संभवत पहली लड़ाई हार गईं और इसी के साथ संभवत तमिलनाडू के एक और सियासी युग का पटाक्षेप हो गया।
93 वर्षीय द्रमुक प्रमुख करूणानिधि अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। ज़ाहिर है करूणानिधी भी अब बहुत सक्रिय नहीं रह पाएंगे। ऐसे में तमिलनाडु के दूसरे प्रमुख राजनीतिक दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम के लिए भी उत्तर करूणानिधी युग किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
अपनी बीमारी से लड़ती जयललिता के इस पूरे दौर में जिस तरह उनकी पुरानी सहयोगी और मित्र शशिकला एक बार फिर सक्रिय हुईं वो सक्रियता परदे पर पहली बार जयललिता की मौत के बाद दुनिया के सामने तब आया जब जयललिता के मृत शरीर के साथ उनके आवास पर शशिकला को पुरे समय तक लोगों ने खड़े देखा। अंतिम यात्रा में ट्रक पर शशिकला साथ थीं और मुख्यमंत्री जयललिता का अंतिम संस्कार की रस्मों को भी उनकी सखी रहीं शशिकला ने ही पूरा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जयललिता को श्रद्धांजली देने पहुंचे। जिस तरह से जयललिता के शव के पास खड़ी और सिसक रही शशिकला के सिर पर हाथ फेरकर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें सांत्वना दिया वो तस्वीर पुरे देश ने देखा। जयललिता को श्रद्धांजली देने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी को देखकर आधी रात को मुख्यमंत्री बने ओ पनीरसेल्वम जिस तरह सिसक पड़े औऱ प्रधानमंत्री ने उन्हें सांत्वना दिया वो वाकया भी टेलीविजन न्यूज चैनलों के लगातार प्रसारण के जरिए पूरे देश ने देखा।
पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री पनीर सेल्वम और जयललिता की सबसे करीबी रही शशिकला को सांत्वना देने के साथ जयललिता के सम्मान में कुछ ऐसे फैसले किये जो अभूतपूर्व हैं। जयललिता के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय शोक का एलान किया है जो आमतौर पर किसी मुख्यमंत्री के निधन पर नहीं किया जाता है। इसके अलावा आज संसद के दोनों सदनों को स्थगित करके सरकार ने जयललिता के प्रति अपना सम्मान जाहिर किया। जब जयललिता अस्पताल में भर्ती थीं, तब भी बीजेपी के तमाम बड़े नेता उनका हालचाल जानने के लिए चेन्नई जाते थे।
जयललिता के साथ बीजेपी के रिश्ते उतार चढ़ाव भरे रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते शुरू से अच्छे रहे हैं। बीजेपी के लिए अच्छी बात ये है कि जयललिता की पार्टी के साथ उसका रिश्ता काफी अच्छा रहा है।
यूपीए सरकार के दिनों में आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद जगन मोहन रेड्डी के साथ तत्कालीन केंद्र सरकार का व्यवहार देखकर और उसके बाद आंध्र प्रदेश में हुई पार्टी की दुर्गति से वर्तमान केद्र सरकार के इस सावधान रवैये को आसानी से समझा जा सकता है।
जयललिता की मौत के एक घंटे के भीतर मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के साथ 30 से अधिक मंत्रियों ने शपथ ग्रहण कर सरकार के स्तर पर उपजी शून्यता को तत्काल भर दिया। अब सवाल पार्टी के महासचिव पद के लिए जयललिता के उत्तराधिकारी चुने जाने का है। समर्थकों के बीच चिनम्मा के नाम से मशहूर शशिकला क्या इस जिम्मेदारी को संभालेंगी?  क्या अम्मा की जगह चिनम्मा होंगी? जाहिर है इस पूरे दौर में जो संकेत उभरे हैं उससे तो ऐसा ही लगता है। हालांकि अगर ऐसा होता भी है तो शशिकला के लिए आगे की राह आसान है ऐसा भी नहीं।
यहीं से शायद केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए तमिलनाडु में सियासी संभावनाओं के द्वार खुले सके। यही वजह है कि जयललिता की बीमारी के इस पुरे दौर में केंद्र सरकार ने भी बड़ी ही फूंक फूंक कर सावधानी से कदम उठाए। जयललिता के जाने से कमजोर पड़ी अन्नाद्रमुक के लिए ये बेहतर विकल्प होगा कि पार्टी केंद्र सरकार और भाजपा के साथ अच्छे संबंध रख कर पार्टी के समक्ष आई इस बड़ी चुनौती से पार पाए।
कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक से हार्दिक संबंध रखने वाले इस देश के दक्षिणपंथ को भी संभवत कन्याकुमारी के तट तक अपने पांव पसारने के लिए यही मुफीद मौका दिख रहा है। तमिलनाडु के आने वाले भविष्य की राजनीति बहुत कुछ इन्हीं दांव पेंचों के जरिए तय होगी क्योंकि वहां पिछले चार पांच दशकों की ‘कल्ट’ सियासत दम तोड़ती नजर आ रही है और राज्य के नए सियासी योद्धा अब तक खुद को कल्ट में तब्दील नहीं कर पाए हैं। 

रविवार, 4 दिसंबर 2016

एक परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की आय सार्वजनिक कर आईटी डिपार्टमेंट को चौंकाया, सरकार ने बिठाई जांच

Pic Courtesy: IT Dept. 
मुंबई: अहमदाबाद के व्यापारी महेश कुमार चंपकलाल शाह के 13,860 करोड़ रुपये की आय को सार्वजनिक किए जाने के बाद अब मुंबई के चार सदस्‍यीय परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की आय की घोषणा कर सरकार को भी चौंका दिया है। दरअसल ये दोनों घोषणाएं केंद्र सरकार द्वारा इस साल बजट में लाई गई इन्कम टैक्स डिक्लरेयशन स्कीम 2016 के तहत की गई हैं जिसकी मियाद 30 सितंबर, 2016 को खत्म हुई है।
मुंबई स्थित बांद्रा के चार सदस्यों वाले परिवार मोहम्मद सैयद, मोहम्मद आरिफ अब्दुल रज्जाक सैयद, रूखसाना अब्दुल रज्जाक सैयद और नुरजहां मोहम्मद सैयद ने आईडीएस2016 स्कीम के तहत अपनी चार सदस्यों के परिवार की आय दो लाख करोड़ रुपये दिखाई जिसके बाद आयकर अधिकारियों ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी। वित्‍त मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले की पूरी जांच होगी। वित्‍त मंत्रालय का कहना है कि इस परिवार की घोषणाएं ''संदिग्‍ध चरित्र की लगती हैं क्‍योंकि इस परिवार के आय के संसाधन सीमित हैं''।
सरकार ने इस योजना के तहत दोनों ही घोषणाओं को खारिज करते हुए दोनों ही मामलों में जांच बिठा दी है। इस परिवार में अब्‍दुल रज्‍जाक मोहम्‍मद  सैयद, पुत्र मोहम्‍मद आरिफ अब्‍दुल रज्‍जाक सईद, पत्‍नी रुखसाना अब्‍दुल रज्‍जाक सैयद और बेटी नूरजहां मोहम्‍मद सईद हैं और ये परिवार मुंबई के ब्रांदा इलाके में रहता है। इस परिवार के तीन सदस्‍यों के पैन कार्ड अजमेर के पते पर बने थे और इसी सितंबर में ये लोग मुंबई आएं जहां ये वित्‍त घोषणाएं की।
ये घोषणाएं इस साल बजट में घोषित की गई स्‍कीम के तहत की गई थीं। इस स्‍कीम के तहत यदि कोई अघोषित आय को जाहिर करता है तो उसको घोषित आय का 45 प्रतिशत टैक्‍स, सरचार्ज और पेनल्‍टी के रूप में देना होगा। इस स्‍कीम की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी और इसके तहत तकरीबन 71 हजार लोगों ने कुल 67,382 करोड़ रुपये की घोषणा की। सईद परिवार ने जो घोषणा की है, वह इस घोषित राशि से तिगुनी है।
इस संदर्भ में वित्‍त मंत्रालय ने अहमदाबाद के बिजनेसमैन महेश शाह केस का हवाला दिया। शाह ने 13 हजार करोड़ रुपये के काले धन की घोषणा के बाद से पिछले महीने से लापता था। सरकार ने उसकी भी घोषणाओं को खारिज कर दिया। बाद में जब शाह प्रकट हुआ तो इसने बताया कि ये पैसा उसका नहीं है बल्कि राजनेताओं, नौकरशाहों और बिल्‍डरों का है।
शाह से रविवार को भी सात घंटे तक पूछताछ की गई और स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से उसको घर जाने की अनुमति दी गई। अब उससे सोमवार को पूछताछ होगी।

डिजीटल इंडिया के सपने देख रहे देश को जावेद ने दिखाई हकीकत, पीएम नमो एप हैक

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन और डिजीटल इंडिया की उड़ान पकड़ती मुहिम को मुंबई के एक 22 साल के युवा ने आईना दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के फैसले पर पुरा देश तमाम कठिनाइयों के बाद जहां पीएम के फैसले को सिर्फ इस उम्मीद से स्वीकार करता दिख रहा है कि शायाद इससे कालेधन के प्रवाह को रोका जा सके। फैसले के क्रियान्वयन और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए समुचित तैयारी का अभाव लोगों के लिए बेहद कठिनाइयों की वजह भी बना है।
ऐसे में बार बार लगातार केंद्र सरकार की और दिए जा रहे गो डिजीटल का  नारे की वास्तविकता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ये सवाल है कि इस रास्ते पर आगे तो बढ़ा जा सकता है लेकिन क्या ये रास्ता सुरक्षित है। और अगर सुरक्षित है तो क्या सरकारी महकमें की ओर से वाकई इसे सुरक्षित बनाए रखने के प्रबंध किए गए हैं। इसके जवाब में सरकारी दावा जो कुछ भी हो लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर दिख रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आईफ़ोन, एंड्रॉयड और विंडोज फोन के लिए काफी धूमधाम के साथ लांच किए गए आधिकारिक नमो ऐप लांच को मुंबई के एक 22 वर्षीय डेवलपर ने हैक कर इस ऐप की कई सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है।
युवक जावेद का कहना है कि मैने पीएम मोदी के नमो ऐप को हैक किया है , लेकिन उसका इरादा हानि पहुंचाना नहीं बल्कि सुरक्षा खामियों को उजागर करना था। जावेद के अनुसार ऐप में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने की वजह से सत्तर लाख यूजर्स की जानकारी सार्वजनिक हो सकती थी।
जावेद के इस दावे को बीजेपी ने खारिज किया है। हालांकि इस काम के लिए बीजेपी ने जावेद को थैंक्स कहा है। भाजपा के सूचना एवं तकनीकी के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने बताया कि इस ऐप में कोई निजी या संवेदनशील डेटा नहीं है। मालवीय ने कहा कि हम जावेद खत्री को धन्यवाद देना चाहते हैं कि डेवलपर ने ऐप की सुरक्षा पर बहुत ध्यान दिया है।
बता दें कि गुरुवार की देर रात पेशे से मोबाइल ऐप डेवलपर जावेद खत्री ने दावा किया कि उसने पीएम मोदी के ऐप को हैक किया है और वह यूजर्स के निजी डेटा तक पहुंच बना सकता है। निजी डेटा में ईमेल आईडी और यहां तक कि केंद्रीय मंत्रियों के मोबाइल नंबर भी शामिल हैं। युवा हैकर ने बताया यह सिर्फ इस सुरक्षा बचाव को दिखाने का रास्ता है जो मैं दिखाना चाहता है। सात लाख से अधिक यूजर की गोपनीयता दांव पर है अगर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है तो।
मुंबई के घाटकोपर में रहने वाले पेशे से मोबाइल ऐप डवलपर जावेद ने गुरुवार (एक दिसंबर) की रात को एक वेबसाइट को बताया कि उसने प्रधानमंत्री की ऐप को हैक कर लिया है। इसके जरिए यूजर्स के प्राइवेट डाटा जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को एक्‍सेस किया जा सकता है। यहां तक कि केंद्रीय मंत्रियों के मोबाइल नंबर भी लिए जा सकते हैं। जावेद के अनुसार उसने 70 लाख यूजर्स के डाटा की सिक्‍योरिटी में खामी को सामने लाने के लिए ऐसा किया।
हालांकि भाजपा की आईटी सेल की ओर से कहा गया कि ऐप में कोई निजी या संवेदनशील डेटा नहीं है। ऐप यूजर की जानकारी ऐनक्रिप्‍टेड मोड में होती है। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी का टि्वटर अकाउंट हैक हो गया था। हैकर ने उनके अकाउंट से गालियां ट्वीट कर दी थी। इसके बाद कांग्रेस का आधिकारिक अकाउंट भी हैक कर लिया गया था।
ऐसे में ये सवाल एक आदमी के मन में जरूर उठ रहा है कि जब इतने हाई प्रोफाइल लोगों के अकाउंट भी अगर सुरक्षित नहीं तो क्या सिर्फ इस तरह की तैयारयों के दम पर अपनी गाढ़ी कमाई को उस रास्ते पर लाया जाए जिसकी सुरक्षा को लेकर सत्ता प्रतिष्ठान के पास न तो कोई ठास दावे हैं और न हीं भविष्य का कोई रोड मैप?

गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

राहुल गांधी का ट्वीटर अकाउंट हैक, कांग्रेस ने डिजीटल सुरक्षा पर उठाए सवाल

Pic Courtesy: @officeOfRG
नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट को बुधवार की रात हैक कर लिया गया जिसे बाद में रिस्टोर कर लिया गया है। राहुल गांधी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट @OfficeOfRG को हैक कर हैकर ने अपशब्द ट्वीट किया। हैकिंग के बाद कांग्रेस ने देश की डिजिटल सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
राहुल का अकाउंट बुधवार रात करीब 8 बजकर 40 मिनट पर हैक हुआ और जिसकी जानकारी सोशल मीडिया टीम को 15 मिनट बाद ही हो गई। उस पर अपशब्दों से भरे कुछ मैसेज डाल दिये गये जिसे तुरंत ही डिलीट कर दिया गया। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विटर अकाउंट हैकिंग की निंदा करते हुए इसे गिरी हुई हरकत बताया। सत्यापित ट्विटर हैंडल का नाम ऐट द रेट ऑफ आफिसऑफआरजी को भी बदल दिया गया। देर रात अकाउंट रीस्टोर कर दिया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने राहुल गांधी के ट्वीटर अकाउंट के हैक होने के बाद केंद्र सरकार की डिजीटल इंडिया के नारों पर सवाल खड़े किए और नोटबंदी के बाद देश को कैशलेश इकॉनमी की ओर ले जा रहे केंद्र सरकार के प्रयासों पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए। अहमद पटेल ने ट्वीट कर लिखा, ‘जिस तरह से राहुल गांधी का ट्वीटर अकाउंट हैक हुआ और साइबर क्राइम सेल और ट्वीटर असहाय बना रहा उससे देश के डिजिटल इंडिया और डिजिटल सुरक्षा के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जो लोग देश को नोटबंदी के जरिए ऑनलाइन पेमेंट प्रणाली की ओर जबरदस्ती धकेल रहे हैं क्या उन्होंने देश के आम लोगों के अकाउंट को हैकिंक से बचाने के लिए कोई ठोस कदम की अभी तक व्यवस्था की है?’
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘इस तरह की घटिया चालों से तर्कपूर्ण बातें खत्म नहीं होगी ना ही आम आदमी के मुद्दे उठाने से राहुल गांधी पीछे हटेंगे’। सुरजेवाला ने कहा, ‘राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल को हैक करने में बिकाउ ट्रोलों का इस तरह अशोभनीय, अनैतिक और शातिर आचरण विद्यमान फासीवादी संस्कृति की असुरक्षा को दिखाता है’। सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘ऐट द रेट ऑफ ऑफिसऑफआरजी की हैकिंग हम सब के इर्द गिर्द डिजिटल सुरक्षा की कमी को साबित करता है। हरेक डिजिटल सूचना तक पहुंचा जा सकता है, तोड़ा मरोड़ा जा सकता है’।
हैकर ने ट्वीट में अपशब्द कहे और गांधी परिवार के भीतर भ्रष्टाचार की बातें कह और कई भद्दी टिप्पणियां लिखीं। रणदीप सुरजेवाला ने इसे नीच हरकत बताया है।
नोटबंदी के फैसले का विरोध कर रही कांग्रेस ने राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट के हैक होने के मामले को लेकर डिजिटल सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बता रही है कि डिजिटल सुरक्षा कितनी बड़ी चुनौती है. गौरतलब है कि मोदी सरकार ने नोटबंदी के फैसले के पीछे काले धन का खात्मा और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना मुख्य लक्ष्य बताया था।
कांग्रेस की ओर से इस मामले को साइबर सेल में भी दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। कांग्रेस ने कहा है कि वह मामला संसद में शून्यकाल में उठाएगी।