रविवार, 13 मई 2018

मोदी जी ! ननिहाल से कोई खाली नहीं जाता यह बात मैथिल बखुबी जानते हैं

"ग पग पोखरि माछ मखान ,सरस बोल मूसकी मूख पान , विद्या वैभब शांति प्रतीक ... ई मिथिला  थीक"।  अपने चार साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी जब तीसरे दौरे में नेपाल के जनकपुर धाम पहुंचे तो उन्होंने मिथिला के गौरवशाली परंपरा का कुछ यूँ बखान किया वो भी मिथिलेश कुमारी यानी सिया जी की मातृभाषा में। मिथिला में आकर मोदी अभिभूत थे ,यहाँ तक कि उन्होंने माता सीता के जनकपुर को अपना ननिहाल माना और कहा ननिहाल को कुछ दिए बगैर कोई कैसे जायेगा।

पीएम मोदी जनकपुर स्थित जानकी मंदिर में पूजा करते हुए 
लेकिन सरलता ,सरसता और मुस्की वाली मिथिला /बिहार की पीड़ा कथाकार राजकमल चौधरी की "अपराजिता "से बेहतर समझी जा सकती है। “गारंटी ऑफ पीस” खतम छल…विद्यापतिक गीत खतम छल। रूसक कथा खतम छल। डकैतीक कथा थम्हि गेल…सोना-चानीक तेजी-मन्दी सेहो बन्द भऽ गेल रहय। सिकरेटक लगातार धुँआ रहि गेल आ रहि गेल अपराजिता! सरिपहुँ… बागमती, कमला, बलान, गंडक आ खास कऽ कऽ कोसी तँ अपराजिता अछि ने! ककरो सामर्थ नहि जे एकरा पराजित कऽ सकय। सरकार आओत…चलि जायत..मिनिस्टरी बनत आ टूटत, मुदा ई कोसी…ई बागमती…ई कमला आ बलान…अपन एही प्रलयंकारी गति मे गाम केँ भसिअबैत, हरिअर-हरिअर खेत केँ उज्जर करैत, माल-जालकेँ नाश करैत, घर-द्वारक सत्यानाश करैत बहैत रहत आ बहैत रहत"

तो सत्तर साल की आज़ादी के बाद भी भारत  नेपाल की बीच बाढ़ की विभीषिका को अबतक नज़र अंदाज किया जाता रहा।अबतक इन इलाकों की तस्वीर नहीं बदली।  1950 से लेकर अबतक भारत-नेपाल  कोसी एग्रीमेंट से आगे नहीं बढ़ पाया। वाटर मैनेजमेंट को लेकर भारत और नेपाल का अतीत तल्खियों से भरा रहा है। कोसी, गण्डकी, महाकाली जैसी बड़ी नदियों पर बाँध बनाने और सिंचाई -बिजली की बात भी शुरू हुई लेकिन 50 वर्षो में दोनों देश कोसी प्रोजेक्ट में ही उलझे रहे। दोनो देश पानी और प्रबंधन के मुद्दे पर ही उलझते रहे। अगर छोटी बड़ी नदियों  की बात करे तो 6000 ज्यादा जलधारा नेपाल से निकलती है और हर साल बिहार और उत्तर प्रदेश के करोड़ो लोग इससे प्रभावित होते रहे हैं । जब की इन विशाल जलसंसाधन की क्षमता दोनों देशों के लाखों एकड़ जमीन  सिंचित कर सकती  है और पुरे उत्तर भारत के बिजली की आपूर्ति अकेले नेपाल की नदियां कर सकती है। मोदी जी आपने सही कहा नेपाल के बिना हमारे विशवास अधूरे है सिया के बगैर राम क्या ? सो नासमझी में गरीबी उधर भी है और इधर भी।

जनकपुर में नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी 
फणीश्वरनाथ रेणु के 40 साल पुराने संस्मरण को पढ़िए ,कुछ भी तो नहीं बदला है। .बिहार, बाढ़ और भ्रष्टाचार की कहानी में। सोन, पुनपुन, फल्गु, कर्मनाशा, दुर्गावती, कोसी, गंडक, घाघरा,  कमला, भुतही बलान, महानंदा इतनी नदियाँ जो जीवन धारा बन सकती थी लेकिन हर साल सिर्फ तबाही लाती है और हमारी सरकार फिर  अगली बार का इन्तजार करती है। बिहार के 18 जिलों में जलप्रलय जैसी हालत हर साल बनती है। 3  करोड़ से ज्यादा लोग  प्रभावित होते  है। लेकिन पटना में सरकार अपनी राजनितिक अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही होती  है। उधर विपक्षी दलों के सामने टारगेट पीएम मोदी के असर को कम करना है। कोसी का  असर तो हर साल  फीचर है।  ज्यादा से ज्यादा मरने वालों की संख्या बढ़ेगी और सम्पति का नुक्सान बढ़ेगा !  ऐसी ही  राजनितिक उपेक्षा का नतीजा उत्तर बिहार/मिथिला  की बाढ़ है।  इस सियासत का उत्तर बिहार वर्षों से शिकार रहा है ।

1955  में केन्द्र सरकार ने एक योजना बनाई थी , जिसमें बराहक्षेत्र में 100  करोड़ रूपये की लागत से एक डैम बनाया जाना था । इस बाँध के बन जाने से उत्तर बिहार खासकर मिथिला  के 20  लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जा सकता था साथ ही 4000  मेगावाट के करीब बिजली भी पैदा की जा सकती थी । लेकिन भारत सरकार के सामने प्राथमिकता भाखड़ा  नंगल डैम थी ,क्योंकि इसका नेतृत्व प्रताप सिंह कैरों कर रहे थे । पैसे की तंगी बहाना बना और बिहार की लाखों आबादी भूख, अशिक्षा, और बेरोजगारी के दल दल में लगा तार फंसती रही लेकिन वह डैम नहीं बन पाया।

कोसी का कटाव
नेपाल से निकलने वाली कोसी  नदी तक़रीबन 69000  कि मी सफर तय करके गंगा में बिलुप्त हो जाती है । नेपाल की यह सप्त कोशी अपनी सातों धाराओं के साथ मिलकर बिहार मे कोसी  बनकर अपना प्रचंड रूप ले लेती है । खास बात यह है कि कोसी  की धारा उन्ही इलाके से बहती है जो वर्षों से  न केबल बिहार से बल्कि देश की उपेक्षा के भी शिकार रहे  है। मिथिलांचल में हर साल आने वाले इस प्रलय को हाई डैम बनाकर ही रोका जा सकता था  ।  बिहार की  बाढ़ हर साल  एक हफ्ते के लिए नेशनल मीडिया की बड़ी खबर होती है।  डिबेट शो में बिहार की बाढ़ की भी लालू जी  के बेटे  तेजप्रताप की शादी की तरह टी आर पी है लेकिन हफ्ते पंद्रह दिनों के बाद लोग भूल जाते हैं । फ़िर शुरू होती है किसी घोटाले कि कहानी । बिहार में पिछले 10 साल पुरानी  बाढ़ घोटाले कि जांच अभी भी चल रही है। ये अलग बात है कि घोटाले के वही नायक हर बार बाढ़ प्रभावित इलाके में अपनी सेवा  का मौका ले लेते हैं।

बिहार की यह कहानी सचमुच "अपराजिता" है। राजकमल चौधरी और फणीश्वर नाथ की "कोसी" में कुछ नहीं बदला है सिर्फ पात्र बदले है जगन्नाथ जी हों या लालू  फिर नीतीश जी बाढ़ ने मिथिलांचल की काया को क्षीण करके राजनेताओं की सियासी काया को हमेशा मजबूती दी हैं।  प्रधानमंत्री मोदी का नेपाल को लेकर जद्दोजेहद  काफी गंभीर और चुनौतीपूर्ण  है और मोदी इस कूटनीति का जवाब देना जानते है। लेकिन सिया की नगरी से  सांस्कृतिक सम्बन्ध प्रगाढ़ करने का जो संकल्प मोदी जी ने लिया है उसमे रामायण सर्किट के साथ साथ इन इलाकों को भी आर्थिक प्रगति से जोड़ना होगा। इसमें सिर्फ मजबूत इच्छाशक्ति की जरुरत है। मोदी जी ! वैसे, ननिहाल से कोई खाली नहीं जाता यह बात मिथिला के लोग जानते हैं।

लेखक - विनोद  मिश्र

वरिष्ठ पत्रकार विनोद मिश्र वर्तमान में डीडी न्यूज से संबद्ध हैं और कंसल्टेंट के पद पर कार्यरत हैं

रविवार, 6 मई 2018

"पाकिस्तान #AMU की पैदाइश, बांकि सारी बातें इतिहास पर पर्दा डालने की कोशिश"

दस सालों तक उपराष्ट्रपति रह कर सत्ता की मलाई चाटने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी(पूर्व छात्र, #AMU) को एहसास हुआ कि भारत के मुसलमान डर के साये में जी रहे हैं। ये बानगी है उस ऐतिहासिक मानसिकता की जिसने भारत के टुकड़े करवाये। जब तक सत्ता में रहते हैं, ये मुल्क अपना लगता है। सत्ता खोने के डर से देश को तोड़ने की बात होने लगती है।

यह मानना कि भारत के टुकड़े करने के लिए अकेले जिन्ना जिम्म्मेवार है तो यह एक भुलावे जैसा है। इतिहास पर पर्दा डालने की कोशिश है। जिन्ना सिर्फ एक मोहरा था, असल में तो पाकिस्तान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी #AMU की पैदाइश है। जिन्ना धर्मनिरपेक्ष था। #AMU ने जिन्ना को कट्टर साम्प्रदायिक बनाया। जिन्ना को सामने रखा और उसका इस्तेमाल कर देश को तोड़ दिया।

पाकिस्तान के जाने माने अर्थशास्री और कम समय के लिए पाकिस्तान के वित्त मंत्री भी रहे शाहिद जावेद बुर्की अपनी किताब पाकिस्तान: फिफ्टी इयर्स ऑफ नेशनहुड में लिखते हैं कि "सर सय्यद की बनाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी #AMU ने न केवल पाकिस्तान आंदोलन और उसके कर्ताधर्ताओं को जन्म दिया बल्कि दुनिया के नक्शे पर एक नए मुल्क पाकिस्तान और उसके शुरुआती शासकों को भी पैदा किया। अलीगढ़ यूनिवर्सिटी #AMU ने मुसलमानों में नई राजनीतिक चेतना जगाई और भारत के मुसलमानों को 'टू नेशन्स थ्योरी' के पीछे खड़ा किया।"

पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा स्कूल की किताबों में यही पढ़ता है लेकिन भारत में इतिहास के इन तथ्यों पर चालाकी से पर्दा डाल दिया गया है। जिहादियों को बंदूक चलाने के लिए भारत में बहुत सारे कंधे हासिल हैं। 'कवर फायर' के लिए राजनीतिक दलों, एन जी ओ, पत्रकारों, इतिहासकारों, कलाकारों की एक लंबी श्रृंखला है।

वर्तमान पाकिस्तान तो सिर्फ एक भूगोल है। पाकिस्तान का इतिहास #AMU के अंदर आज भी जिंदा है। #AMU की नींव जिस सय्यद अहमद खान ने रखी थी, उसी ने पहली बार 'टू नेशन्स थ्योरी' को दुनिया के सामने रखा। 'टू नेशन्स थ्योरी' के आधार पर ही देश के टुकड़े हुए।

सय्यद अहमद खान ने 1857 की आजादी की लड़ाई को 'हरामजदगी' कहा। मुसलमानों को आजादी की लड़ाई से अलग किया। ये हैं उसकी सोच के कुछ नमूने :

1. " हिंदुओं के साथ रहने की बजाय हम अंग्रेजों के नीचे रह लेंगे क्योंकि वो भी किताब (आसमानी) से चलने वाले हैं।"
2. " जब तक दो कौमों में से कोई एक जीत कर दूसरे को गुलाम नहीं बना लेगा तब तक अमन कायम नहीं हो सकता।"
3. " उर्दू सभ्य लोगों की भाषा है और हिंदी गँवारों की भाषा है।"

ये हैं #AMU के संस्थापक की विभाजनकारी, साम्प्रदायिक और हिंदुओं के प्रति घृणा और हिंदी भाषा से नफरत की सोच के नमूने जिसकी बुनियाद पर आगे चल कर मुस्लिम लीग बनाई गई। अंदाजा करना मुश्किल नहीं कि जब जड़ ही ऐसी थी तो फल कैसे होंगे।

आइये देखते हैं #AMU से निकलने वाले पाकिस्तान के रहनुमाओं को:-

1. लियाकत अली खान जिसने अपनी बीवी राणा के साथ 1930 के गोलमेज सम्मेलन से निराश जिन्ना को दुबारा भारत आने के लिए राजी किया ताकि मुस्लिम लीग के अधूरे काम को पूरा किया जा सके। ये पाकिस्तान का पहला प्रधानमंत्री बना।

2. फजल इलाही चौधरी पाकिस्तान का पाँचवाँ राष्ट्रपति, पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली का स्पीकर और लियाकत अली खान की सरकार में मंत्री।

3. पाकिस्तान की हुकूमत पर कब्जा करने वाला पहला फौजी जनरल अयूब खान; पाकिस्तान का दूसरा राष्ट्रपति। जो अलीगढ़ #AMU की अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। कर लेता तो शायद पहला राष्ट्रपति ही बन जाता।

4. खान हबीबुल्लाह खान; कार्यवाहक राष्ट्रपति, सीनेट का पहला चेयरमैन, पश्चिमी पाकिस्तान का मुख्यमंत्री और अयूब खान की सरकार में गृहमंत्री।

5. ख्वाजा नजीमुद्दीन: पाकिस्तान मुस्लिम लीग का अध्य्क्ष, पाकिस्तान का दूसरा प्रधानमंत्री और दूसरा गवर्नर जनरल।

6. अबू बकर अहमद हलीम; (पैदाइश बिहार में), #AMU में प्रोफेसर, पाकिस्तान आंदोलन में पर्चे और साहित्य लिखने की जिम्मेदारी। सिंध यूनिवर्सिटी का पहला वाइस चांसलर और कराँची यूनिवर्सिटी का पहला वाइस चांसलर।

7. ज़ियाउद्दीन अहमद; #AMU के कुलपति, पाकिस्तान आन्दोलन में केंद्रीय नेतृत्व।

8. अब्दुर रब निश्तर; पाकिस्तानी पंजाब का पहला पाकिस्तानी गवर्नर, पाकिस्तान का संचार मंत्री।

दर्जनों ऐसे नाम हैं। साफ है कि जिन्ना के उस्ताद और गुर्गे सब #AMU की ही पैदाइश थे जिन्होंने भारत के टुकड़े कर पाकिस्तान को पैदा किया। पाकिस्तान बने इसके लिए ऑल इंडिया सुन्नी कॉन्फ्रेंस के बैनर तले बरेलवी मौलानाओं ने फतवे जारी किए। 'इस्लाम खतरे में है' यह हल्ला कर मुस्लिम लीग ने बरेलवी और सूफियों को पाकिस्तान के लिए राजी किया। मौलाना हुसैन अहमद मदनी ने जरूर पाकिस्तान के विचार का विरोध किया लेकिन कुछ ताकतवर देवबंदी मौलाना समर्थन में भी थे।

बँटवारे ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। कालांतर में किसी देश और समाज के धार्मिक आधार पर विभाजन के लिए पाकिस्तानवाद शब्द ही प्रयोग होने लगा। नाइजीरिया और सूडान इसके उदाहरण हैं।

अलीगढ़ विश्वविद्यालय #AMU ने दुनिया को एक मुल्क ही नहीं दिया है। ओसामा बिन लादेन के भक्त और महमूद गजनवी की याद में आँसू बहाने वाले प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया #SIMI की पैदाइश भी 1977 में #AMU से ही हुई है। जिस पर 2001 में अटल जी की सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। लश्करे तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन, हूजी, हरकत उल अंसार जैसे आतंकी संगठनों के साथ सिमी के रिश्ते जगजाहिर हैं लेकिन कांग्रेस ने इसी सिमी #SIMI को बचाने के लिए #भगवा_आतंकवाद का षड्यंत्र रचा। हिंदुओं और हिन्दू संगठनों को फँसाने में कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। आज भी सिमी #SIMI, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नाम से #ISIS के स्लीपर सेल के रुप में काम कर रहा है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की गतिविधियों का अब पर्दाफाश हो रहा है और कुछ राज्यों में प्रतिबंध भी लगा है।



इस साल की शुरुआत में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी मन्नान बशीर वानी की खबरें और तस्वीरें वायरल हुई थी। साहब ने भी अपना शोध कार्य #AMU में ही पूरा किया था।

और कितना इतिहास वाचन किया जाए आपका? मेरा #AMU के भाइयों से इतना ही अनुरोध है कि ऐसी आजादी कहीं नहीं मिलेगी, जहाँ आप भारत तेरे टुकड़े होंगे.....इंशाअल्लाह.... इंशाअल्लाह के नारे लगा सको। पाकिस्तान में तो सिर्फ #मस्जिद_में_पाद_देने पर #तैमूर को सजा हो जाती है और भारत में #तैमूर की चिंता में मीडिया आसमान उठाये रहता है।

इसलिए भाइयों इतिहास के कलंक को मिटाने के लिए आगे आओ। शुरुआत जिन्ना की तस्वीर हटा कर की जा सकती है। जमाना बदल रहा है। उसकी आहट सुनो। गौर से देखो तुम्हारा प्यारा पाकिस्तान, तुम्हारे सपनों का पाकिस्तान 1971 के बाद फिर से बिखरने की कगार पर है।

लेखक - गोविंद शर्मा, हिंद-बलोच फोरम के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक हैं

गुरुवार, 3 मई 2018

काशी से कठुवा तक - कठघरे में कांग्रेस !

ठुवा कांड के बहाने एक बार पुन देशद्रोहियों ने भयानक षड्यंत्र के तहत नारी सम्मान को मुद्दा बनाया। क्योंकि इन्हें एक बात ठीक प्रकार से पता है कि भारतीय इतिहास में दो युद्ध, जो अमर प्रबंध काव्य है, वह नारी स्वाभिमान के लिए ही लड़े गए। भारतीय संस्कृति के स्त्री प्रधान होने के कारण एक आठ वर्षीय बालिका की हत्या एवं उसके बलात्कार के कहानी को गढ़ कर जिस प्रकार षड्यंत्र के केंद्र बिंदु में खड़ा किया गया और दिल्ली के इंडिया गेट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका के नेतृत्व में कैंडिल मार्च निकला, इस पूरे प्रकरण ने कांग्रेस के बीते इतिहास की याद दिला दी।
Pic Courtesy : National Herald
कांग्रेस पार्टी के इतिहास पर अगर आप नजर डालेंगें तो पाएंगे कि चाहे कांग्रेस के अंदर आंतरिक कमजोरियों के कारण सत्ता संघर्ष हुआ हो अथवा विपक्ष मजबूत हुआ हो और ऐसे हालात में कांग्रेस सत्ता से बेदखल हुई हो तो ये पार्टी स्त्री स्वाभिमान को मुद्दा बनाकर समाज के अंदर ऐसा वातावरण निर्मित करती रही है कि जिससे ये लगे कि हिन्दुस्तान चरित्रवानों का देश न होकर हवस के दरिंदों का देश होकर रह गया है। और तो और ऐसे लोगों को विरोध में उतारा गया जिन्हें देश के अंदर नग्नता एवं विकृति परोसने के लिए जिम्मेदार माना जाता है।
सन् 1939 में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव नेता जी सुभाष चंद्र बोस v/s सीताराम पट्टाभिरमैय्या के बीच हुआ जिसमें गांधी जी का यह कथन कि पट्टाभिरमेय्या की हार मेरी व्यक्तिगत हार होगी, इसके बावजूद सुभाष चंद्र बोस का चुनाव जीत जाना एक एतिहासिक तथ्य है। 
Pic Courtesy : Rediff
जिसके बाद गांधी जी और नेहरू ने कार्यसमिति के सभी सदस्यों से इस्तीफा दिलवा कर सुभाष चंद्र बोस को इस्तीफा देने के लिए विवश कर दिया। जिन लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से जीते हुए सुभाष चंद्र बोस को अपना अध्यक्ष स्वीकार नहीं किया। वो लोग नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप कैसे स्वीकार कर सकते हैं ? ये घटना तो उन दिनों का है जब देश को आजादी दिलाने की लड़ाई लड़ने का दंभ भरने वाली कांग्रेस, जहां पर दुश्मन विदेशी था और देश के लिए लड़ना था तब तो दल के अंदर कोई गैर अध्यक्ष हो जाए ये तो स्वीकार न हो सका क्योंकि सुभाष चंद्र बोस अंग्रेजों की दलाली नहीं कर सकते थे और उनका राष्ट्रप्रेम निष्कलंक था। 
फिर शुरू हुआ भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ मंदिरों के विरुद्ध भयानक षड्यंत्र का अभियान। कांग्रेस के तत्कालीन नेताओं को यह पता था कि मंदिर शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्पर्क एवं संस्कारों के केंद्र होते हैं और कांग्रेस के शीर्ष नेता सीताराम पट्टाभिरमैया ने औरंगजेब के द्वारा काशी विश्वनाथ के मंदिर तोड़े जाने के औचित्य को सही ठहराया। पट्टाभिरमैया ने अपनी पुस्तक में इसका जिक्र करते हुए यह कहा कि काशी के ब्राह्मण दुराचारी हो गए थे और उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में एक राजकुमारी का अपहरण कर बलात्कार किया। इस कारण औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ का मंदिर तोड़वाया। जब उनसे पूछा गया कि यह तथ्य आपको कहा से मिला तो उन्होंने बताया कि उनसे मिलने वाले एक मौलाना के पिता ने अरबी भाषा में पांडुलिपि में इसका जिक्र किया है। 
जब उस पांडुलिपि को दिखाने की बात आई तो मौलाना भी मुकर गए। परंतु एक तथ्य जो वामपंथियों के साथ मिलकर कांग्रेसी नेताओं ने स्थापित करने की कोशिश कि हिंदूस्तान के जितने भी हिंदू मंदिर तोड़े गए, उन सभी में दुराचार हो रहे थे। अयोध्या, मथुरा, काशी एवं सोमनाथ के मंदिरों को विदेशी आक्रांताओं द्वारा तोड़े जाने की घटनाओं का भी कांग्रेस के नेताओं ने बचाव किया। सन् 1939 से लेकर 2018 तक कांग्रेस की इस लाइन में परिवर्तन होता नहीं दिख रहा।
तिहासिक घटनाक्रम में मूल बात ये है कि मंदिर तोड़ने का कारण भी नारी अस्मिता को ही बनाया गया। फिर नब्बे के दशक में सोमनाथ मंदिर को गजनवी ने क्यों तोड़ा इस पर वामपंथी इतिहासकार जो कहानी लेकर आए उसका भी सार सार-संक्षेप भी यही था। 1975 इलाहाबाद हाईकोर्ट से चुनाव दुरूपयोग का मुकदमा हारने के बाद इमरजेंसी से जो त्राही हुई और इंदिरा गांधी का सत्ताच्युत होना कांग्रेस को खल गया। पुन कांग्रेस ने एक साजिश रची। उसे यह पता था 85 लोकसभा सीटों वाली यूपी में दिल्ली के सत्ता की चाभी है। सन 1979 में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में गोरखपुर से कुशीनगर जा रही एक बस से नारायणपुर गांव में एक बकरी कुचल कर मर गई। चूंकि वह बकरी अल्पसंख्यक समुदाय के किसी व्यक्ति की थी। उस गांव में बस को रोककर तोड़फोड़ की गई। बस में बैठी महिलाओं के साथ दुव्र्यवहार किया गया। बस के पीछे से उस क्षेत्र के तत्कालीन थानाध्यक्ष ललित नारायण चतुर्वेदी अपनी जीप से आ रहे थे। उन्होंने रोकने की कोशिश की, उनके साथ भी मारपीट की गई। फिर पीएसी ने बल प्रयोग करके वातावरण को शांत किया।
 
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तीन चार दिनों के अंदर बगैर प्रशासन को सूचना दिए चुपके से श्रीमति इंदिरा गांधी वहां पहुंची और कहानी में एक नया मोड़ आया। इस पूरे घटनाक्रम में नारायणपुर के अल्पसंख्यक परिवार की महिलाओं के साथ बलात्कार की बात जोड़ दी गई। दूसरे दिन पूरे देश में कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का मुद्दा बनाकर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बनारसीदास गुप्त से इस्तीफा ले लिया। बाद में पता चला कि महिलाओं के साथ दुव्र्यवहार जैसी कोई घटना हुई ही नहीं थी।
इसी प्रकार काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने के लिए काशी के ब्राह्मण और विद्वानों को जिम्मेदार ठहराने वाले बयान के बाद देश के प्रमुख मंदिरों के साथ कोई न कोई षड्यंत्र करके इसका सरकारी अधिग्रहण किया गया। ढाई साल मोरारजी, छह साल अटल जी अथवा नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में किसी भी हिन्दु मंदिर का सरकारी अधिग्रहण नहीं हुआ। देश में जितने भी हिन्दू मंदिरों का सरकारी अधिग्रहण हुआ वो सभी कांग्रेस के शासन काल में ही हुआ। 
वाराणसी (वर्तमान में चंदौली) जिले के रघुनाथपुर ग्राम के दो भाइयों मार्कंडेय एवं विभूति सिंह ने काशी विश्वनाथ मंदिर का सोना चोरी किया। पकड़े गए, जेल गए और इसको आधार बनाकर 1983 में काशी विश्वनाथ मंदिर का अधिग्रहण कर लिया गया। बाद में जेल से छुटने के बाद दोनों भाइयों में से एक अपने गांव का प्रधान भी बना और इनकी कांग्रेस नेताओं से नजदीकी कोई छुपी बात नहीं रही। सनातन हिन्दू धर्म और मंदिरों से घृणा कांग्रेस नेताओं के लिए छुपाने जैसी बात नहीं है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान दीपावली के दिन हिन्दूओं के सर्वोच्च धर्मगुरू शंकराचार्य की गिरफ्तारी और कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष राहुल गांधी का यह कथन की मंदिरों में तो लोग लड़कियां छेड़ने के लिए जाते हैं, कांग्रेस और खासतौर पर गांधी परिवार की सनातन हिन्दू समाज के प्रति सोच को नंगा करता है। कांग्रेस ने 1939 से लेकर 2018 तक अपने हिन्दु विरोध और नारी को केंद्र बिंदु बनाकर षड्यंत्र रचने के मूल स्वभाव को छोड़ा नहीं है। 
काशी से कठुवा तक आधारहीन आरोपों के द्वारा हमेशा मंदिर एवं हिन्दू आस्था के केंद्रों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। कठुवा के घटना के सम्बंध में कुछ तथ्य हम रख रहे हैं।
1. घटना जम्मू के कठुवा में सम्भवतः जनवरी में घटित हुई। ये मुद्दा 3 महीने बाद उठा।
2. जम्मू का यह इलाका कश्मीर घाटी के विपरीत शांत और हिन्दू बहुल है।
3. पीड़िता बंजारा प्रवृत्ति वाले बकरवाल मुस्लिम समुदाय से थी। उसके माता-पिता का निधन हो चुका था और वह अपने रिश्तेदार के साथ रहती थी। उसके नाम थोड़ी पारिवारिक सम्पत्ति भी थी।
4. कठुवा के इस इलाके में कुछ वर्षों से अवैध रोहिंग्या बसाहट हो रही है।
5. जनवरी में पीड़िता के लापता हो जाने के कुछ दिनों बाद उसका शव मंदिर में पाया गया।
6. पहली पोस्टमार्टम एवं फाॅरेंसिक जांच की रिपोर्ट में पीड़िता के साथ बलात्कार की घटना से इनकार किया गया।
7. मंदिर आबादी के बीच है जहां कोई बंद करने योग्य दरवाजा नहीं है। मंदिर हमेशा खुला रहता है, यहां रोज लोग आते हैं, यहां किसी को आठ दिनों तक बंधक बनाये रखना असम्भव है।
8. पीड़िता के शरीर पर गीली मिट्टी लिपटी हुई थी, अर्थात उसकी हत्या के पूर्व उसे मिट्टी पर लिटाया और घसीटा गया था। मंदिर मार्बल का है, जहां कीचड़ नहीं होता है और पोस्टमार्टम में बताये गए मृत्यु के समय पर आसपास कहीं बारिश नहीं हुई थी। हत्या कहीं और कर उसका शव कुछ समय पहले मंदिर में डाला गया।
9. मंदिर जिस तरह आबादी के बीच है, सम्भव नहीं है कि वहां 8 दिनों तक शव सड़ता रहे और लोगों को पता न चले।
10. घटना के बाद जब स्थानीय पत्रकार वहां पहुंचे तब रोहिंग्या लोगों ने उनके साथ मारपीट की।
11. मिडिया के एक तबके ने घटना के साथ हिन्दू आरोपी और घटनास्थल के रूप में मंदिर शब्द विशेष रूप से उछला।
12. भाजपा के विधायकों ने राज्य सरकार से के सीबीआई जांच करने का केंद्र से अनुरोध करने को कहा।
13. मुफ्ती सरकार ने सीबीआई जांच का अनुरोध न करते हुए जाँच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया।
14. कश्मीर में घटना के विरोध में आंदोलनों का नेतृत्व गुलाम नबी आजाद के प्रमुख सहयोगी कर रहे हैं।
15. जम्मू रीजन के पुलिस कर्मियों का नाम भी बलात्कारियों की लिस्ट में डाला गया ताकि जांच टीम में सिर्फ कश्मीर रीजन के (मुस्लिम पढ़े) अधिकारियों की नियुक्ति को उचित सिद्ध किया जा सके।
16. एसआईटी ने तत्काल रिपोर्ट दी कि उस बच्ची को 8-9 दिन तक मंदिर के तहखाने में बन्द रखा गया जबकि उस मंदिर में कोई तहखाना हैं ही नहीं। 
17. पुजारी ने अपने बेटे से भी बलात्कार करवाया और अपने भतीजे को 400 किलोमीटर से उस बच्ची का रेप करने बुलाया, ये डॉक्यूमेंट्री सिद्ध हो गया हैं कि बताए गए दिन वो लड़का घटनास्थल से 400 किमी. दूर अपने शहर में एक परीक्षा दे रहा था। 

18. बकरवाल मुस्लिम भारतीय सेना के प्रमुख सहयोगी हैं जो सेना के लिए दुर्गम स्थानों पर खच्चर पर लाद कर रसद पहुंचाने का काम करते हैं। कारगिल युद्ध में भी उनकी सेवा विशेष उल्लेखनीय है। अब उनमें भारतीय सेना और भारत के खिलाफ आक्रोश भड़काया जा रहा है।
19. पूर्व में लगभग 2003 में शोपियां में 22 वर्षीय नीलोफर जान और उसकी 17 वर्षीय ननद अपने सेव के बगीचे से गायब हो गयीं थी और उनके शव समीप के नाले में मिले थे।
20. स्थानीय पुलिस ने जांच में पाया कि अचानक बादल फटने और बाढ़ आने से दोनों युवतियां बहकर मारी गयीं।
21. अलगाववादियों ने कहा कि भारतीय सेना ने उनका बलात्कार कर हत्या की है।
22. उमर अब्दुल्ला ने स्थानीय पुलिस की जांच को नकारते हुए 17 अधिकारियो को सस्पेंड कर जेल भेजा और जांच के लिए न्यायिक कमेटी का गठन किया।
23. न्यायिक कमेटी ने बताया कि दोनों युवतियों के साथ बलात्कार कर हत्या की गयी।
24. सेना की ओर से दबाव बढ़ने पर सीबीआई जांच करवाई गयी, फोरेंसिक नमूने तीन भिन्न देशों में भेजे गए। किसी भी रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई।
25. सभी 17 निलंबित अधिकारीयों को दोषमुक्त पाया गया।
26. किन्तु इस घटना से कश्मीर में व्यापक हिंसा, प्रदर्शन और असंतोष के चलते 47 दिनों तक कफ्र्य लागू रहा।
काशी से प्रारम्भ होकर कठुवा तक यही सिद्ध करने की कोशिश की गई कि इन मंदिरों के पुजारी चरित्रहीन और भ्रष्ट थे, उन्हीं तर्कों को पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर बैठ कर भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार को हटाने के लिए सहयोग मांगने वाले नेताओं के साथ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की प्रोपेगैंडा शाखा (आईएसपीआर) ने दिल्ली में बैठे ऐसे राष्ट्रद्रोही पत्रकार जिन्हें विभिन्न एजेंसियों के द्वारा धन मुहैय्या कराया जाता है, के साथ मिलकर आंशिक रूप से अपने षड्यंत्रों में सफल रहे और जम्मू कश्मीर के अंदर मुसलमानों की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, यह बात अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कहने में सफलता पाई।’ कठुआ बालिका हत्या के विषय में फॉरेंसिक रिपोर्ट आ चुकी है, उस परिस्थिति में जिनलोगों ने हिन्दुस्तान के संस्कृति के आधार स्तंभ मंदिर, पुजारी, चरित्र, सबको दांव पर लगाकर देशद्रोह का काम किया, क्या ऐसे लोगों को कानून के घेरे में लेने का वक्त नहीं आ गया है? 
लेखक -  स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती, राष्ट्रीय महामंत्री अखिल भारतीय संत समिति
acharya_jeetendra@Yahoo.com

सोमवार, 26 दिसंबर 2016

चीन से इटली तक भारत की रेंज में, शक्तिशाली एटमी मिसाइल अग्नि 5 का कामयाब परीक्षण

Pic Courtesy : DPR 
नई दिल्ली: लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल अग्नि-5 का ओडिशा के अब्दुल कलाम आइलैंड में सोमवार को किए चौथे सफल परीक्षण के बाद परमाणु युक्त अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) बनाने वाला भारत पांचवां देश बन गया है। इससे पहले रूस, अमेरिका, फ्रांस और चीन इस तरह की मिसाइल विकसित कर चुके हैं। मिसाइल की पूरी मारक क्षमता के साथ किये गये परीक्षण में सभी राडार और ट्रैकिंग सिस्टम ने मिसाइल के प्रदर्शन से जुड़े अलग-अलग मापदंडों की निगरानी की गई और पाया गया कि इसने अपने सभी लक्ष्य कामयाबी से पूरे किए हैं। इस सफल परीक्षण से देश में स्वदेशी मिसाइल निर्माण की क्षमता में इजाफा हुआ है। सेना में शामिल होने से पहले इसके और दो तीन टेस्ट किए जाएंगे फिर इसका उत्पादन होगा। खास बात ये है कि जरूरत पड़ने पर इसकी रेंज 5000 से अधिक भी बढ़ाई जा सकती है।
क्यों खास है अग्नि 5-
पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान और इटली समेत करीब आधा यूरोप इसकी जद में
चीन, रूस, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस तक निशाना लगाने की क्षमता
भारत की सबसे मारक मिसाइल का सफल परीक्षण, चीन-पाकिस्तान तक मारक क्षमता
5000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम
1000 किलो तक वारहेड ले जाने में सक्षम
85 फीसदी स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल
20 मिनट में लक्ष्य पर हिट कर सकती है
अग्नि सीरीज की सबसे आधुनिक मिसाइल
तीन चरणों और सतह से सतह तक मार करने में सक्षम
नेवीगेशन, गाइडेंस, वारहेड और इंजन से जुड़ी नई तकनीकें शामिल
मिसाइल को आसानी से डिटेक्ट करना मुश्किल
मिसाइल में रिंग लेजर गायरो बेस्ड इनरशियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और माइक्रो नेविगेशन      सिस्टम (MINS) टेक्नीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे सटीक निशाना लगाने में माहिर।
मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) टेक्नीक के इस्तेमाल से एकसाथ कई टारगेट       पर वार कर सकेगी।
कई परमाणु वारहेड एक साथ छोड़े जा सकते हैं। एक बार छोड़ने के बाद रुकना नामुमकिन
17 मीटर लंबी अग्नि-5 का वजन 50 टन है। लॉन्चिंग सिस्टम में कैनस्टर टेक्नीक का इस्तेमाल किया     गया है। इसकी वजह से मिसाइल को आसानी से कहीं भी ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
अग्नि में 85% स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
मिसाइल की तीन स्टेज हैं। ये सॉलिड फ्यूल से चलती है। कई न्यूक्लियर वॉरहेड एक साथ छोड़े जा सकेंगे।   एक बार छोड़ने पर इसे रोका नहीं जा सकेगा।

मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध ‘नर्तकी’ है मां पार्वती, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का दावा

Pic Courtesy : harappa.com
इतिहासकार का दावा है कि नर्तकी मां पार्वती है क्योंकि जहां शिव हैं, वहां शक्ति होनी ही चाहिए।

नई दिल्ली:  सिंधु घाटी सभ्यता के निवासी भगवान शिव के उपासक थे, इस तथ्य के पक्ष में और अधिक प्रमाण देते हुए भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के हिन्दी जर्नल इतिहास में छपी एक नई शोध पत्र में दावा किया गया है कि मोहनजोदड़ो से उत्खनन में मिली प्रसिद्ध नर्तकी मां पार्वती हैं।
राजधानी दिल्ली से प्रकाशित एक अंग्रेजी दैनिक में छपी खबर के मुताबिक सिंधु घाटी सभ्यता का संबंध वैदिक सभ्यता से जोड़ते हुए बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर ठाकुर प्रसाद वर्मा ने अपने इस शोध पत्र ‘वैदिक सभ्यता का पुरातत्व’ में दक्षिणपंथी इतिहासकारों के उस दावे को दोहराया है जिसमें ये कहा जाता रहा है कि सिंधु घाटी सभ्यता के निवासी भगवान शिव के उपासक थे। ये पहली बार है कि उत्खनन में मिली 2500 ई.पू की कांस्य नर्तकी की हिंदू देवी के रूप में व्याख्या की गई हो।
शोध पत्र आगे लिखता है कि मोहनजोदड़ो से खुदाई में प्राप्त कई कलाकृतियां उस काल में भगवान शिव की पूजा परंपरा के प्रचलन के साक्ष्य हैं। श्री वर्मा के मुताबिक, चारों ओर से जानवरों से घिरे योगमुद्रा में बैठे सिंगधारी योगी की तस्वीर वाली प्रसिद्ध मुहर भगवान शिव की पूजा के प्रचलन का ठोस साक्ष्य है। हालांकि मुहर में अंकित छवि की पहचान पर इतिहासकारों में अब तक मतैक्य नहीं रहा है। पुरातत्ववेत्ता जॉन मार्शल ने 1931 में योगी की इस मुद्रा की व्याख्या ‘आदि शिव’ के रूप में की थी। हालांकि बाद में कई इतिहासकार इस व्याख्या से सहमत नहीं हुए और कई इतिहासकारों ने तो इसे महिला की छवि बताया।
Pic Courtesy : wikiwand.com
सिंधु घाटी सभ्यता में भगवान शिव की पूजा के समर्थन में वर्मा और भी तर्क देते हैं। इसी क्रम में वर्मा मोहनजोदड़ों से उत्खनन में प्राप्त एक अन्य ‘पूरोहित’ की मूर्ति के शॉल पर तिपतिया पैटर्न का जिक्र करके उन्हें हिन्दू देवता का उपासक बताते हैं। वर्मा तिपतिया पैटर्न का संबंध हिन्दू धार्मिक पद्धति में विल्ब (बेलपत्र) पत्रों से जोड़कर बताते हैं कि विल्ब पत्रों का उपयोग भगवान शिव की उपासना के लिए आज भी किया जाता है।

हालांकि अन्य इतिहासकार श्री वर्मा की इस संकल्पना से सहमति नहीं जताते हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और इतिहासकार सुप्रिया वर्मा कहती हैं कि ये पहली बार है कि किसी ने कहा है कि नर्तकी देवी पार्वती हो सकती हैं। आज तक किसी भी पुरातत्वविद् ने नर्तकी की व्याख्या देवी पार्वती या किसी अन्य देवी के रूप में नहीं की है। इस कलाकृति को एक युवती के रूप में ही अब तक देखा गया है। इससे ज्यादा इस पर कुछ कहना मुश्किल है। टेराकोटा कलाकृति की मार्शल ने मातृशक्ति के रूप में व्याख्या की थी हालांकि उन्होंने टेराकोटा की अन्य महिला कृतियों को खिलौना या जादू टोने से संबंद्ध बताया था।

इतिहास का ये ताजा अंक पिछले महीने प्रकाशित किया गया है। वाई एस राव के भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ये इतिहास पत्रिका का पहला प्रकाशन है। इतिहासकार सच्चिदानंद सहाय जर्नल के संपादक हैं।

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

बड़े पैमाने पर लगातार धरे जा रहे नकदी के पीछे आखिर कौन सा ‘जिन्न’ कर रहा है काम

Pic Courtesy : NDTV
नई दिल्ली:  शुक्रवार को राजस्व विभाग ने बताया कि नोटबंदी के बाद से अब तक तीन सौ करोड़ रुपये की नकदी देश भर में जब्त की गई है। जिस तरह टैक्स अधिकारियों के छापे में धड़ाधड़ धरे जा रहे हैं नए नोटों के बंडल, उससे आम भारतीयों के मन में ये सवाल तो जरूर आ रहे हैं कि आखिर टैक्स अधिकारियों को मिल रही इस सफलता का राज क्या है?  इस सफलता के लिए नए नोट के सामने आने के बाद से कई तरह की थ्योरी सामने आई। किसी ने कहा कि नोटबंदी के बाद जारी किए गए नए नोट में चिप्स लगे हैं जिससे उसकी स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। किसी ने बताया कि नए नोट में रेडियोएक्टिव इंक है जिससे उनकी लोकेशन स्पष्ट हो जाती है।
दरअसल इस रहस्य के पीछे है बैंकिग सॉफ्टवेयर। आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से आठ नवंबर को नोटबंदी के एलान के बहुत पहले ही बैंकों के कम्युटर सॉफ्टवेयर में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए थे। इस बदलाव के बाद अपग्रेड किए गए इन सॉफ्टवेयर में नए सीरिज के नोट के छपने और बाद में उसके वितरण के डाटा संग्रहित हैं।
देश के अंदर विभिन्न इलाकों के लिए अलग अलग सिरीज की नकदी छापी गईं। इसलिए जब देश के एक राज्य का नोट किसी दूसरे राज्य में स्थित बैंक के पास पहुंचता है तो बैंक इस सूचना के जरिए आयकर विभाग और वित्त विभाग की खुफिया शाखा को सतर्क करती है। सॉफ्टवेयर की मदद से इस बात का पता बड़ी आसानी से लग जाता है कि किस खाताधारक को ये नोट जारी किए गए थे जिसके बाद छापे की कार्रवाई शुरू की जाती है और किसी भी तरह का संदेह होने पर वो धर लिए जाते हैं। इसलिए नोटबंदी के बाद धड़ाधड़ धरे जा रहे नए नोटों के पीछे हमारी वित्तीय इंटेलिजेंस, पुलिस और प्रौद्योगिकी के बीच समन्वय के जरिए इस सफलता की गाथा लिखी जा रही है।
दवाइयों के बोतल या टेब्लेट के पत्तों पर एक बैच नंबर लिखा होता है जिससे उसके थोक विक्रेता और खुदरा विक्रेताओं की पहचान थोड़ी सी ही मशक्कत के बाद साफ की जा सकती है। नए सिरीज के इन नकदी के साथ भी बिल्कुल इसी तरह की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है। इससे ये पता बड़ी आसानी से लग जाता है कि किस राज्य के कौन से जिले की किस बैंक की कौन सी शाखा से ये नोट निकाले गए हैं। अगर किसी बैंक की शाखा से बड़ी संख्या में नोटों के बंडल जारी किए जाते हैं तो उपर बैठे इंटेलिजेंस के लोगों के पास खतरे की घंटी टन टना जाती है।
आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर वित्तीय मामलों का खुफिया सेल बैंक की संदिग्ध शाखाओं और खाताधारकों पर कड़ी नजर बनाए हुए है। जैसे ही संदिग्ध ट्रांजेक्सन का अंदेशा होता है आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय राजस्व विभाग, खुफिया विभाग और पुलिस हरकत में आ जाती है।
देश भर में फैले पुलिस के गुप्तचरों के जाल का भी नोटबंदी के बाद बड़े पैमाने पर पकड़े जा रहे नकदी के पीछे बड़ा हाथ बताया जा रहा है। कई मामलों में समाज में अमीरों और गरीबों की बीच की बड़ रही खाई से उपजे असंतोष ने भी बड़े पैमाने पर पकड़ी जा रही नकदी के पीछे अपनी भूमिका निभाई है। मसलन अवैध तरीकों से कमाए धन से नवधनाढ्य बने लोगों को ड्राइवरों या नौकरों का असंतोष भी खुफिया अधिकारियों या पुलिस के लिए बड़े पैमाने पर सूचना जुटाने के लिए उपयोगी साबित हुआ है।

रविवार, 11 दिसंबर 2016

नकदी का हिसाब किताब छोड़िए मालिक ! करोड़पति होना है तो ई-पेमेंट कीजिए !

Pic Courtesy: The Economic Times
नकदी का हिसाब किताब छोड़िए मालिक ! करोड़पति होना है तो ई-पेमेंट कीजिए। जी हां, आप सही पढ़ रहे हैं। डिजिटल पेमेंट कीजिए और करोड़पति हो जाइए। क्या कहा, ऐसे कैसे मिल जाएगा करोड़ रुपये?  अरे साहब, नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार का सारा जोर अब नकद लेन देन की आदत पर लगाम लगाने की है और वो डिजीटल बटुए को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ रही है।
ऐसे में नीति आयोग ने एक योजना बनाई है जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के मकसद से आयोग एक करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पुरस्कार देगी। ये पुरस्कार उनको दिया जाएगा जो डिजिटल पेमेंट करते हैं।
आयोग ने इसके लिए नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) योजना की रुपरेखा बनाने और उसको जल्द लांच करने को कहा है। सूत्रों की माने तो इसके लिए एनपीसीआई फंड से 125 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने की सारी तैयारी भी पूरी कर ली गई है। एनपीसीआई यानि नेशनल फाइनेंशियल इन्क्लुशन फंड रिटेल पेमेंट सिस्टम को चलाने वाला वो संगठन है जिसकी छतरी के तले एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ोदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आई सी आई सी आई, एचडएफसी बैंक, सिटी और एचएसबीसी बैंक अपनी पेमेंट प्रणाली चलाती हैं।
इस प्रोत्साहन पुरस्कार योजना का मकसद गांवों और छोटे शहरों में डिजिटल बटुए को लोकप्रिय बनाना है। सूत्र बता रहे हैं कि एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि के लिए प्रत्येक पंद्रह दिनों में डिजिटल ट्रांजेक्शन आईडी के ड्रॉ निकाले जाएंगें। इस योजना में फोकस देश के गरीब, निम्न मध्य वर्ग और छोटे व्यापारियों को रखा जाएगा। यही नहीं एक करोड़ रुपये के इस पुरस्कार के लिए अलावा दस ग्राहको औऱ दस व्यापारियों को प्रति सप्ताह दस दस लाख रुपये के भी पुरस्कार दिए जाएंगे।
नीति आयोग का मानना है कि नोटबंदी के एलान के बाद से डिजिटल ट्रांजेक्शन में अच्छी खासी बढोत्तरी हुई है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के एलान के बाद डिजिटल पेमेंट में तीन सौ फीसदी की बढोत्तरी हुई है।
इस योजना के तहत सभी ग्राहक और व्यापारी जो USSD, UPI  और RuPay कार्ड आदि तरीकों से पेमेंट कर रहे हैं वो इस पुरस्कार राशि पाने की पात्रता रखते हैं। जानकारी के मुताबिक आयोग इस महीने के अंत तक इस योजना को लांच करेगा औऱ जिन्होंने भी नोटबंदी के एलान के बाद इस डिजिटल बटुए का इस्तेमाल किया हो वो करोड़पति होने के इस कार्यक्रम में भाग ले सकते हैं।
तो चलिए क्या पता अगली लॉटरी आप ही की निकल जाए ! हम भी दिल थाम कर इंतजार करते हैं कि आखिर कौन बनेगा पहला करोड़पति?

मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

कन्याकुमारी के तट पर सियासी शून्यता

Pic Courtesy: Twitter Account of PM Narendra Modi
फाइटर जयललिता नहीं रहीं। एमजीआर की समाधी के बगल में ही पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार आज किया गया। अपनी बीमारी से लड़ती जयललिता जीवन और मौत के संघर्ष की आखिरी और संभवत पहली लड़ाई हार गईं और इसी के साथ संभवत तमिलनाडू के एक और सियासी युग का पटाक्षेप हो गया।
93 वर्षीय द्रमुक प्रमुख करूणानिधि अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। ज़ाहिर है करूणानिधी भी अब बहुत सक्रिय नहीं रह पाएंगे। ऐसे में तमिलनाडु के दूसरे प्रमुख राजनीतिक दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम के लिए भी उत्तर करूणानिधी युग किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
अपनी बीमारी से लड़ती जयललिता के इस पूरे दौर में जिस तरह उनकी पुरानी सहयोगी और मित्र शशिकला एक बार फिर सक्रिय हुईं वो सक्रियता परदे पर पहली बार जयललिता की मौत के बाद दुनिया के सामने तब आया जब जयललिता के मृत शरीर के साथ उनके आवास पर शशिकला को पुरे समय तक लोगों ने खड़े देखा। अंतिम यात्रा में ट्रक पर शशिकला साथ थीं और मुख्यमंत्री जयललिता का अंतिम संस्कार की रस्मों को भी उनकी सखी रहीं शशिकला ने ही पूरा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जयललिता को श्रद्धांजली देने पहुंचे। जिस तरह से जयललिता के शव के पास खड़ी और सिसक रही शशिकला के सिर पर हाथ फेरकर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें सांत्वना दिया वो तस्वीर पुरे देश ने देखा। जयललिता को श्रद्धांजली देने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी को देखकर आधी रात को मुख्यमंत्री बने ओ पनीरसेल्वम जिस तरह सिसक पड़े औऱ प्रधानमंत्री ने उन्हें सांत्वना दिया वो वाकया भी टेलीविजन न्यूज चैनलों के लगातार प्रसारण के जरिए पूरे देश ने देखा।
पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री पनीर सेल्वम और जयललिता की सबसे करीबी रही शशिकला को सांत्वना देने के साथ जयललिता के सम्मान में कुछ ऐसे फैसले किये जो अभूतपूर्व हैं। जयललिता के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय शोक का एलान किया है जो आमतौर पर किसी मुख्यमंत्री के निधन पर नहीं किया जाता है। इसके अलावा आज संसद के दोनों सदनों को स्थगित करके सरकार ने जयललिता के प्रति अपना सम्मान जाहिर किया। जब जयललिता अस्पताल में भर्ती थीं, तब भी बीजेपी के तमाम बड़े नेता उनका हालचाल जानने के लिए चेन्नई जाते थे।
जयललिता के साथ बीजेपी के रिश्ते उतार चढ़ाव भरे रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते शुरू से अच्छे रहे हैं। बीजेपी के लिए अच्छी बात ये है कि जयललिता की पार्टी के साथ उसका रिश्ता काफी अच्छा रहा है।
यूपीए सरकार के दिनों में आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद जगन मोहन रेड्डी के साथ तत्कालीन केंद्र सरकार का व्यवहार देखकर और उसके बाद आंध्र प्रदेश में हुई पार्टी की दुर्गति से वर्तमान केद्र सरकार के इस सावधान रवैये को आसानी से समझा जा सकता है।
जयललिता की मौत के एक घंटे के भीतर मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के साथ 30 से अधिक मंत्रियों ने शपथ ग्रहण कर सरकार के स्तर पर उपजी शून्यता को तत्काल भर दिया। अब सवाल पार्टी के महासचिव पद के लिए जयललिता के उत्तराधिकारी चुने जाने का है। समर्थकों के बीच चिनम्मा के नाम से मशहूर शशिकला क्या इस जिम्मेदारी को संभालेंगी?  क्या अम्मा की जगह चिनम्मा होंगी? जाहिर है इस पूरे दौर में जो संकेत उभरे हैं उससे तो ऐसा ही लगता है। हालांकि अगर ऐसा होता भी है तो शशिकला के लिए आगे की राह आसान है ऐसा भी नहीं।
यहीं से शायद केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए तमिलनाडु में सियासी संभावनाओं के द्वार खुले सके। यही वजह है कि जयललिता की बीमारी के इस पुरे दौर में केंद्र सरकार ने भी बड़ी ही फूंक फूंक कर सावधानी से कदम उठाए। जयललिता के जाने से कमजोर पड़ी अन्नाद्रमुक के लिए ये बेहतर विकल्प होगा कि पार्टी केंद्र सरकार और भाजपा के साथ अच्छे संबंध रख कर पार्टी के समक्ष आई इस बड़ी चुनौती से पार पाए।
कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक से हार्दिक संबंध रखने वाले इस देश के दक्षिणपंथ को भी संभवत कन्याकुमारी के तट तक अपने पांव पसारने के लिए यही मुफीद मौका दिख रहा है। तमिलनाडु के आने वाले भविष्य की राजनीति बहुत कुछ इन्हीं दांव पेंचों के जरिए तय होगी क्योंकि वहां पिछले चार पांच दशकों की ‘कल्ट’ सियासत दम तोड़ती नजर आ रही है और राज्य के नए सियासी योद्धा अब तक खुद को कल्ट में तब्दील नहीं कर पाए हैं। 

रविवार, 4 दिसंबर 2016

एक परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की आय सार्वजनिक कर आईटी डिपार्टमेंट को चौंकाया, सरकार ने बिठाई जांच

Pic Courtesy: IT Dept. 
मुंबई: अहमदाबाद के व्यापारी महेश कुमार चंपकलाल शाह के 13,860 करोड़ रुपये की आय को सार्वजनिक किए जाने के बाद अब मुंबई के चार सदस्‍यीय परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की आय की घोषणा कर सरकार को भी चौंका दिया है। दरअसल ये दोनों घोषणाएं केंद्र सरकार द्वारा इस साल बजट में लाई गई इन्कम टैक्स डिक्लरेयशन स्कीम 2016 के तहत की गई हैं जिसकी मियाद 30 सितंबर, 2016 को खत्म हुई है।
मुंबई स्थित बांद्रा के चार सदस्यों वाले परिवार मोहम्मद सैयद, मोहम्मद आरिफ अब्दुल रज्जाक सैयद, रूखसाना अब्दुल रज्जाक सैयद और नुरजहां मोहम्मद सैयद ने आईडीएस2016 स्कीम के तहत अपनी चार सदस्यों के परिवार की आय दो लाख करोड़ रुपये दिखाई जिसके बाद आयकर अधिकारियों ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच शुरू कर दी। वित्‍त मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले की पूरी जांच होगी। वित्‍त मंत्रालय का कहना है कि इस परिवार की घोषणाएं ''संदिग्‍ध चरित्र की लगती हैं क्‍योंकि इस परिवार के आय के संसाधन सीमित हैं''।
सरकार ने इस योजना के तहत दोनों ही घोषणाओं को खारिज करते हुए दोनों ही मामलों में जांच बिठा दी है। इस परिवार में अब्‍दुल रज्‍जाक मोहम्‍मद  सैयद, पुत्र मोहम्‍मद आरिफ अब्‍दुल रज्‍जाक सईद, पत्‍नी रुखसाना अब्‍दुल रज्‍जाक सैयद और बेटी नूरजहां मोहम्‍मद सईद हैं और ये परिवार मुंबई के ब्रांदा इलाके में रहता है। इस परिवार के तीन सदस्‍यों के पैन कार्ड अजमेर के पते पर बने थे और इसी सितंबर में ये लोग मुंबई आएं जहां ये वित्‍त घोषणाएं की।
ये घोषणाएं इस साल बजट में घोषित की गई स्‍कीम के तहत की गई थीं। इस स्‍कीम के तहत यदि कोई अघोषित आय को जाहिर करता है तो उसको घोषित आय का 45 प्रतिशत टैक्‍स, सरचार्ज और पेनल्‍टी के रूप में देना होगा। इस स्‍कीम की अंतिम तारीख 30 सितंबर थी और इसके तहत तकरीबन 71 हजार लोगों ने कुल 67,382 करोड़ रुपये की घोषणा की। सईद परिवार ने जो घोषणा की है, वह इस घोषित राशि से तिगुनी है।
इस संदर्भ में वित्‍त मंत्रालय ने अहमदाबाद के बिजनेसमैन महेश शाह केस का हवाला दिया। शाह ने 13 हजार करोड़ रुपये के काले धन की घोषणा के बाद से पिछले महीने से लापता था। सरकार ने उसकी भी घोषणाओं को खारिज कर दिया। बाद में जब शाह प्रकट हुआ तो इसने बताया कि ये पैसा उसका नहीं है बल्कि राजनेताओं, नौकरशाहों और बिल्‍डरों का है।
शाह से रविवार को भी सात घंटे तक पूछताछ की गई और स्‍वास्‍थ्‍य कारणों से उसको घर जाने की अनुमति दी गई। अब उससे सोमवार को पूछताछ होगी।

डिजीटल इंडिया के सपने देख रहे देश को जावेद ने दिखाई हकीकत, पीएम नमो एप हैक

नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन और डिजीटल इंडिया की उड़ान पकड़ती मुहिम को मुंबई के एक 22 साल के युवा ने आईना दिखाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के फैसले पर पुरा देश तमाम कठिनाइयों के बाद जहां पीएम के फैसले को सिर्फ इस उम्मीद से स्वीकार करता दिख रहा है कि शायाद इससे कालेधन के प्रवाह को रोका जा सके। फैसले के क्रियान्वयन और वैकल्पिक व्यवस्था के लिए समुचित तैयारी का अभाव लोगों के लिए बेहद कठिनाइयों की वजह भी बना है।
ऐसे में बार बार लगातार केंद्र सरकार की और दिए जा रहे गो डिजीटल का  नारे की वास्तविकता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ये सवाल है कि इस रास्ते पर आगे तो बढ़ा जा सकता है लेकिन क्या ये रास्ता सुरक्षित है। और अगर सुरक्षित है तो क्या सरकारी महकमें की ओर से वाकई इसे सुरक्षित बनाए रखने के प्रबंध किए गए हैं। इसके जवाब में सरकारी दावा जो कुछ भी हो लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर दिख रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आईफ़ोन, एंड्रॉयड और विंडोज फोन के लिए काफी धूमधाम के साथ लांच किए गए आधिकारिक नमो ऐप लांच को मुंबई के एक 22 वर्षीय डेवलपर ने हैक कर इस ऐप की कई सुरक्षा खामियों को उजागर कर दिया है।
युवक जावेद का कहना है कि मैने पीएम मोदी के नमो ऐप को हैक किया है , लेकिन उसका इरादा हानि पहुंचाना नहीं बल्कि सुरक्षा खामियों को उजागर करना था। जावेद के अनुसार ऐप में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने की वजह से सत्तर लाख यूजर्स की जानकारी सार्वजनिक हो सकती थी।
जावेद के इस दावे को बीजेपी ने खारिज किया है। हालांकि इस काम के लिए बीजेपी ने जावेद को थैंक्स कहा है। भाजपा के सूचना एवं तकनीकी के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने बताया कि इस ऐप में कोई निजी या संवेदनशील डेटा नहीं है। मालवीय ने कहा कि हम जावेद खत्री को धन्यवाद देना चाहते हैं कि डेवलपर ने ऐप की सुरक्षा पर बहुत ध्यान दिया है।
बता दें कि गुरुवार की देर रात पेशे से मोबाइल ऐप डेवलपर जावेद खत्री ने दावा किया कि उसने पीएम मोदी के ऐप को हैक किया है और वह यूजर्स के निजी डेटा तक पहुंच बना सकता है। निजी डेटा में ईमेल आईडी और यहां तक कि केंद्रीय मंत्रियों के मोबाइल नंबर भी शामिल हैं। युवा हैकर ने बताया यह सिर्फ इस सुरक्षा बचाव को दिखाने का रास्ता है जो मैं दिखाना चाहता है। सात लाख से अधिक यूजर की गोपनीयता दांव पर है अगर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है तो।
मुंबई के घाटकोपर में रहने वाले पेशे से मोबाइल ऐप डवलपर जावेद ने गुरुवार (एक दिसंबर) की रात को एक वेबसाइट को बताया कि उसने प्रधानमंत्री की ऐप को हैक कर लिया है। इसके जरिए यूजर्स के प्राइवेट डाटा जैसे मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी को एक्‍सेस किया जा सकता है। यहां तक कि केंद्रीय मंत्रियों के मोबाइल नंबर भी लिए जा सकते हैं। जावेद के अनुसार उसने 70 लाख यूजर्स के डाटा की सिक्‍योरिटी में खामी को सामने लाने के लिए ऐसा किया।
हालांकि भाजपा की आईटी सेल की ओर से कहा गया कि ऐप में कोई निजी या संवेदनशील डेटा नहीं है। ऐप यूजर की जानकारी ऐनक्रिप्‍टेड मोड में होती है। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी का टि्वटर अकाउंट हैक हो गया था। हैकर ने उनके अकाउंट से गालियां ट्वीट कर दी थी। इसके बाद कांग्रेस का आधिकारिक अकाउंट भी हैक कर लिया गया था।
ऐसे में ये सवाल एक आदमी के मन में जरूर उठ रहा है कि जब इतने हाई प्रोफाइल लोगों के अकाउंट भी अगर सुरक्षित नहीं तो क्या सिर्फ इस तरह की तैयारयों के दम पर अपनी गाढ़ी कमाई को उस रास्ते पर लाया जाए जिसकी सुरक्षा को लेकर सत्ता प्रतिष्ठान के पास न तो कोई ठास दावे हैं और न हीं भविष्य का कोई रोड मैप?

गुरुवार, 1 दिसंबर 2016

राहुल गांधी का ट्वीटर अकाउंट हैक, कांग्रेस ने डिजीटल सुरक्षा पर उठाए सवाल

Pic Courtesy: @officeOfRG
नई दिल्ली: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट को बुधवार की रात हैक कर लिया गया जिसे बाद में रिस्टोर कर लिया गया है। राहुल गांधी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट @OfficeOfRG को हैक कर हैकर ने अपशब्द ट्वीट किया। हैकिंग के बाद कांग्रेस ने देश की डिजिटल सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
राहुल का अकाउंट बुधवार रात करीब 8 बजकर 40 मिनट पर हैक हुआ और जिसकी जानकारी सोशल मीडिया टीम को 15 मिनट बाद ही हो गई। उस पर अपशब्दों से भरे कुछ मैसेज डाल दिये गये जिसे तुरंत ही डिलीट कर दिया गया। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्विटर अकाउंट हैकिंग की निंदा करते हुए इसे गिरी हुई हरकत बताया। सत्यापित ट्विटर हैंडल का नाम ऐट द रेट ऑफ आफिसऑफआरजी को भी बदल दिया गया। देर रात अकाउंट रीस्टोर कर दिया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने राहुल गांधी के ट्वीटर अकाउंट के हैक होने के बाद केंद्र सरकार की डिजीटल इंडिया के नारों पर सवाल खड़े किए और नोटबंदी के बाद देश को कैशलेश इकॉनमी की ओर ले जा रहे केंद्र सरकार के प्रयासों पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए। अहमद पटेल ने ट्वीट कर लिखा, ‘जिस तरह से राहुल गांधी का ट्वीटर अकाउंट हैक हुआ और साइबर क्राइम सेल और ट्वीटर असहाय बना रहा उससे देश के डिजिटल इंडिया और डिजिटल सुरक्षा के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जो लोग देश को नोटबंदी के जरिए ऑनलाइन पेमेंट प्रणाली की ओर जबरदस्ती धकेल रहे हैं क्या उन्होंने देश के आम लोगों के अकाउंट को हैकिंक से बचाने के लिए कोई ठोस कदम की अभी तक व्यवस्था की है?’
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘इस तरह की घटिया चालों से तर्कपूर्ण बातें खत्म नहीं होगी ना ही आम आदमी के मुद्दे उठाने से राहुल गांधी पीछे हटेंगे’। सुरजेवाला ने कहा, ‘राहुल गांधी के ट्विटर हैंडल को हैक करने में बिकाउ ट्रोलों का इस तरह अशोभनीय, अनैतिक और शातिर आचरण विद्यमान फासीवादी संस्कृति की असुरक्षा को दिखाता है’। सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘ऐट द रेट ऑफ ऑफिसऑफआरजी की हैकिंग हम सब के इर्द गिर्द डिजिटल सुरक्षा की कमी को साबित करता है। हरेक डिजिटल सूचना तक पहुंचा जा सकता है, तोड़ा मरोड़ा जा सकता है’।
हैकर ने ट्वीट में अपशब्द कहे और गांधी परिवार के भीतर भ्रष्टाचार की बातें कह और कई भद्दी टिप्पणियां लिखीं। रणदीप सुरजेवाला ने इसे नीच हरकत बताया है।
नोटबंदी के फैसले का विरोध कर रही कांग्रेस ने राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट के हैक होने के मामले को लेकर डिजिटल सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बता रही है कि डिजिटल सुरक्षा कितनी बड़ी चुनौती है. गौरतलब है कि मोदी सरकार ने नोटबंदी के फैसले के पीछे काले धन का खात्मा और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना मुख्य लक्ष्य बताया था।
कांग्रेस की ओर से इस मामले को साइबर सेल में भी दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। कांग्रेस ने कहा है कि वह मामला संसद में शून्यकाल में उठाएगी।

शनिवार, 26 नवंबर 2016

नोटबंदी : चीनी मीडिया ने मोदी के कदम को ‘साहसिक जुआ’ बताया, कहा चीन भी लेगा सबक

बीजिंग : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले को बहुत साहसिक कदम बताते हुए चीन की सरकारी मीडिया ने लिखा है कि भले ही ये कदम सफल हो या असफल पर भ्रष्टाचार पर इसके असर से चीन सबक लेगा। चीन की सरकारी मीडिया के मुताबिक पीएम मोदी के नोटबंदी का ये पहल चाहे सफल हो या असफल लेकिन इससे एक उदाहरण पेश किया गया है और चीन भ्रष्टाचार पर इसके प्रभावों से जरूर सबक लेगा।
सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स में  ‘मोदी टेक्स ए गैम्बल विथ मनी रिफॉर्म’ शीर्षक से छपे संपादकीय में लिखा गया है, ‘नोटबंदी का मोदी का कदम बहुत ही साहसिक है। अगर चीन में 50 या 100 युआन के नोट बंद कर दिए जाएं तो, चीन में क्या होगा हम इसके बारे में अभी कल्पना नहीं कर सकते हैं। मोदी ने करंसी रिफार्म पर फैसला लेकर एक जुआ खेला है’। ज्ञात हो कि 100 युआन चीन की सबसे बड़ी मुद्रा है।

पत्र आगे लिखता है, ‘नोटबंदी की खबर को इसके क्रियान्वयन में आनी वाली चुनौतियों के बावजुद पुरी तरह गुप्त रखा गया था ताकि इस फैसले के इसके मकसद को पूरी तरह से हासिल किया जा सके। नोटबंदी का यह फैसला ब्लैकमनी के खिलाफ है। हालांकि मोदी इसे लागू करने से पहले दुविधा में थे’। अखबार फैसले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के मन में दुविधा की स्थिति का भी जिक्र करता है। अखबार लिखता है कि मोदी इस समय दुविधा की स्थिति में हैं क्योंकि इस सुधार का मकसद कालेधन को बेकार करना है लेकिन यह प्रक्रिया कोई नई नीति की शुरूआत से पहले जन समर्थन हासिल करने के प्रशासन के सिद्धांत के विपरीत है।

संपादकीय में लिखा गया है, ‘भारत में लगभग नब्बे फीसदी लेन-देन कैश में होता है। देश में कुल कैश का 85 प्रतिशत नोट पांच सौ और हजार रुपये के रुप में थे। सरकार के इस फैसले से आम जनता को रोजाना जिंदगी में काफी दिक्कतें भी हुई हैं। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे संगठित लूट तक करार दे दिया’। अखबर लिखता है, ‘नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है। लेकिन इसको बढावा देने वाले सामाजिक और राजनीतिक मसले का समाधान मुश्किल है जो इसको बढ़ावा देने में मददगार रहे हैं’।

संपादकीय के अनुसार, ‘मोदी का नोटबंदी का फैसला एक जुआ है। इसे लागू करने से लेकर आम जनता की बर्दाश्त करने की क्षमता की परख होनी है। उम्मीद है कि इसके फायदे अन्य दूसरी चीजों के असर को कम करने में सफल होगी’।  इसमें कहा गया है कि भारत की ‘पश्चिमी शैली’ की लोकतांत्रिक प्रणाली में इस प्रकार के साहसिक कदमों के लिए कम ही स्थान है। संपादकीय में कहा गया है कि वह इसे अंजाम दे रहे हैं और यह कदम भले ही सफल रहे या असफल हो, यह एक मिसाल पेश करेगा। इसमें कहा गया है कि सुधार करना हमेशा मुश्किल होता है और इसके लिए साहस के अलावा भी कई चीजों की आवश्यकता होती है। मोदी ने नेक इरादे से नोटबंदी की है, लेकिन यह सफल होगा या नहीं, यह बात प्रणाली की दक्षता और पूरे समाज के सहयोग पर निर्भर करती है। अखबार के मुताबिक लोकतंत्र में इस तरह के साहसिक कदम की जगह बहुत कम होती है। नोटबंदी चाहे सफल हो या असफल लेकिन यह एक उदाहरण जरूर पेश करेगा।

अखबार लिखता है, ‘सुधार हमेशा से मुश्किल रहा है। मोदी का नोटबंदी का फैसला सही सोच के साथ आया है। लेकिन, इसकी सफलता व्यवस्था और समाज के सहयोग पर निर्भर करती है’। अखबार लिखता है कि चीन में भी पिछले चालीस सालों से सुधार का क्रम जारी है। इसमें कई उतार चढ़ाव देखने को मिले हैं। अखबार के मुताबिक इसकी सफलता आम जनता के व्यापक समर्थन से ही संभव होती है। इसमें कहा गया है कि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की मजबूत क्रियान्वयन क्षमताएं पूरे देश की आम सहमति पर आधारित हैं। भारत के सुधारों से सीख मिलेगी जो हमें हमारे सुधार को समझने में मदद करेगी।

बुधवार, 23 नवंबर 2016

नोटबंदी - संसद से सड़क तक विपक्ष के हंगामे से बेअसर प्रधानमंत्री ने सीधे जनता से मांगी राय

नई दिल्ली:  संसद के शीतकालीन सत्र में नोटबंदी के मुद्दे पर विपक्ष पिछले कई दिनों से सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश के तहत कार्यवाही में व्यवधान पैदा कर रहा है। अपने प्रतिरोध को और तेज करते हुए आज विपक्षी दलों के तकरीबन 200 सांसद संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। कई विपक्षी दल जंतर मंतर पर भी धरने पर बैठेंगे। उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन विरोध प्रदर्शनों और संसद में विपक्ष के नारेबाजी से बेअसर नोटबंदी पर सीधे आमजनता से राय मांगी है।
इसके लिए प्रधानमंत्री ने नमो एप के जरिए लोगों से नोटबंदी से जुड़े दस सवाल पूछे हैं और उनपर अपनी राय शेयर करने की अपील की है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 रूपये के नोट के सम्बन्ध में लिए फैसले पर लोगों से विचार आमंत्रित किये हैं|
नरेन्द्र मोदी ऐप पर उपलब्ध 10 सवालों वाले एक सर्वेक्षण के माध्यम से लोग अपने विचार पहुंचा सकते हैं| ट्विटर के माध्यम से सर्वेक्षण का लिंक साझा करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि वह इस फैसले पर लोगों से पहली प्रतिक्रिया चाहते हैं।
सर्वेक्षण के 10 प्रश्न निम्नलिखित हैं : 

1. क्या आपको लगता है कि भारत में काला धन है? a) हाँ b) नहीं
2. क्या आपको लगता है कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ़ लड़ाई लड़ने और इस समस्या को दूर करने की ज़रूरत है? a) हाँ b) नहीं

3. आप काले धन की समस्या से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाये गए कदमों के बारे में क्या सोचते हैं?

4. आप भ्रष्टाचार के खिलाफ़ मोदी सरकार द्वारा अब तक किये गए प्रयासों के बारे में क्या सोचते हैं? 1 से 5 के स्केल पर – बेहतरीन, बहुत अच्छा, अच्छा, ठीक, बेकार

5. आप 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने के मोदी सरकार के निर्णय के बारे में क्या सोचते हैं? a) सही दिशा में उठाया गया बहुत अच्छा कदम है b) अच्छा कदम है c) कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा

6. क्या आपको लगता है कि डिमोनेटाईजेशन से काला धन, भ्रष्टाचार और आतंकवाद को रोकने में मदद मिलेगी? a) इसका तुरंत प्रभाव पड़ेगा b) इसका प्रभाव पड़ने में समय लगेगा c) कम प्रभाव पड़ेगा d) पता नहीं, कह नहीं सकते

7. डिमोनेटाईजेशन से रियल स्टेट, उच्च शिक्षा, हेल्थकेयर तक आम आदमी की पहुँच बनेगी? a) पूर्ण रूप से सहमत हैं b) थोड़ा सहमत हैं c) कह नहीं सकते

8. भ्रष्टाचार, काला धन, आतंकवाद और नकली नोटों पर अंकुश लगाने की लड़ाई में हुई असुविधा को आपने कितना महसूस किया? a) बिल्कुल महसूस नहीं किया b) थोड़ा बहुत किया लेकिन यह जरुरी था c) हाँ महसूस किया

9. क्या आप मानते हैं कि भ्रष्ट्राचार का विरोध करते रहे कई आंदोलनकारी और नेता अब वास्तव में काले धन , भ्रष्टाचार और आतंकवाद के समर्थन में लड़ रहे है ? a) हाँ b) नहीं

10. क्या आपके पास कोई सुझाव या विचार है जो आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शेयर करना चाहते हैं?

अपने विचार शेयर करने के लिए धन्यवाद। अब अपने परिवार एवं दोस्तों को भी अपने विचार शेयर करने के लिए प्रोत्साहित करें।

जाहिर है यह सर्वेक्षण प्रधानमंत्री के सहभागी शासन और प्रमुख नीतियों और मुद्दों पर देश की जनता से राय लेने की परिकल्पना को साकार करता है।

500 और 1000 रूपये के नोट के लीगल टेंडर पर प्रतिबन्ध के मामले पर प्रधानमंत्री ने लोगों से राय माँगी है और कई पहलुओं पर विचार आमंत्रित किये हैं। उन्होंने लोगों से इस विषय पर भी फीडबैक माँगा है कि कैसे इस फैसले को लागू किये जाने की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाए।
ज़ाहिर है जनता के प्रतिनिधियों से संवाद करने की बजाए प्रधानमंत्री जनता से सीधे संवाद के सिद्धांत पर उतर आए हैं। सरकार ने नोटबंदी के फैसले पर कदम पीछे हटाने की संभावना को पूरी तरह से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि कालेधन के मुद्दे पर उठाए जाने वाले कदमों में नोटबंदी सिर्फ पहला कदम है। आने वाले समय में कुछ और कदम उठाए जा सकते हैं।

रविवार, 20 नवंबर 2016

पीवी सिंधु ने जीता चाइना ओपन, PM मोदी ने दी बधाई

फुझाउ: ओलंपिक सिल्वर मेडल जीतने वाली पीवी सिंधु ने 700000 डॉलर इनामी चायना ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में चीन की सुन यू को हराकर अपना पहला सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब जीता।
अगस्त में रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी सिंधुने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सुन यू को एक घंटे और नौ मिनट में 21-11 17-21 21-11 से हराकर यह प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किया। दुनिया की 11वें नंबर की खिलाड़ी सिंधु की सुन यू के खिलाफ छह मैचों में यह तीसरी जीत है।
पीवी सिंधु और सुन यू के बीच जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। पीवी सिंधु ने पहला गेम 21-11 से जीता, तो दूसरे गेम में चीनी खिलाड़ी ने शानदार खेल दिखाया और 21-17 से दूसरे गेम अपने नाम किया। दोनों के बीच आखिरी गेम में जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। सिंधु ने दबाव में बेहद शानदार खेल दिखाया और निर्णायक गेम 21-11 से जीतकर खिताब पर कब्जा जमा लिया। यह लगातार तीसरा साल है जब इस टूर्नामेंट के फाइनल में कोई भारतीय महिला खिलाड़ी पहुंची हैं। साल 2014 में साइना नेहवाल ने यहां खिताब जीता था लेकिन 2015 में उन्‍हें ली जुरुक्‍सई के हाथों हार झेलनी पड़ी थी।
सिंधु ने मुकाबले की शानदार शुरूआत करते हुए पहले गेम में 11-5 की बढ़त बनाई। भारतीय खिलाड़ी ने अपनी तेजी की बदौलत इस बढ़त को 20-8 तक पहुंचाकर 12 गेम प्वाइंट हासिल किए। सुन यू ने तीन गेम प्वाइंट बचाए लेकिन सिंधु को पहला गेम जीतने से नहीं रोक सकी।
दूसरे गेम में भी सिंधुने 6-3 की बढ़त बनाई जिसे उन्होंने 11-7 और फिर 14-10 तक पहुंचाया। सुन यू ने हालांकि इसके बाद जोरदार वापसी की और कुछ दमदार स्मैश की बदौलत 14-14 से स्कोर बराबर कर दिया।
चीन की खिलाड़ी ने तेज स्मैश और फिर शानदार र्टिन की बदौलत 18-16 की बढ़त बनाई। सिंधु ने इसके बाद वीडियो रैफरल गंवाया जिससे सुन यू 19-16 से आगे हो गई। सुन ने 20-16 के स्कोर पर नेट पर शाट खेला लेकिन सिंधु के नेट पर शाट मारने पर दूसरा गेम जीतकर स्कोर 1-1 कर दिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सुपर सीरिज टाइटल जीतने पर सिंधु को बधाई दी है।

शनिवार, 19 नवंबर 2016

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव:रायबरेली अमेठी से बाहर निकल पहली बार राज्य भर में घुमेंगी प्रियंका

Photo Courtesy : Hindustan Times
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरने के लिए कांग्रेस ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। लंबे समय से प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार करने को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं। कभी खबरें आती है कि वह पूरे उत्तर प्रदेश में चुनाव कैंपेन करेंगी, कभी यह कहां जाता रहा है कि वह सिर्फ रायबरेली-अमेठी में ही प्रचार करेंगी। इन तमाम अटकलों के बीच शुक्रवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने साफ कर दिया की प्रियंका गांधी से उत्तर प्रदेश के चुनावों में ज्यादा से ज्यादा समय देने की गुजारिश की गई थी और वह इसको लेकर बहुत सकारात्मक भी हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वह रायबरेली-अमेठी से बाहर निकल कर चुनाव प्रचार करेंगी।
उत्तरप्रदेश कांग्रेस प्रचार कमेटी के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा, "वह (प्रियंका) अहम भूमिका निभाने जा रही हैं। पहले हर चीज पर फैसला हो जाने दीजिए"। उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख राजबब्बर ने कहा, "यह तय किया गया है कि वह राज्य चुनावों में पार्टी के लिए प्रचार करेंगी।
उन्होंने प्रचार के लिए हमारा आग्रह स्वीकार लिया है. जब हमें उनका कार्यक्रम मिल जाएगा हम उस हिसाब से काम करेंगे"। उन्होंने कहा कि चुनावी कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद राज्य में प्रचार के लिए उनकी योजना को लेकर और पता चलेगा।
प्रियंका गांधी के राज्य भर में चुनाव प्रचार की रजामंदी मिल जाने की खबरों के बीच कांग्रेस के लिए एक और परेशानी सामने आ सकती है। दरअसल प्रियंका गांधी भी अगर चुनाव प्रचार में राज्य भर में सक्रिय होती हैं तो पार्टी को व्यवस्था इस तरह से संभालनी होगी कि उनके भाई राहुल गांधी की छवि भी बरकरार रह सके। कहीं से भी प्रियंका गांधी का कद पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के सियासी कद से बड़ा न दिख जाए इसकी व्यवस्था भी पार्टी को खास तौर पर देखनी होगी। लिहाज़ा राज्य भर में चुनाव प्रचार के लिए प्रियंका गांधी की अनिवार्यता और प्रियंका की तुलना में राहुल गांधी का सियासी कद बनाए रखना पार्टी के लिए दोहरी चुनौती होगी। देखना होगा इसको लेकर पार्टी की आगामी योजनाएं किस रूप में सामने आती हैं।
जब राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश में यात्राएं थी उस वक्त भी प्रियंका गांधी के पोस्टर लगाए गए थे। उससे पहले यह तय किया गया था कि प्रियंका गांधी का कोई भी पोस्टर अकेले नहीं लगाया जाएगा और दूसरा उनकी फोटो राहुल गांधी के फोटो से छोटी लगेगी ताकि राहुल के कद को कहीं छोटा करके ना देखा जाए।
राज बब्बर का कहना है कि प्रियंका गांधी के आने से काफी फायदा होगा। उन्होंने साफ किया कि अभी चुनाव को लेकर रणनीति बन रही है। समय और रणनीति के साथ कांग्रेस के चुनाव प्रचार की योजना बनाई जाएगी।
उत्तर प्रदेश चुनाव की रणनीति को लेकर शुक्रवार सुबह राहुल गांधी के घर पर उत्तर प्रदेश से जुड़े तमाम बड़े नेताओं की बैठक हुई। बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, गुलाम नबी आजाद, राजबब्बर, शीला दीक्षित और संजय सिंह शामिल हुए। इस बैठक में एक बार फिर ये प्रस्ताव आया कि प्रियंका गांधी को रायबरेली-अमेठी से बाहर निकल कर कैंपेन करना चाहिए। बताया जा रहा है कि इस बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी इस बात को लेकर सहमत हो गए कि वह उत्तर प्रदेश में और ज्यादा समय दे सकती हैं और रायबरेली और अमेठी से बाहर निकल कर चुनाव प्रचार कर सकती हैं।
अब तक लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव प्रियंका गांधी ने खुद को रायबरेली-अमेठी तक ही खुद को सीमित रखा रहा है। इन दोनों संसदीय क्षेत्र से बाहर उन्होंने कभी चुनाव प्रचार नहीं किया। हालांकि कांग्रेस नेता अक्सर मांग करते रहे हैं कि उनको प्रदेश भर में चुनाव प्रचार करना चाहिए। इसकी वजह साफ रही है कि कांग्रेसी प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि को देखते रहे हैं। उनका मानना है कि प्रियंका गांधी, इंदिरा गांधी की तरह दिखती हैं। उन्हीं की तरह बोलती हैं। जिसका फायदा पार्टी को मिल सकता है। हर बार के चुनाव में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा प्रियंका गांधी की उठती मांग को देखते हुए इस बार गांधी परिवार में कहीं ना कहीं एक सहमति बनती दिख रही है की प्रियंका गांधी को भी अब चुनाव में बड़ी भूमिका में दिखना चाहिए। यही वजह रही कि राहुल गांधी के घर हुई मीटिंग में तमाम नेताओं की मांग पर राहुल और प्रियंका पॉजिटिव दिखाई दिए।
इससे पहले राजबब्बर ने कहा था कि प्रियंका की मौजूदगी से पार्टी के लोगों के साथ ही राज्य के लोगों के बीच विश्वास बढ़ेगा और उन्हें नई उर्जा मिलेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अगर वह पर्याप्त समय देती हैं तो प्रियंका उत्तरप्रदेश में सभी 403 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार कर सकेंगी।

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

देश में बने सबसे बड़े ड्रोन 'रुस्‍तम-2' ने पहली उड़ान भरी

चित्रदुर्ग: देश में बने सबसे बड़े मानव रहित विमान ड्रोन तापस 201 (रूस्तम-2) ने बुधवार को पहली बार सफलतापूर्वक उड़ान भरी। डीआरडीओ के बनाए गए इस ड्रोन का परीक्षण कर्नाटक के बंगलौर से 250 किलोमीटर दूर मानवरहित यानों और मानवविमानों के परीक्षण के लिए नवविकसित उड़ान परीक्षण स्थल चित्रदुर्ग में किया गया। इससे मानवरहित वायुयान के भारत के विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहन मिला है।

ये टोही व निगरानी क्षमता के साथ-साथ लक्ष्य पर सटीक मार करने में भी सक्षम है और इसकी रेंज करीब 250 किलोमीटर है। सिंथेटिक अपर्चर राडार होने के कारण ये बादलों के पार भी देख सकता है। इतना ही नहीं, 30 हजार फीट पर आसानी से ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है।
इसकी तुलना दुनिया के उन बेहतरीन ड्रोन से की जा सकती है जिनकी क्षमता बहुत अधिक है. जानकार बताते हैं कि इसे अमरीकी ड्रोन प्रिडेटर की तर्ज पर विकसित किया गया है। दो टन वजनी इस ड्रोन की कई खासियत हैं। इसके डैने लगभग 21 मीटर लंबे हैं। यह 24 घंटे उड़ान भरने में सक्षम है। 
Photo Courtesy: DRDO
रुस्तम-का डिजाइन और विकास डीआरडीओ की बेंगलुरु की प्रयोगशाला एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और एचएएल-बीईएल ने मिलकर किया है। सशस्त्र बलों के पायलटों के सहयोग से डीआरडीओ के युवा वैज्ञानिकों की एक टीम ने इसका परीक्षण किया।
ये दुश्मनों के इलाके में घुसकर टोह लेने, निगरानी रखने और लक्ष्य की पहचान करने उस पर हमला करने में भी सक्षम है। ये 500 किलोमीटर घंटे प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान तो भरेगा ही, साथ ही दुश्मन की नजर से भी बचा रहेगा। वजह है इसमें ऐसे सिस्टम लगे है जो दुश्मन की पकड़ में नही आएंगे। ये दिन के साथ-साथ रात में अपना काम कर सकता है। इसमें करीब वे सारी खूबियां हैं जो एक छोटे टोही विमान में होती हैं।