बुधवार, 2 जनवरी 2008

(स) दमा .....




सोनिया जी बीमार हैं। दमे का दौरा पड़ा है। कुछ लोग कहते हैं साल भर कांग्रेस को मिली हार का सदमा है। इन पंक्तियों को आप विरोधियों की मसखरी भी कह सकते हैं और इस लिहाज से मुझे दक्षिणपंथी कहने के लिए स्वतंत्र हैं। बहरहाल हम बात कर रहे हैं सोनिया जी की बीमारी की। सोनिया जी बीमार क्या पड़ीं ऐसा लगा मानो राष्ट्रीय राजनीति और मीडिया को पाला मार गया। कांग्रेसी नेताओं और मीडियाकर्मियों ने सामने सामने तो सहानुभूति दिखाई लेकिन अंदर अंदर ही जमके गरियाया। साल के अंत में चढ़ी दारू की खुमारी अभी ठीक से चढ़ी भी नहीं थी कि कई लोगों के फोन घनघनाए। कथित बासेज ने आदेश दिया गंगाराम पहुंचो... मरता क्या न करता .... आदेश सर माथे पर। बासेज को गरियाते और बीमार को दुआओं की जगह बद्दु्आ देते चैनलों के जुझारू रिपोटर पहुंचते हैं सर गंगाराम अस्पताल। हालांकि कुछ खुश हैं चलो आज फिर आफिस जाकर सबके सामने बास की गाली खाने से तो बचाव हुआ। बहरहाल सुबह के धुंधलके के साफ होने से पहले सारे जुझारू रिपोटरों ने अपने अपने गन माइक संभाल लिए। सारा देश सोनियामय होने लगा। लगा सारा देश बीमार हो गया। अस्पताल पहुंचे लोगों को भी आकाशवाणी हुई कि अस्पताल में सोनिया जी भर्ती हैं। उन्हें इस बात पर गर्व हुआ कि चलो जिस अस्पताल में देश की सबसे शक्तिशाली महिला इलाज करा रही हैं उसी अस्पताल में उनके रिश्तेदारों का भी इलाज हो रहा है। गंगाराम सोनिया मय हो गया। सारा देश सोनियामय हो गया। कहीं से खबर आई कि सोनिया जी के इलाज के लिए अस्पताल प्रशासन ने तीसरे माले पर सभी बीस बाइस कमरे खाली करा दिए गए। क्यों न हो हाई प्रोफाइल मामला है। और जब मैडम आईं हैं इलाज कराने तो मैडम के सेवक भी आएंगें ही। लिहाज़ा कांग्रेस के बड़े नेताओं का आना शुरू हुआ। मैंडम की हालात का जायज़ा लेना था। आप तो बस चुप ही रहिए .... क्या कह रहे हैं दरबार में हाज़िरी लगाने आए हैं। आप तो बस यों ही काँग्रेस को चंपक पार्टी कहते हैं। पहले कमलनाथ के आने की खबर आई। फिर दिल्ली की सांसद कृष्णा तीरथ आईं। फिर मोहसिना किदवई आईं। अरे ये क्या मैडम ने किसी से भी मिलने से मना कर दिया है। वाह क्या सीन हैं ..... वीआईपी गाडियाँ आती हैं .... कांग्रेस के बड़े नेता उतरते हैं... अस्पताल परिसर में दाखिल होते हैं .... पर ये क्या एसपीजी उन्हें आगे जाने से रोक रही है। खिसियाए नेता वापस लौट जाते हैं। कुछ और साहसी हैं .... अब जब मैडम को देखने आए हैं तो उपस्थिति रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर करने भी तो ज़रूरी हैं। लिहाजा टहलते हुए पत्रकारों की तरफ आए हैं ... पत्रकार भी ठहरे घाघ .... कहाँ छोड़ने वाले थे। सांसद मैडम आईं .... बातचीत होने लगती है। नहीं मिल पाने का मलाल अब भी चेहरे पर सुबह की ओस की तरह ठहरा है। खिसियाहट चेहरे पे छुपाने की कोशिश होती है। गन माइक सामने। प्रवचन शुरू ...... मैडम ठीक हैं। उन्हें दमा का हल्का दौरा पड़ा है। अभी डाक्टरों की निगराणी में हैं। खतरे की कोई बात नहीं।..... तभी एक प्रश्न उनके जख्मों को और गहरा करता है। मैडम आपकी मुलाकात हुई सोनिया जी से , क्या कहा उन्होंने। खिसियाहट में फुसफुसाती हैं .... हमें मिलने ही नहीं दिया गया। गन माइक अपना काम करता है। साफ सुनाई देता है। मैसैज पहुंचता है बाँकि नेताओं के पास। अब आने वाले नेताओं की भीड़ नहीं है। मैसेज कन्वे हो चुका है। मैडम किसी से मिलना नहीं चाहती।इस बीच अब रिपोटर क्या करें। मैडम को तो महज दमे का हल्का दौरा पड़ा है। कोई खास खबर तो बननी नही। एक पट्टी चलनी चाहिए बस। लेकिन क्या करें एसाइन्मेंट से लगातार लाइव देने को कहा जा रहा है। सारे पोलिटिकल रिपोटर हैं। जो थोड़ी बहुत जानकारी आपस में बातचीत से मिल रही है उसी को पेले जा रहे हैं। किसी को कुछ नहीं पता। पेले जा रहे हैं .. तीन डाक्टरों की टीम हैं ... कोई डा कपूर, डा भटनागर और डा जैन की तीन डाक्टरों की टीम उनकी निगराणी कर रही है। शायद इस नाम के कोई डाक्टर गंगाराम में हैं ही नहीं। किसे फर्क पड़ता है। होंगे कोई डा बोस ... हम तो इन्हें ही जानते हैं। इनका ही नाम बोलेंगे। मायानगरी से लुटियंस पहुँची एक मोहिनी रिपोटर लगातार लाइव दे रही हैं। मर्द रिपोटर खुश हैं चलो कोई तो है जिसे देख कर दिन काटा जा सकता है। लिहाजा कुछ लोग उनको भी इंप्रैस करने की फिराक में हैं। मोहिनी को भी पता है। लिहाजा खुब भाव खा रही हैं। एक ग्यान पांडे कहते हैं गुजरात और हिमाचल का सदमा नहीं झेल पाईं सोनिया जी। मोहिनी ने कहा अरे हाँ एक एंगल ये भी हो सकता है। थोड़ी देर में किसी चैनल में पट्टी चला .... गुजरात और हिमाचल का सदमा। हे भगवान अब तो बीमार भी नहीं पड़ सकते।अरे इस भाई साहब को नहीं पता कि किसी से नहीं मिल रही हैं सोनिया जी। युवा कांग्रेस के हैं अभी आगे लंबा सफर तय करना है। चले आ रहे हैं दरबार में हाजिरी लगाने। भाई साहब के भी चंपू हैं ..... भाई साहब के अस्पताल परिसर में दाखिल होते हैं भाई साहब के चंपू चले आते हैं पत्रकारों के बीच। प्लेटफार्म बना रहे हैं कि भाई साहब के निकलने के बाद उनकी बाईट हो जाए। तभी एक खिसियाए पत्रकार ने उन्हें रपेट दिया। कौन हो तुम, क्या औकात है तु्म्हारे नेता की। चंपू साहब खिसियानी हँसी हँसते हैं। अरे नहीं....ऐसा नहीं भाई साहब चलिए चाय पीया जाए। तभी एक सरकारी पत्रकार उनके अहंकार को सहलाता है। अरे नही नेता जी को बुलाइए हम लेंगे बाइट। चंपू साहब खुश। चाय पिलाने ले जाते हैं। नेता जी का भी वही हाल हुआ जो सुबह से बाँकि नेताओं का हुआ था। चंपू ने खुशी खुशी अपने नेता को फोन पर जानकारी दी सरकारी पत्रकार आपकी बाइट चाहते हैं। खिसियाए नेता जी हुड़की देते हैं .... चुपचाप वापस लौटो। चंपू जी समझते हैं कुछ गड़बड़ हो गया है। चुपचाप टल लेते हैं। जय हो सोनिया जी। आपकी महिमा अपरंपार है।अरे ये क्या। अस्पताल परिसर के बाहर महामृत्युंजय यग्न होने लगा। चार लोग हवन जलाकर बैठ गए .... सोनिया जी जल्दी स्वस्थ्य हों। सारे रिपोटर दौड़े.... कैमरामैन उनसे आगे दौड़े। जल्दी लो जल्दी लो। कुछ उत्साही रिपोटरों ने अपने अपने एसाइन्मेंट को खबर दिया .... महामृत्युंजय .... अरे जल्दी भेजो। मोहिनी भी दौड़ीं.... शर्माते हुए टीकटैक किया। पेल दो पेल दो । सबमें होड़ लग गया। सपरिवार यग्न कर रहा व्यक्ति छा गया थोड़ी देर में। कुछ पत्रकार झुंझलाए .... क्या तमाशा है यार। सारे चूतियापा दिखा रहे हो। लेकिन बास का डर है इसलिए खुद भी चुतियापे को शूट कर रहे हैं। अब तक शाम हो चुकी है। अब घर जाने की चिंता है। सोनिया जी का जो होना है होता रहेगा। कुछ भी तो नहीं बचा। रिलिवर बुलाने की होड़ लग गई। चलो यार .... जाने से पहले चैनलों की संपादकीय नीति को गरियाते हैं। फिर धीरे धीरे गंगाराम खाली होने लगता है। घर पहुँच कर बीबी को कहते हैं ..... बहन .... क्या क्या चलाते हैं चैनल वाले।इतिष्री सोनिया जी जल्दी स्वस्थ हों ............ आपकी महिमा अपरंपार है।

6 टिप्‍पणियां:

अजय रोहिला ने कहा…

छा गये बंधु...मजा आ गया ....लगे रहो।

कुमार आलोक ने कहा…

अच्छी बात है , अब आप भी बडे पत्रकार में शुमार हो गये . आप तो बीजेपी बीट देखते है , आप के आलेख में आजकल की पत्रकारिता में छिछोरेपन के समावेश को बहुत बेह्तर तरीके से प्रदर्शित करने की कोशिश की गयी है .लेकिन आपने अपनी मनोदशा से बाहर आने की कोशिश नही की है. आप को सोनिया गांधी की चमचागीरी खलती है , लेकिन बाजपेयी जी के जन्म का सह्स्त्रचन्द्र दर्शन दिव्य और अलौकिक लगता है . लेकिन आप इमान्दार है कम से कम वैसे पत्रकारों मे शुमार नही है जो मौसम की तरह अपने इमान को भी बदल लेते है. धीरज धरिये केन्द्र में आपकी मन्शा के अनुरुप जल्द ही भगवा झन्डा लहराये ऐसी कामना हम आप्के के लिये जरूर करेंगे.
धन्यवाद

Anil Dubey ने कहा…

हा हा हा...छा गये गुरु. ऐसे ही पेलते रहो.

सुभाष मौर्य ने कहा…

बहुत अच्छे गुरू। लगे रहिये।

Unknown ने कहा…

देर से ही वक्त मिला क्या कहूं आज ही पढ़ा लेकिन कमाल का है...सोनिया गांधी की बीमारी और हम जैसे पत्रकारों की धमाचौकड़ी को कलम से सही उकेरा है आपने...इस पूरे आलेख में सबसे अच्छा मोहिनी रिपोर्टर का किरदार लगा...जिससे साफ है कि टेलिविजन की पत्रकारिता में बददिमाग लोगों की कमी नहीं है..मुझे खेद है कि आपके बार बार कहने के बावजूद मैनें कुछ लिखा तो नहीं लेकिन ये संदेश ज़रूर दे रहा हूं...बधाई हो
विकास चंद्र
लाइव इंडिया

Anjay ने कहा…

बहुत उम्दा। पत्रकारों की मजबूरी और मजदूरी का अच्छा उल्लेख है. सलाम है आपको। मोहिनी के मंगल कदमो से कम से कम पत्रकारों में उन्माद बना रहा. उस चैनल को बधाई देना न भूलें। :-)

वैसे कलम के धनी होने क साथ साथ आप सरस्वती पुत्र है. कैमरा जो नहीं देख पाता, आपको बखूबी नज़र आता है. सुपर लाइक्ड योर ब्लॉग :-)