बुधवार, 5 मार्च 2008

परदेसिया ........ दरद न बूझे कोय

बंबई या यों कहें कि महाराष्र्ट में पूरब के लोगों के साथ जो कुछ हुआ उसे न तो संवैधानिक स्तर पर और न ही नैतिकता के स्तर पर सही ठहराया जा सकता है। राज ठाकरे ने जम कर जहर उगला पूरबियों के खिलाफ। देर से ही सही पुलिस कार्रवायी हुई। बहरहाल दो एक दिन मीडिया में छायी सनसनी के बाद ऐसा लगने लगा था कि मामला धीरे धीरे शांत होने लगा है। पूरब के लोगों के साथ ही कइयों ने चैन की पूरी सांस ली भी नहीं थी कि बूढ़े ठाकरे गरज़ पडे ..... सारी शांति काफ़ुर हो गई। मुद्दा फिर गरमाया। बुधवार को सुबह सुबह चैनलों पर ठाकरे पुराण जम कर परोसा गया। दस बजते बजते ठाकरे पुराण पर पुरबियों की प्रतिक्रिया धकाधक गिरने लगी। चैनल वाले भी ज़ालिम समझदार हैं। सबको पता था संसद सत्र में है। पुराण पेला जा सकता है। गरमा गरम प्रतिक्रियाओं की कमी नहीं रहेगी। सारे नेता जम कर बोलेगें........ एक दूसरे को गरियाएंगें ... अपना एकाध घंटे तो क‍ट ही जाएगा। बहरहाल हुआ भी वही। ठाकरे पुराण शुरू हुआ ...... आधे पौने घंटे में बिहारी सांसदों ने मोर्चा संभाल लिया। क्या मज़ाल ठाकरे की .... उसकी ये औकात.... पगला गया है .... सठिया गया है। लालू अपने अंदाज़ में बोले पगला गया है...... प्रभूनाथ बोले ठाकरे को जेल में होना चाहिए..... मकोका लगाओ। जय हो ... लालू और प्रभूनाथ जी... आप ही तो बिहारी और पूरबिया अस्मिता और प्रतिष्ठा को बचा सकते हैं। ये तो रही संसद के बाहर की हलचल। अंदर लोकसभा में अध्यक्ष जी पधारे .... किरकिट टीम को बधाई देने के बाद प्रश्नकाल शुरू ही होता कि अंदर राजद के देवेंद्र यादव गरज़े.... अध्यक्ष जी सांसद सदस्यों के खिलाफ ऐसा अनरगल ..... बरदाश्त कैसे किया जा सकता है। विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। भाजपा के विजय मल्होत्रा भी कुछ बुदबुदाये .... विपक्ष धरम याद आ गया होगा। बहरहाल खँखार के नहीं बोले .... आखिर शिवसेना भी तो दोस्त ही हैं..... इसलिए कुछ सुनाई नहीं दिया। दो दिन से संसद कोमोवेश ठीक ठाक चल रहा था। अध्यक्ष जी भी खुश थे। लिहाजा मामले को जल्दी निपटाने के मूड में उन्होंने भी एक तरह से देवेंन्द्र बाबू की पीठ थपथपाते हुए प्रक्रियागत ढंग से मुद्दा उठाने का आग्रह किया। कहा ठीक है विशेषाधिकार हनन का नोटिस दीजिए .... हम कार्रवायी करेंगे। बहरहाल अंदर तो मामला शांत हुआ .... देवेंद्र बाबू बैठ गए।
लेकिन बाहर प्रभूनाथ जी चैनलों पर गरजे पड़े थे। फिर याद आया लोकसभा की कार्रवायी शुरू होने की ... भागे भागे अंदर पहुंचे। अंदर प्रश्नकाल शुरू हो चुका था .... अकबकाए घुसे और लगे खड़े होकर बोलने। आखिर अस्मिता और प्रतिष्ठा का प्रश्न था। उन्हें अंदाज नहीं था मामले का निपटारा हो चुका है। बहरहाल कुछ और बोल पाते ... सोमनाथ दा ने कहा .... हाँ हाँ हमने इसे गंभीरता से लिया है। आप विशेषाधिकार का नोटिस दीजिए। ..... प्रभुनाथ खिसिया के रह गए। चेहरे पर झेंप लिए घप्प से बैठ गए। लगा साला चैनलों के चक्कर में सदन में विरोधियों ने पहले ही मैदान मार लिया। बहरहाल सोमनाथ उनकी झेंप समझ रहे थे। चूटकी ली आपकी प्रतिष्ठा की हर हाल में हिफाजत होगी। क्या करते गर्दन हिलाकर चूप बैठ गए बिहारी अस्मिता के रक्षक प्रभूनाथ जी।
बहरहाल मामला यहीं खत्म नहीं होने वाला था। सबको पता था देशमुख साहब आने वाले हैं सोनिया जी के दरबार में हाज़िरी लगानी है। कुर्सी का एक टाँग बार बार टूट जाता है। लिहाजा संभालने के लिए बार बार सोनिया माता के दर्शन ज़रूरी होता है। बेटे की भी शादी हो ही चुकी है..... कहीं कोप ग्रस्त न हो जाएं। नारायण राणे आरी लिए बाँकी टाँगे काटने में लगे ही रहते हैं। दूर खड़े शिंदे साहब भी मुस्कुराते ही रहते हैं। लिहाजा योजना आयोग के बहाने मैडम का भी हाल चाल जानना जरूरी है। लिहाज़ा दरबार में पहुँचे ..... चैनलों पर पट्टी दौड़ी। नाराज सोनिया को मनाने विलासराव की दस जनपथ में पेशी। बिहारी मुद्दे पर सोनिया भी नाराज हैं। कभी कभी हमें तो पता नहीं लगता है कि मैडम कब नाराज हो जाती हैं। बाँकि मुद्दों पर तो कभी कभी रिपोटरों से बात करती हैं। इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी की बात कभी बताई नहीं मुझे। खैर जब लोग कह रहे थे तो नाराज होगीं मान कर चला जाए। अरे वाह वाह राज्यपाल महोदय भी पहुंचे हैं दिल्ली दरबार में । घर वापसी की तैयारी हो रही है .... क्या कहा अरे कर्नाटक में कांग्रेस को संजीवनी जो देनी है। लिहाजा महाराष्ट्र से घर वापसी के दौरान जाते जाते विलासराव को नसीहत देने में क्या जाता है। लगे हाथ उवाच गए एक राष्ट्र , एक झंडे की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है। अरे जनाब इससे पहले ये बात मुख्यमंत्री को याद दिला देते। खैर चलिए राज्यपाल पद की मज़बूरी तो सभी समझते हैं।
दूसरे रिपोटरों ने विलासराव को दरबार में घुसने से पहले ही घेरा। घबराए देशमुख मुँह पर अंगूली रखते अंदर दाखिल हुए। अरे महोदय आपकी चूप्पी वाले विजुवल भी बिकेगें ... आपको पता ही नहीं। बाहर निकले तो कोर्ट का बहाना बना कर सरक लिए। मराठी बिहारी के चक्कर में फँसे रिपोटर पूछना ही भूल गए ... देशमुख सरकार आपकी कूर्सी का क्या हुआ। खैर जिस दिन जो बिके वही परोसो। इस क्रम में किसी ने न ये सोचा कि आखिर ठाकरे जैसे लोग ऐसा बयान दे कर भी नेता कैसे..... एक प्रश्न और है जिसे आप नज़रअंदाज करेंगे तो पुरबियों को आगे भी ये भुगतना पड़ेगा। आखिर लालू , नीतिश, प्रभूनाथ जैसे लोगों से कोई ठाकरे के इस सवाल का जबाव पूछेगा .... कि बिहारियों के लिए बिहार में ही रोजगार होता तो क्या इतनी भारी संख्या में पलायन होता। क्यों अपना देस (( परदेसिया ??? )) छोड़कर कोई बाहर गाली खाकर भी ....... नरक जैसे जीवन जीते हुए भी रहने को मज़बूर है। लालू जी नीतिश जी प्रभूनाथ जी राजनीति हो जाए तो ज़रा इसका जबाव भी दीजिएगा। क्या पता ईश्वर के दरबार में सचमुच ही पाप और पूण्य का फैसला होता हो ...............................

2 टिप्‍पणियां:

दीपान्शु गोयल ने कहा…

bahaut achcha hai.sahi keha hai aapne. sanand main kya kya hota hai rajniti chamkane ke liye.

अजय रोहिला ने कहा…

sandip babu sifr yahi kathit rajneta jimmedar hai is gandgi ke liye. rajya ke vikas se jyada apna vikas karne tak hi simit rahe ye log. aam aadmi ko roji roti ke liye kya kya jhelna padta hai.....in becharo ko kya maaloom. lekin phir bhi vahi log jeetkar sansad me pahuch jaate hai. kyun????????