जी हाँ १४ मार्च न केवल सोनिया गाँधी की कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में दस साल पूरे होने को लेकर महत्वपूर्ण है बल्कि आज ही के दिन पिछले साल पश्चिम बंगाल की कथित गरीब गुरबों की वाम मोर्चे के लाल झंडे के नीचे नंदीग्राम में दर्जनों किसान मारे गए थे। साल भर से विभिन्न मीडिया चैनलों पर ये खबर छाई रही लेकिन आज बरसी के दिन दो एक चैनलों के अलावा किसी ने इस खबर को याद तक नहीं किया। वो भी दो एक चैनलों ने इसलिए खबर चलाई क्योंकि सुबह सुबह खबर आई कि अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा जारी किए गए रिपोर्ट में नंदीग्राम में मानवाधिकार के उल्लंघन को रोक पाने में राज्य सरकार की नाकामी पर प्रदेश की वाम मोर्चे की सरकार की आलोचना की गई है।दरअसल सुबह सुबह सारे चैनलों के बंधू सोनिया चालिसा खत्म कर २४ अकबर रोड से संसद पहुँचे ही थे कि टाइम्स नाऊ के वीनित और अनूप जी टकरा गए। बड़े हड़बड़ाए हुए से थे। मैंने भी पूछ लिया कि भैय्या बात क्या है आखिर ? बोले अरे अमेरिका ने वाम सरकार की आलोचना की है। बड़ी खबर है वामपंथियों को ढूंड़ रहे हैं। तभी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गुरूदास दासगुप्ता आते दिखाई दिए। चैनल वाले देखते ही लपके। मैं भी पीछे पीछे भागा। वैसे भी टीवी चैनल वालों को गुरूदास कुछ ज़्यादा ही रास आते हैं। बंगला मिश्रित अंग्रेजी में तीस सेंकेंड का परफेक्ट टीआरपी बाइट लेनी हो तो बस गुरूदास से अच्छा कोई नहीं।
बहरहाल लपक कर पकड़ा। सुबह सुबह चैनल वालों को पीछे भागता देख रूके ... मुस्कुराते हुए पूछा क्या हो गया ? रिपोटरों ने बताया दादा अमेरिकी रिपोर्ट में नंदीग्राम के मुद्दे पर वाम सरकार की आलोचना। चेहरे का रंग उड़ गया और फिर शायद गुस्से से लाल हो गया। गरज़े अमेरिका की ये मज़ाल । दुनिया का दारोगा बनने के चक्कर में हमें सिखाएगा। फिर याद कम्युनिज़्म बंगाल में ही है सिर्फ। लरज के बोले भारतीय लोकतंत्र के अंदरूनी मामलों में दखल देने वाला कौन होता है अमेरिका। हम उसकी रिपोर्ट को बंगाल की खाड़ी में फेंकते हैं। बहरहाल बोलने से पहले पूछ लिया खबर पक्की है तो। फिर लगे गरियाने। लेकिन इसी बीच एक काँटा फँस गया मेरे गले में। नंदीग्राम पर आलोचना अगर भारतीय लोकतंत्र के अंदरूनी मामलों में दखल है तो फिर गुजरात दंगों के मामलों में ये क्या है ? खैर मैंने कहा ज्यादा नहीं सोचना चाहिए ... बड़े लोग जो बोले वही सही
बहरहाल अब भाजपा की भी बाइट चाहिए थी। आहलुवालिया आए और अमेरिका की आलोचना की। अरे ई का इहो तो लेफ्टे जैसन बोला। का भैया आपको तो खुश होना चाहिए। कम से कम गुजरात के बाद अब अमेरिका नंदीग्राम की भी आलोचना कर रहा है। चलिए आप बुड़बक हैं तो हम क्या करें। देश की मर्यादा में मोदी की मर्यादा भूला गए। कोई बात नहीं। आप ठीक कहते हैं देश की इज्जत सबसे उपर। तभी तृणमूल के दिनेश त्रिवेदी आए। सबको याद दिलाया कि आज नंदीग्राम की बरसी है ... हमने राज्यसभा का वाकआउट किया है। एक फाँस और गड़ले रह गया कि आखिर देखते देखते साल भर बीत गया संसद में आखिरकर नंदीग्राम पर चर्चा नहीं ही हो पाई। फिर दीमाग गलत दिशा में सोचने लगा। हमने कहा भैया ठीक दिशा में सोचो। हमने कहा जय सोनिया गाँधी। हमने फिर कहा यूपीए के ललबबुआ की जय हो। फिर हम राष्ट्रीय हित में और कौनो काम करने लगे।
3 टिप्पणियां:
अमेरिकी चचा ने दुनिया भर में हर मुद्दे पर अपनी बात रखने का मन बना लिया है, वैसे ही जैसे मैं आजकल हर ब्लाग पर जाकर टिप्पणियां दे रहा हूं।
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