मंगलवार, 25 मार्च 2008

सत्ता का शार्टकट - भारत एक खोज

राहुल गाँधी इन दिनों भारत की खोज कर रहे हैं। ध्यान दीजिएगा ये वो खोज है जो इससे पहले उनके नाना पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कोई छह दशक पहले की थी। इसी भारत की खोज दक्षिण अफ्रिका से लौटकर सदी के महामानव महात्मा गाँधी ने की थी। नेहरू और गाँधी की खोज के पीछे की वास्तविकता भारत से जूड़कर आजादी के संघर्ष के लिए हिन्दुस्तानियों को एकजूट करना था। बहरहाल अब गाँधी उपनाम लिए राहुल गाँधी कोई तीन चार राज्यों की यात्रा कर भारत की खोज पूरी करना चाहते हैं।
जानकार बताते हैं कि राहुल की यात्रा का मकसद लोकसभा चुनाव के पूर्व देश भर में घुम घुम कर काँग्रेस के लिए माहौल पैदा करना है। बहरहाल अगर कोई इस मकसद से दौरे कर रहा है तो उसमें कुछ भी गलत नहीं। संसदीय लोकतंत्र में ऐसा करना कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है। हालांकि इस बात पर कई लोग सवाल उठा सकते हैं कि क्या वाकई राहुल ऐसा चाहते हैं या इसके ज़रिए सिर्फ अपनी राजनीतिक पहचान और ज़मीन तलाश करना उनका मकसद है। यकीनन जिन्होंने भी राहुल की इस योजना को अमली ज़ामा पहनाया होगा उसके नज़र में न तो नेहरू रहे होगें और न ही महात्मा। तीसरे दर्जे में बैठकर रेल की यात्रा के जरिए भारत की खोज करता महात्मा और हेलिकाप्टरों और वातानुकूलित यान में बैठकर एसपीजी से घीरे भारत की खोज। बड़ा सही काँट्रास्ट है।


बहरहाल राहुल अभी कांग्रेस के महासचिव बना दिये गए हैं और प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह की नज़र में वे देश का भविष्य भी हैं। यही वजह है कि अपने अभिनव दौरे से उत्साहित राहुल कई बार ऐसा कुछ बोल जाते हैं जो उनके गले की फाँस बन जाता है। हाल ही में उड़िसा दौरा कर रहे राहुल ने हाईकमान को ही लपेटे में ले लिया। कहा कि हाईकमान की परंपरा खत्म होनी चाहिए और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र लागू होना चाहिए। भई राहुल अगर ऐसा हो जाए तो आप महासचिव कैसे बन जाते। और हाईकमान का मतलब जानते समझते हैं कि नहीं आप ? कांग्रेस में इसका मतलब होता है आपका परिवार। श्रीमान इसका मतलब आप सोनिया गाँधी की तानाशाही ... अरे गलती हो गई... ठाकुरसुहाती खत्म करना चाहते हैं। आपकी माता जी के दस साल के अध्यक्ष कार्यकाल में ऐसा कभी भी नहीं लगा कि वो उन्हें नापसंद करती हैं। कभी ऐसा नहीं लगा कि राज्यों में मुख्यमंत्री का चयन विधायक की मर्जी से होता है। और इस परंपरा की शुरूआत किसी और ने नहीं बल्कि आपकी दादी जी ने ही किया। खैर ये सब तो आप क्या बदलेगें ....
कोशिश करके थोड़ा बहुत आप ही बदलिए। आपने अब तो कुछ भी नहीं किया है जिससे एक संसद के रूप में आपकी ही कोई पहचान बन पाए। महासचिव के रूप में आपकी उपलब्धता ही सवालों के घेरे में है। आपको अगर लगता है चुनाव के पूर्व गुजरात और कर्नाटक घुम लेने भर से भारत की खोज पूरी हो जाती है तो आप भी नारसिस्टक काम्पलेक्स से ग्रसित हैं। आपके इस खोज से साफ लगता है कि आप भारत की खोज नहीं सत्ता पाने का शार्टकर्ट खोजना चाहते हैं। लेकिन बदलते समय में भारत में अगर कुछ बदला है तो वो ये कि अब आम हिन्दुस्तानी वोटर इस शार्टकर्ट को बखुबी समझते हैं। राजीव दर्शन का क्या हाल हुआ आपको पता ही है। बहरहाल पार्टी आपकी बपौती ज़रूर है जम्हूरियत नहीं।

2 टिप्‍पणियां:

Arun Arora ने कहा…

काहे चिढ रहे है जी भारत/काग्रेस के राजकुमार से.
उनकी मर्जी चाहे जो खोजे,जब नाना ने खोजा और फ़िर उसकी ऐसी तैसी फ़ेरी तो अब नाती को भी करने दीजीये ना,वैसे आप हम चिंता के अलावा कर भी क्या सकते है जी..:)

अरविंद चतुर्वेदी ने कहा…

bilkul sahi hain aam jo sahi mein aam hokar rah gya hain...unki aankhe khulni shuru ho gai hain. Badlov to aayega lakin kab koi nahi janta....rahi baat rahul gandhi kee too ye to YUVRAAJ hain...Virast ko aage badhana hoga