शुक्रवार, 30 मई 2014

मोदी के महारथी - राजनाथ

कभी अटल बिहारी वाजपेयी की संसदीय सीट रही लखनऊ से जीत कर लोकसभा पहुंचे राजनाथ सिंह, भाजपा के पालिटीकल हैविवेट माने जाते हैं। महज़ तेरह साल की उम्र में ही राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़ कर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत कर दी थी। बाद में लेक्चरर रहने के दौरान भी ये संबंध लगातार बरकरार रहा। नरेंद्र मोदी को मिले अभूतपूर्व जनादेश और भाजपा की सत्ता में अपने बूते वापसी के सफर में निस्संदेह पार्टी अध्यक्ष के तौर पर राजनाथ सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है लिहाजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में उन्हें गृह मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील ओहदे की जिम्मेदारी मिली।  

बासठ वर्षीय श्री सिंह जिन्होंने वरिष्ठ नेताओं के विरोध के बाद भी पार्टी के अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, निस्संदेह अब प्रधानमंत्री के विश्वस्थ महारथियों में शामिल होंगे। यही वजह है कि आने वाले वक्त में सरकार के एजेंडे पर भी उनकी व्यक्तित्व की चमक साफ देखी जा सकेगी।

दो बार भाजपा के अध्यक्ष रहे राजनाथ सिंह गोरखपुर के एक स्थानीय कालेज में भौतिकी के शिक्षक हुआ करते थे। यहां से पार्टी के एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर पार्टी के सर्वोच्च पद तक पहुँचने में कामयाब रहा। अपने राजनीतिक सफर में राजनाथ सिंह पहले राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में बनी एनडीए सरकार में परिवहन और कृषि मंत्री के रूप में देश की सेवा की। राजनीति में राजनाथ सिंह का सफर निचले पायदान से शुरू होकर एक मुकाम तक पहुँचा है। हालांकि उनका राजनीतिक सफर कई उतार चढ़ाव का भी गवाह रहा। दिसंबर 2005 में लालकृष्ण आडवाणी के बाद  राजनाथ सिंह ने पार्टी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला। हालांकि 2009 के लोकसभा चुनावों में भाजपा केंद्र में सत्ता में पहुंच पाने में न केवल असफल रही बल्कि 2004 लोकसभा चुनावों की तुलना में पार्टी को तकरीबन 22 सीटों को नुकसान भी झेलना पड़ा। 
दस जुलाई 1951 में उत्तर प्रदेश के चंदौली ज़िले के भभौरा गांव में जन्में राजनाथ सिंह ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी तक की पढ़ाई करने के बाद 1971 में मिर्ज़ापुर के के बी पोस्ट डिग्री कालेज में लेक्चरर के रूप में नियुक्ति पाई थी। राजनाथ सिंह भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों में कई पदों पर रहे हैं। इसकी शुरूआत तब हुई जब 1969 में गोरखपुर में भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विधार्थी संगठन के संगठन मंत्री बनाए गए और 1974 में मिर्जापुर में भारतीय जनसंघ की जिला इकाई के सचिव बनाए गए। उसी दौर में राजनाथ सिंह ने  तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तानाशाही नीतियों के विरोध में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरू किये गए संपूर्ण क्रांति आंदोलन में खुद को झोंक दिया जिसकी वजह से इन्हें दो साल जेल में बिताने पड़े। अब तक राजनाथ सिंह की छवि एक ठोस और कर्मठ प्रशासक की रही है।

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