शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

क्या हुआ सर्जिकल स्ट्राइक में : इनसाइड स्टोरी

Photo Courtesy : ADG PI
नई दिल्ली : सूत्रों के अनुसार इस स्ट्राइक को 200 से 500 मीटर के दायरे में 7 अलग-अलग जगहों पर अंजाम दिया गया। 

सेना के जवान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के 2 किलोमीटर अंदर तक पहाड़ियों, जंगलो को पार करते हुए पहुंचे थे।
सर्जिकल स्ट्राइक करने से पहले उड़ी में जहां सेना के 18 जवान शहीद हुए थे, वहां पर सैनिकों ने भारी फायरिंग कर पाकिस्तान का ध्यान बटाया गया ताकि सैनिक पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में प्रवेश कर सकें।

रात के साढ़े बारह बजे का वक्त था। पुंछ से एएलएच ध्रुव पर 4 और 9 पैरा के 25 कमांडो सवार होकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में दाखिल हुए। नियंत्रण रेखा पार कराके हेलिकॉप्टर ने इन कमांडोज़ को जंगल में उतार दिया। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की आशंका के बीच इन कमांडोज़ ने तक़रीबन तीन किलोमीटर का फासला रेंग कर तय किया। देश में तबाही मचाने के लिये यहां आतंकियों के लॉन्‍च पैड्स भिम्बर, केल, तत्तापानी और लीपा इलाकों में स्थित थे।

इन कमांडोज़ को कवर देने के लिए भारतीय वायुसेना के विमान पूरी तरह तैयार थे।

सर्जिकल स्ट्राइक में गए जवानों को साफ निर्देश था की किसी भी सैनिक या दुर्घटना होने पर किसी की बॉडी वहां छोड़ के नहीं आना है।

इस ऑपरेशन को देर रात 12.30 बजे शुरू किया गया और सुबह 4.30 बजे इसे समाप्त किया गया।
पाकिस्तानी सेना को भारत के इस कदम की भनक तक नहीं लगी। हमले से पहले आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स पर खुफिया एजेंसियां एक हफ्ते से नज़र रखे हुए थीं। रॉ और एमआई पूरी मुस्तैदी से आतंकवादियों की एक-एक हरकत पर नज़र रखे हुए थी। सेना ने हमला करने के लिये कुल छह लॉन्चिंग पैड का लक्ष्य रखा था, हमले के दौरान इनमें से सात लॉन्चिंग पैड को पूरी तरह तबाह कर दिया।

कमांडोज़ तवोर और एम-4 जैसी राइफलों, ग्रेनेड्स और स्मोक ग्रेनेड्स से लैस थे। उनके पास अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चिंग, नाइट विज़न डिवाइसेज़ और हेलमेट माउण्टेड कैमरे भी थे।

पलक झपकते ही कमांडोज़ ने आतंकियों पर ग्रेनेड से हमला किया। अफरा तफरी मचते ही स्मोक ग्रेनेड के साथ ताबड़तोड़ फायरिंग की। देखते ही देखते 38 आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। हमले में पाकिस्तानी सेना के दो जवान भी मारे गए। भारतीय सेना के दो पैरा कमांडोज़ भी लैंड माइंस की चपेट में आने के कारण घायल हुए हैं।

सुबह 4.30 बजे भारतीय कंमाडो सात आतंकी लॉन्च पैड को नष्ट करके वापस लौट आए। हर लांच पैड पर 30 से 40 आतंकी ठहरे हुए थे और सेना ने पहले ही कहा है कि "बड़े पैमाने पर नुकसान" हुआ है।

रात साढ़े बारह बजे शुरू हुए इस ऑपरेशन को साढ़े चार बजे तक ख़त्म कर लिया गया। दिल्ली में इस ऑपरेशन की तैयारी सेना मुख्यालय में रात आठ बजे से ही हो गई थी।

राजधानी में बुधवार शाम कोस्टगार्ड कमांडर कॉफ्रेंस का डिनर रखा गया था। जिसमें रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, एनएसए अजीत डोभाल और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग को पहुंचना था। इस डिनर में जाने की बजाय यह तीनों रात आठ बजे सीधे सेना मुख्यालय में मौजूद वॉर रूम में पहुंचे।

पूरे ऑपरेशन के दौरान रात में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह  ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। इस दौरान ऑपरेशन की जानकारी लगातार प्रधानमंत्री मोदी को भी दी जा रही थी।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रात ही में अपनी अमेरिकी समकक्ष सूसैन राइस से फोन पर बातचीत भी की।

सूत्रों से पता चला है कि सेना प्रमुख दलबीर सुहाग ने कहा है कि सेना ने अपने कहे का पालन किया और चुनी हुई जगह और समय पर इसका जवाब दिया है। ऑपरेशन के बाद सुरक्षा हलकों में पाकिस्तान को उसी की भाषा में सबक सिखाने की जितनी ख़ुशी है उतनी ही सतर्कता भी है। और इसलिये तीनों सेनाएं और अर्द्धसैनिक बल अपने अधिकतम अलर्ट पर हैं।

सूत्रों के मुताबिक सेना और बीएसएफ की छुट्टियों पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। जम्मू और कश्मीर और पंजाब में सीमा से सटे इलाकों को एहतियातन ख़ाली कराया जा रहा है। बीएसएफ की भी अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। गुजरात से लेकर कश्मीर तक सीमा पर हाई अलर्ट लागू कर दिया है।

गुजरात की समुद्री सीमा पर कोस्टगार्ड भी सतर्क है। वायुसेना को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।


सेना के सूत्रों का कहना है कि सेना ने इस ऑपरेशन की वीडियोग्राफी भी की है जिसे आने वाले समय में रिलीज किया जाएगा।

क्या होती है सर्जिकल स्ट्राइक ?

Photo Courtesy : ADG PI
नई दिल्ली: भारत पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का लगभग तीन चार दशकों से शिकार हो रहा है। इन सालों में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के जरिए आतंकियों को भारत की सीमा में भेजना और फिर बड़े आतंकी घटना को अंजाम देना पाकिस्तान की नीति का हिस्सा बनता गया। पठानकोट, पुंछ और उरी में पाकिस्तान ने जब सब्र का बांध तोड़ दिया तो मजबूर होकर भारत को सर्जिकल स्ट्राइक का सहारा लेना पड़ा। भारतीय कमांडो ने पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में घुसकर आतंकियों को ढेर किया और उनके लान्च पैठ को नष्ट कर दिया। इस खतरनाक ऑपरेशन को अंजाम देकर हमारे जवान सुरक्षित अपनी सीमा में लौट भी आए। इस तरह के ऑपरेशन को आम तौर पर सर्जिकल स्ट्राइक की संज्ञा देते हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक होती क्या है। सर्जिकल स्ट्राइक यानी दुश्मन को उसी के घर में घुसकर मार गिराना। ऐसे हमले बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि सीमित दायरे में मौजूद दुश्मन को मार गिराने के लिए किए जाते हैं।
क्या होती है सर्जिकल स्ट्राइक?
-  हमले की जगह की पुरी जानकारी जुटाई जाती है।
- उसी के हिसाब से हमले की पूरी योजना बनाई जाती है।
- सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के लिए कमांडो दस्ता तैयार किया जाता है।
- बहुत ही गोपनीय तरीके से कमांडो दस्ते को टार्गेट तक पहुंचाया जाता है।
- फिर होता है दुश्मन पर चौतरफा हमला।
- दुश्मन को संभलने के मौका दिए बगैर उसे घेरकर वहीं तबाह कर दिया जाता है।
- हमले को अंजाम देने के बाद कमांडो जिस तेज़ी से गए थे उसी तेज़ी से वापस लौट आते हैं।
- सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान इस बात का ख़ास ख़्याल रखा जाता है कि आसपास रहने वाले लोगों, इमारतों और गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचे।
पहले कब हुआ सर्जिकल स्ट्राइक?
- NSCN के आतंकियों ने 4 जून 2015 को मणिपुर के चंदेल में फौज की टुकड़ी पर हमला किया था।
- इस आतंकी हमले में 18 जवान शहीद हुए थे।
- 10 जून 2015 को इस हमले का बदला लेने के लिए भारतीय जवानों ने म्यांमार की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था।
- तब फौज ने म्यांमार में दाखिल होकर आतंकी संगठन NSCN के टेरर कैंप को तबाह किया था।
जब भी सर्जिकल स्ट्राइक का नाम आएगा। अमेरिका के ओसामा बिन लादेन के खिलाफ की गई कार्रवाई को जरूर याद किया जाएगा। 11 सितंबर 2001 को लादेन के आतंकी संगठन अल क़ायदा के आतंकियों ने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दो इमारतों को अगवा किए गए विमान से उड़ा दिया। 15 साल पुरानी इन तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था। दुनिया के सबसे बर्बर आतंकी हमले में करीब 3 हजार लोग मारे गए थे... 9/11 हमले के बाद से अमेरिकी खुफिया एजेंसियां पागलों की तरह ओसामा बिन लादेन की तलाश में जुट गईं।
10 साल बाद पता चला कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के एबटाबाद में छिपा बैठा है। इसके बाद अमेरिका ने अपने सबसे बड़े दुश्मन को खत्म करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की खुफिया रणनीति बनाई।

अमेरिका के सबसे खतरनाक कमांडो कहे जाने वाले सील की टुकड़ी दो हेलीकॉप्टर में सवार होकर रात के अंधेरे में एबटाबाद पहुंची। इसके बाद थोड़ी देर तक लादेन का मकान गोलियों और बमों की तड़तड़ाहट से थर्राता रहा। गोलियों की आवाज़ तभी थमी जब अमेरिकी फौज ने लादेन को मार गिराया। इसके बाद अमेरिकी कमांडो जैसे आए थे, वैसे ही लौट गए।

गुरुवार, 29 सितंबर 2016

एक घंटे के स्ट्राइक में आतंकियों के 8 कैंप उड़ाए गए, 38 आतंकी मारे गए : सूत्र

नई दिल्ली उड़ी हमले को लेकर भारत की ओर नियंत्रण रेखा के नज़दीक पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक में आतंकियों के आठ कैंपों को उड़ाते हुए भारतीय सेना के स्पेशल आर्म्ड फोर्सेज ने 38 आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एक घंटे के इस सर्जिकल स्ट्राइक में एलओसी के निकट पांच सौ मीटर से लेकर दो किलोमीटर तक फैले आतंकियों के आठ कैंपों को स्पेशल आर्म्ड फोर्सेज के पैराट्रुपर्स ने निशाना बनाया जिसमें कम से कम 38 आतंकियों के मारे जाने की सूचना है। हालांकि सैन्य अभियान के महानिदेशक (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने गुरूवार को किए प्रेस कांफ्रेस में इस बात की जानकारी नहीं दी कि इस अभियान में कितने आतंकी मारे गए हैं।
उधर पाकिस्तान मिलिट्री ने इस तरह के किसी भी अभियान का खंडन करते हुए कहा है कि सीमा पार से निरंतर हो रही गोलीबारी में पाकिस्तानी सेना के दो जवान मारे गए हैं जबकि नौ घायल हो गए हैं। पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशन ने भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के दावों को खारिज करते हुए दावा किया है कि सर्जिकल स्ट्राइक का भारत का दावा दरअसल भ्रम फैलाने की कोशिश है।
इससे पहले सैन्य अभियान के महानिदेशक (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने गुरूवार को प्रेस कांफ्रेस में बताया, कल बहुत ही विश्वस्त औऱ पक्की जानकारी मिली कि कुछ आतंकी नियंत्रण रेखा के पास स्थित लांचपैड्स पर इकठ्ठे हुए हैं। उनका मकसद भारत में घुसपैठ करके आतंकी हमले करना था। भारत ने उन लांचपैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक किया। इस स्ट्राइक का मकसद आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करना था। इन हमलों के दौरान आतंकियों और उनके समर्थकों को भारी नुकसान हुआ है। कईयों को मार गिराया गया। मैंने पाकिस्तान डीजीएमओ से संपर्क करके उनको अपनी चिंताएं बताई और मामले की जानकारी दी। ये हम बिल्कुल गवारा नहीं करेंगे कि आतंकी हमारे देश पर किसी तरह का हमला कर सकें

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के इलाके में की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक में किसी भी भारतीय जवान को नुकसान नहीं पहुंचा है। डीजीएमओ ने कहा, यह बेहद चिंता का विषय है कि एलओसी पर आतंकियों ने कई बार घुसपैठ की कोशिश की। यह पुंछ और उड़ी में 11 और 18 सितंबर को हुए आतंकी हमलों से जाहिर होता है। डीजीएमओ ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी ही कोशिशों की वजह से ऐसी कई कोशिशों को नाकाम किया जा सका। डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि वे उम्मीद करता है कि पाकिस्तान इस मामले में भारत का समर्थन करेगा। इसके साथ ही रनवीर सिंह ने साफ किया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद आतंकियों को नुकसान पहुंचाना था और अब इसे हम आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं.

नियंत्रण रेखा पार करके भारत ने किए आतंकी ठिकानों पर हमला, कई आतंकी ढेर

Pic Courtesy : PIB 
नई दिल्ली : उड़ी हमले को लेकर भारत ने बड़ी कार्रवाई में नियंत्रण रेखा के नज़दीक पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए कई आतंकियों को ढेर कर दिया। सैन्य अभियान के महानिदेशक (DGMO) रणवीर सिंह ने गुरूवार को प्रेस कांफ्रेस में ये जानकारी दी। हालांकि इस हमले में कितने आतंकियों को मारा गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। जबकि पाकिस्तान की ओर से क्रॉस बार्डर फायरिंग में दो पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है।
डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने बताया, कल बहुत ही विश्वस्त औऱ पक्की जानकारी मिली कि कुछ आतंकी नियंत्रण रेखा के पास स्थित लांचपैड्स पर इकठ्ठे हुए हैं। उनका मकसद भारत में घुसपैठ करके आतंकी हमले करना था। भारत ने उन लांचपैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक किया। इस स्ट्राइक का मकसद आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकाम करना था। इन हमलों के दौरान आतंकियों और उनके समर्थकों को भारी नुकसान हुआ है। कईयों को मार गिराया गया। मैंने पाकिस्तान डीजीएमओ से संपर्क करके उनको अपनी चिंताएं बताई और मामले की जानकारी दी। ये हम बिल्कुल गवारा नहीं करेंगे कि आतंकी हमारे देश पर किसी तरह का हमला कर सकें
जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के इलाके में की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक में किसी भी भारतीय जवान को नुकसान नहीं पहुंचा है। डीजीएमओ ने कहा, यह बेहद चिंता का विषय है कि एलओसी पर आतंकियों ने कई बार घुसपैठ की कोशिश की। यह पुंछ और उड़ी में 11 और 18 सितंबर को हुए आतंकी हमलों से जाहिर होता है। डीजीएमओ ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी ही कोशिशों की वजह से ऐसी कई कोशिशों को नाकाम किया जा सका। डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि वे उम्मीद करता है कि पाकिस्तान इस मामले में भारत का समर्थन करेगा। इसके साथ ही रनवीर सिंह ने साफ किया कि इस सर्जिकल स्ट्राइक का मकसद आतंकियों को नुकसान पहुंचाना था और अब इसे हम आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं.
उधर इस सर्जिकल स्ट्राइक की पाकिस्तान ने निंदा करते हुए कहा है कि पाकिस्तान की शांति कायम करने की हसरत को उनकी कमजोरी न समझा जाए। पाकिस्तान मीडिया में आए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की टिप्पणियों में कहा गया है कि वो अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरूवार सुबह पाकिस्तान की तरफ से नियंत्रण रेखा पर हो रही लगातार गोलीबारी के मुद्दे पर कैबिनेट की सुरक्षा संबंधी समिति की बैठक बुलाई जिसमें रात को किए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद की परिस्थितियों पर विचार किया गया। बैठक में थल सेनाध्यक्ष के साथ डीजीएमओ भी शामिल हुए।

बुधवार, 28 सितंबर 2016

उड़ी हमले के बाद एक और सख्त कदम : सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने इस्लामाबाद नहीं जाएंगे पीएम

Photo Courtesy : PMO 
नई दिल्‍ली: उड़ी हमले के बाद एक और सख्त कदम उठाते हुए भारत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन में शिरकत नहीं करेंगे। सार्क के नियमों के मुताबिक फिर ऐसे किसी भी सम्मेलन को सार्क सम्मेलन नहीं माना जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस आशय की जानकारी दी। श्री स्वरूप के मुताबिक भारत का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग और आतंक एक साथ नहीं चल सकते।
सार्क सम्मेलन के इस बार के अध्यक्ष नेपाल को भारत ने अपनी इस राय से अवगत करा दिया है। भारत ने कहा कि जिस तरह सरहद पार से लागातार आतंकी हमले हो रहे हैं, जिस तरह से एक देश क्षेत्र के दूसरे सदस्य देशों के आंतरिक मामलों में लागातार दख़लंदाज़ी कर रहा है, ऐसे में एक सफल सार्क सम्मेलन नहीं हो सकता। बयान के मुताबिक भारत क्षेत्रीय सहयोग, संपर्क के लिए दृढ़संकल्प है लेकिन ये सब आतंक मुक्त माहौल में ही हो सकते हैं। फिलहाल जो माहौल बना है उस माहौल में भारत इस्लामाबाद में हो रहे इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले सकता। विकास स्वरूप ने बताया, लगातार सीमापार से बढ़ते आतंकवादी हमले और उसको लेकर रिश्तों में बढ़ती दूरियों के बाद जो स्थिति पैदा हुई है उसके चलते सरकार इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने में असमर्थ है।
सुत्रों के मुताबिक सार्क के कुछ अन्य सदस्य देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भुटान ने भी सम्मेलन के बारे में शंका जताई है। वैसे ये पहला मौक़ा नहीं है कि सार्क सम्मेलन रद्द हुआ हो, ऐसा पहले भी हुआ है और कई बार सार्क सम्मेलन देर से भी हुए हैं। लेकिन इस बार आसार नहीं लग रहे कि देर से भी इस साल ये सम्मेलन हो सकता है।
इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के ट्वीट से ये जाना कि भारत इस्लामाबाद में होने वाले 19वें सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा। इस संदर्भ में उन्होंने किसी आधिकारिक सूचना से इंकार करते हुए भारत के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

प्रधानमंत्री के सार्क सम्मेलन में ना शामिल होने के ऐलान से पहले विदेश मंत्रालय की तरफ से पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया गया और उन्हें उड़ी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत सौंपे गए। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का परोक्ष रूप से आरोप लगाते हुए पूरी दुनिया से उसे अलग-थलग करने का आह्वान किया था। 

मंगलवार, 27 सितंबर 2016

ऑपरेशन 'स्पेशल 26'


उधमसिंहनगर- कहते हैं इंसानी दिमाग से खतरनाक कोई चीज है ही नहीं...लूट,चोरी,डाका,धोखे और फरेब के आपने न जाने अबतक कितने किस्से सुने होंगे...और देखे होंगे...पर इंसानी दिमाग के फितूर की ये कहानी सुनकर आप दंग रह जाएंगे| क्योंकि, बदमाशों ने घर का दरवाजा खुलवाने के लिए अपना परिचय, बतौर इनकम टैक्स अधिकारी दिया था, परिवार कारोबारी था, इसलिए इस महकमें से इनका पाला आए दिन पड़ता रहता था।
फिर क्या था, इनकम टैक्स विभाग का नाम सुनने के बाद, घरवालों ने जैसे ही दरवाजा खोला..लुटेरों ने हथियार के दम पर वहां मौजूद सभी लोगों को कब्जे में कर लिया...और तकरीबन घंटे भर लूटपाट मचाने के बाद आराम से फरार हो गए...बताया जा रहा है कि, करीब दर्जन भर लुटेरों ने कारोबारी के घर से तकरीबन 50 लाख रुपये लूटे।
फिलहाल चश्मदीदों की निशानदेही पर पुलिस ने..उन बदमाशों का स्केच जारी कर दिया है और सरगर्मी से लुटेरों की तलाश में जुट गई है, लेकिन, बिल्कुल फिल्मी तर्ज पर अंजाम दिए गए लूट की इस वारदात ने पुलिस के भी होश उड़ा कर रख दिए हैं।

अठ्ठारह बरस का हुआ सर्च इंजन गूगल

Pic Courtesy : Google
नई दिल्ली :  दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल का जन्मदिन है। जी हां, गूगल आज 18 साल का बालिग हो गया है। आज के दिन इस खास मौके पर गूगल ने खुदके लिए एक डूडल तैयार किया है।

साल 1998 में गूगल ने अपना पहला जन्मदिन मनाया था, लेकिन तारीख को लेकर बहस जारी थी। पिछले कुछ सालों में ये तय हो गया है कि गूगल आधिकारिक रूप से 27 सितंबर को ही अपना जन्मदिन मनाएगा। साल 2006 के बाद से गूगल इसी दिन अपना जन्मदिन मनाते आया है। इस हिसाब से आज गूगल का 18वां जन्मदिन है।
साल 1998 के 4 सितंबर को गूगल दुनिया के सामने पहली बार आया था। पर इसका जन्मदिन कब मनाया जाए इसको लेकर काफी बहस चलती रही। कई तारीख सामने आई, लेकिन साल 2006 से गूगल 27 सितंबर को ही अपना बर्थडे मनाते आ रहा है। लैरी पेज और सर्जी ब्रिन के हाथों गूगल की स्थापना हुई है।
गूगल के जन्मदिन की तरह ही गूगल की अंग्रेजी में सही स्पेलिंग को लेकर भी एक कहानी है। वैसे तो अंग्रेजी में लिखा जाता है google, लेकिन असल में यह googol की गलत स्पेलिंग है। पेज और ब्रेन ने पहले इसका नाम बैकरब रखा था। बाद में नाम गूगल रखा गया। साल 1997 में कंपनी ने डोमेन रजिस्टर कराया और इसका नाम गूगल रख दिया गया। साल 2002 में गूगल ने पहली बार डूडल दिया। वैसे तो गूगल हर किसी इवेंट या किसी महान व्यक्ति को सम्मानित करने के लिए डूडल तैयार करता है। लेकिन अपने जन्मदिन पर भी हर साल एक डूडल तैयार करता है।
आज गूगल दुनिया का सबसे शक्तिशाली सर्च इंजन है, जहां आपको किसी भी चीज की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सकती है। पहले कंपनी का मकसद था कि वो बस दूसरी वेबसाइट्स की डिटेल्स इसमें देंगी, लेकिन फिर इरादा बदल गया और गूगल एक ऐसा प्लैटफॉर्म बन गया जहां दुनिया भर की जानकारी आसानी से एक ही जगह मिल सकती है। हर कोई एक क्लिक के साथ अपनी राहें आसान कर सकता है।

जब भी किसी महान व्यक्ति का जन्मदिन या एनीवर्सरी होता है, कोई बड़ा इवेंट या कोई हॉलीडे उस खास दिन पर डूडल बनाकर गूगल उसे सम्मानित करता है। साल 1998 में 30 अगस्त को पहली बार गूगल ने डूडल बनाया था। डेडिस्ट आर्ट फेस्टिवल को डूडल दिया था। उसके बाद साल 2009 में डूडल टीम तैयार हुई। 10 लोगों की इस टीम ने एक बार में 400 डूडल बनाए। इस टीम का हिस्सा 4 इंजीनियर, दो प्रोड्यूसर और तीन कुत्ते थे। फिर ये सिलसिला शुरू हो गया। साल 2010 के जनवरी में पहली बार एनिमेटेड डूडल बना। उसी साल 21 मई को इंटरेक्टिव डूडल बना। साल 2011 में सबसे लोकप्रिय डूडल बना।

सोमवार, 26 सितंबर 2016

सिंधु जल समझौते पर सरकार सख्त, पीएम मोदी ने कहा, 'खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते'

Photo Courtesy : PMO
नई दिल्ली: सिधु जल समझौते पर भारत सरकार ने सख्ती से आगे बढ़ने का मन बनाया है। नई दिल्ली में सिंधु जल समझौते पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते। सरकार सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि बैठक में सिंधु जल समझौते पर भारत के नए रूख से संबंद्ध कई फैसले लिए गए हैं। भारत से पाकिस्तान को पानी नियंत्रित करने वाली व्यवस्था पर्मानेंट इंडस कमीशनकी बैठक को आतंकवाद मुक्त माहौल बनने तक रोकने का फैसला किया गया है। बैठक में एक अहम फैसले के तहत टुलबुल नेवीगेशन सिस्टम पर भारत दुबारा काम शुरू करने पर पुनर्विचार करेगा। वर्ष 2007 से भारत ने इस पर काम रोक दिया था। अगर पाकिस्तान अपना रवैया नहीं बदलता है तो इसे दोबारा शुरू किया जा सकता है।
पीएम मोदी की बैठक में एक अंतर्मंत्रालयी टास्क फोर्स  बनाने का फैसला भी लिया है। यह टास्क फोर्स तय करेगी कि भारत कैसे और मजबूती के साथ पश्चमी नदियों के पानी के इस्तेमाल पर अपनी दावेदारी पेश कर सकता है। 1960 में समझौते के मुताबिक अभी भारत पूर्वी नदियों का पानी इस्तेमाल करता है।
इस के साथ बैठक में चेनाब नदी पर तीन नए बांध पाकुल डुल, सवालकोट और बुरसर बांध का निर्माण कार्य जिन पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ उन पर जल्द काम शुरू किया जाने का फैसला किया गया।
संधि की शर्तों के मुताबिक भारत सिंध नदी समुह के 20 प्रतिशत पानी का उपयोग कर सकता है। बैठक में बताया गया कि भारत फिलहाल आठ फ़ीसदी पानी का ही उपयोग करता है लिहाजा शेष बचे पानी के उपयोग का भी निर्णय हुआ। इसके लिए पश्चिमी नदियों में 18000 मेगावॉट क्षमता के विधुत उत्पादन की संभावनाओं पर आगे बढ़ने की सहमति हुई है।
उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति अयूब खान ने सिंधु नदी समुह के पानी को लेकर एक संधि पर हस्ताक्षर किए। इसमें तय हुआ कि सिंधु नदी बेसिन में बहने वाली 6 नदियों को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा जाएगा। पूर्वी हिस्से में बहने वाली सतलज, रावी और व्यास के पानी पर भारत का पूरा अधिकार होगा। वहीं पश्चिमी हिस्से में बह रही सिंधु,चिनाब और झेलम के पानी का भारत सीमित इस्तेमाल कर सकेगा। संधि के मुताबिक भारत इन नदियों के पानी का कुल 20 प्रतिशत पानी ही रोक सकता है।
बैठक में माना जा रहा है कि चीन को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी बात हुई। सूत्रों के मुताबिक पीएम ने कहा कि जब चीन संधि का हिस्सा है ही नहीं तो चिंता करने की कोई बात नहीं। दरअसल कहा जा रहा था कि चीन भारत के लिए सिंधु नदी का पानी रोक सकता है।  1960 में हुए समझौते के तहत आने वाली 6 नदियों में से एक सिंधु नदी की शुरुआत चीन से और दूसरी नदी सतलुज की शुरुआत तिब्बत से होती है।
एक आशंका के मुताबिक कहा जा रहा था कि अगर चीन ने भारत में आने वाले पानी को ही रोक दे तो फिर हमारे यहां भाखड़ा डैम, कारचम वांगटू हाईड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और नाथपा झाकरी डैम में पानी नहीं आएगा। चीन को लेकर इन सभी आशंकाओं को बैठक में खारिज कर दिया गया। बैठक में पीएम के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव ए जयशंकर, दो प्रिंसिपल सेक्रेटरी, जल संसाधन सचिव भी मौजूद थे।

सिंधु जल समझौता तोड़ने के क्या होगें मायने

नई दिल्ली : उड़ी आतंकी हमले के बाद से देश में लगातार पाकिस्तान के साथ 1960 में किए गए सिंधु जल समझौते को तोड़ने की मांग चारो तरफ से उठने लगी है। भारत पाकिस्तान मामलों के जानकार भी इस एक विकल्प पर विचार करने के संकेत देते दिखते हैं। इसी क्रम में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विदेश सचिव एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ इस संधि की समीक्षा के लिए एक बैठक भी बुलाई। ज़ाहिर है सिंधु के पानी को लेकर 56 साल पहले हुई संधि तोड़ने के संकेत भर से पाकिस्तान की करतूतों से नाराज भारतीय उत्साहित तो हैं लेकिन इस संधि को तोड़ने के क्या मायने होंगे पाकिस्तान के लिए और भारत को इस फैसले के बाद किस तरह की चुनौतियों से होना पड़ेगा दो चार ?  
जानकार इस समझौते को इतिहास की इस सबसे उदारजल संधि बताते हैं। जाहिर है इसके खत्म होने से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाकर इसका संकेत दे भी चुके हैं।
सिंधु के अलावा संधि में दर्ज चिनाब और झेलम पाकिस्तान के लिए लाइफ लाइन की तरह है। पाकिस्तान के दो तिहाई हिस्से में सिंधु और उसकी सहायक नदियां बहती हैं। इस तरह उसका करीब 65 फीसदी हिस्सा इनके किनारे है। इन नदियों का पानी रोका जाता है तो पाकिस्तान की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। पाकिस्तान ने इस पर बांध बनाए हैं, जहां बिजली उत्पादन से जुड़े कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। संधि टूटने पर ये ठप्प पड़ सकते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान को पानी के लिए भारी खर्च करना पड़ेगा। इससे उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। यानी पहले से 163 बिलियन डॉलर यानी 17 खरब रुपए के कर्ज में डूबे पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। यही कारण है कि पाकिस्तान की करतूतों से नाराज भारतीय, संधि तोड़ देने के इशारे भर से ही उत्साहित हैं।
1948 में बंटवारे के कुछ महीने बाद भारत ने पाकिस्तान को सिंधु नदी का पानी देना बंद कर दिया था। पाकिस्तान के वर्षों तक गिड़गिड़ाने के बाद 19 सितंबर 1960 को भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति अयूब खान ने पानी को लेकर एक संधि पर हस्ताक्षर किए। इसमें तय हुआ कि सिंधु नदी बेसिन में बहने वाली 6 नदियों को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा जाएगा। पूर्वी हिस्से में बहने वाली सतलज, रावी और व्यास के पानी पर भारत का पूरा अधिकार होगा। वहीं पश्चिमी हिस्से में बह रही सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी का भारत सीमित इस्तेमाल कर सकेगा। संधि के मुताबिक भारत इन नदियों के पानी का कुल 20 प्रतिशत पानी ही रोक सकता है। वह चाहे तो इन नदियों पर बांध बना सकता है, लेकिन उसे रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट ही बनाने होंगे, जिनके तहत पानी को रोका नहीं जाता। ऐसे में पाकिस्तान के हिस्से में इन नदियों का 167.2 अरब घन मीटर पानी सालाना जाता है। यही वजह है कि इसे इतिहास का सबसे उदार जल बंटवारा भी कहा जाता है।
अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई) और टाटा जल नीति कार्यक्रम द्वारा 2005 में इस संधि पर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में भी इसे भंग करने की जरूरत का उल्लेख है। इंडस वाटर ट्रीटी: स्क्रैप्ड ऑर अब्रोगेटेडशीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार संधि जम्मू-कश्मीर को सालाना लगभग 6500 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा रही है। इसलिए कि इससे घाटी में खेती तथा बिजली पैदा करने की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन नदियों के पानी का इस्तेमाल किया जाए तो घाटी में 20000 मेगावाट बिजली का अतिरिक्त उत्पादन हो सकता है। दरअसल संधि की वजह से बगलीहार परियोजना के लिए एक-एक इंच भूमि इस्तेमाल करने की इजाजत के लिए भारत को भारी मशक्कत करनी पड़ी है, जबकि किशन-गंगा, वूलर बैराज और तुल-बुल परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं।
जल संधि के तहत भारत की यह जिम्मेदारी भी है कि वह सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों पर बनाई जाने वाली किसी भी बिजली परियोजना के बारे में पूरी जानकारी पाकिस्तान को दे। इसके अलावा नदियों से कितना पानी पाकिस्तान की तरफ बहता है, उसके बारे में भी जानकारी हर महीने दी जाती है। दोनों देशों ने एक जल आयोग बनाया है, जिसकी हर साल बैठक होती है। इसमें संधि के बारे में दोनों देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है और आपसी शिकायतें दूर करने की कोशिश की जाती है।
सिंधु दुनिया की सबसे बड़ी नदियों में से एक है। इसकी लंबाई 3180 किलोमीटर से अधिक है, यानी ये गंगा से 655 किलोमीटर बड़ी है। सहायक नदी चिनाब, झेलम, सतलज, राबी और व्यास के साथ इसका संगम पाकिस्तान में होता है। सिंधु नदी बेसिन करीब साढ़े ग्यारह लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। मतलब उत्तर प्रदेश जैसे 4 राज्य इसमें समा सकते हैं। सिंधु और सतलज नदी का उद्गम चीन में है, जबकि बाकी चार नदियां भारत से ही निकलती हैं। सभी नदियों के साथ मिलते हुए विराट सिंधु नदी कराची के पास अरब सागर में गिरती है।
इस समझौते को तोड़ने और उसका असर पैदा करने के लिए भारत को भी तत्काल कई काम करने होंगे। सिंधु, चिनाब व झेलम के पानी को रोकने के लिए भारत को बांध और कई नहरें बनानी होंगी, जिसके लिए पैसे और वक्त की जरूरत होगी। हालांकि बांध बनने के बाद नदी के आसपास के रिहायशी इलाकों के लिए डूब का खतरा खड़ा हो सकता है।
चीन से भी कई नदियां भारत में आती हैं। आने वाले दिनों में चीन संधि तोड़ने को मुद्दा बनाते हुए भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। पड़ोसी देश बांग्लादेश व नेपाल के साथ भारत की नदी जल संधियां हैं। ऐसे में इन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
संधि तोड़ी तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि भी प्रभावित होगी। अगर भारत अब पानी रोकता है तो पाकिस्तान को हर मंच पर भारत के खिलाफ बोलने का एक मौका मिलेगा और वह इसे मानवाधिकारों से जोड़ेगा। भारत को इन्हीं तीन बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

लिहाज़ा इस तरह के किसी भी फैसले पर पहुंचने से पहले भारत सरकार को इन तमाम संभावनाओं और चुनौतियों से निपटने की पुख्ता रणनीति बनानी होगी। 

रविवार, 25 सितंबर 2016

बनारस के संतों ने की बड़ी पहल, किन्नरों ने पितृपक्ष की मातृनवमी पर विधि विधान से किया त्रिपिंडी श्राद्ध

Photo Courtesy : Ganga Mahasabha 
वाराणसी : पौराणिक नगरी काशी में किन्नर समाज ने ऐतिहासिक कदम उठाया। मानवाधिकार व संवैधानिक अधिकार की जंग जीतने के बाद धर्म सम्मत अधिकार की राह पर आगे बढ़ते हुए अपने समाज के पितरों को नमन किया। अब तक ज्ञात इतिहास में पहली बार पितृपक्ष मातृनवमी पर पिशाचमोचन कुंड पर किन्नरों ने अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक सामूहिक त्रिपिंडी श्राद्ध किया। सस्वर मंत्रों के बीच विधि-विधान से समस्त अनुष्ठान किए व दिवंगत माताओं व गुरुओं के नाम पिंडदान किया। पुरोहितों को भंडारा में भोजन कराया, दक्षिणा के साथ विदाई दी।
अनुष्ठान के निमित्त किन्नर अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में देशभर से समाज के संत-महंतों की पिशाचमोचन पर सुबह लगभग 10 बजे जुटान हुआ। पंक्तिबद्ध हो सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया। समाज से मिली उपेक्षा के दंश को भूल अपनी उन माताओं-गुरुओं को याद किया जिन्होंने स्नेह का आंचल देकर पाला, बड़ा किया और अपने पैरों पर खड़ा भी किया। देश-दुनिया को मानवता के सर्वोपरि होने का संदेश भी दिया। आचार्य लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्मियों की तरह ही किन्नर समाज के लोग अपने पितरों का हर साल श्राद्ध-तर्पण अनुष्ठान करेंगे। पांच साल बाद फिर पिशाचमोचन पर सामूहिक रूप से श्राद्ध किया जाएगा। पुरोहित अनूप शर्मा के आचार्यत्व में 21 ब्राह्मïणों ने श्राद्धकर्म कराया।
जैसे महाभारत में शिखंडी ने अपने पुर्वजों का श्राद्ध किया था वैसे ही कलयुग में हजारों वर्षों बाद आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी जी (किन्नर अखाड़ा) ने तारिणी न्यास संबद्ध गंगा महासभा के साथ मिलकर अपने पुर्वजों का त्रिपिंडी श्राद्ध कराया काशी के पिशाच मोचन कुंड पर । गंगा महासभा व अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य जीतेंद्रानंद सरस्वती, किन्नर अखाड़ा के संस्थापक व संरक्षक ऋषि अजय दास और स्वामी विमलदेव के सानिध्य में अनुष्ठान किए गए। रविशंकर द्विवेदी व मुन्नालाल पांडेय ने मार्गदर्शन और तारिणी न्यास के राष्ट्रीय मंत्री मयंक कुमार ने संयोजन किया। दोपहर बाद हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में भंडारा किया गया। इसमें पुरोहितों को भोजन कराने के साथ ही किन्नरों ने भी प्रसाद ग्रहण किया। दिल्ली से महंत भवानी मां, लखनऊ से पीठाधीश्वर सुधा तिवारी, मुंबई से महंत पवित्रा समेत अखाड़े के संत किन्नर मौजूद थे।
उल्लेखनीय है कि आदिकाल से चली आ रही परंपरा ने किन्नरों को सम्मानपूर्वक जीने पर ही नहीं बल्कि मरने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है। हिंदू धर्म में जन्म लेने के बावजूद किन्नरों का शवदाह नहीं होता। उन्हें दफनाया जाता है और हिंदू परंपरा के अनुसार उनका तर्पण भी नहीं किया जाता है। किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण ने अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती के साथ मिलकर इस परंपरा को तोड़ने की पहल की।

किन्नर परंपरा के महामंडलेश्वर ने कहा कि परंपरा तोड़ने का मकसद सिर्फ यह है कि हिंदू धर्म में जन्में किन्नरों को सम्मानपूर्वक मरने का अधिकार मिलना चाहिए। गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा यह पहला मौका है जब किन्नरों ने खुद को सनातन हिंदू मानते हुए पिंडदान के जरिए अपने समुदाय के पितरों का स्मरण किया।

शनिवार, 24 सितंबर 2016

माँ की याद – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

       राजकमल चौधरी, फणीश्वरनाथ रेणु, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
(साभार - इयान वुलफोर्ड)

















चींटियाँ अण्डे उठाकर जा रही हैं,
और चिड़ियाँ नीड़ को चारा दबाए,
धान पर बछड़ा रंभाने लग गया है,
टकटकी सूने विजन पथ पर लगाए,
थाम आँचल, थका बालक रो उठा है,
है खड़ी माँ शीश का गट्ठर गिराए,
बाँह दो चमकारती–सी बढ़ रही है,
साँझ से कह दो बुझे दीपक जलाये।
शोर डैनों में छिपाने के लिए अब,
शोर माँ की गोद जाने के लिए अब,

शोर घर-घर नींद रानी के लिए अब,
शोर परियों की कहानी के लिए अब,
एक मैं ही हूँ कि मेरी सांझ चुप है,
एक मेरे दीप में ही बल नहीं है,
एक मेरी खाट का विस्तार नभ सा,
क्योंकि मेरे शीश पर आँचल नहीं है।
                                                                                              
              ~ प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की पुण्यतिथि पर नमन

                                                                                          

शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

अगर पटना की लड़की की जानकारी पर होती कार्रवाई तो नहीं होता उड़ी हमला

Photo Courtesy : Rediff
रामपुर : उड़ी में सैन्य बेस पर हुए आतंकी हमले में 18 जवानों की मौत को टाला जा सकता था। अगर खाड़ी देश में रहने वाली पटना की युवती के दस दिन पहले भेजे गए चेतावनी पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोई ठोस कदम उठाए होते तो।
दरअसल खाड़ी देश में रहने वाली पटना की एक युवती को 10 दिन पहले यह अंदेशा हो गया था। इसकी जानकारी भी उसने अपने एक फेसबुक फ्रेंड को दी थी। यूपी के रामपुर में रहने वाले इस दोस्त ने यह जानकारी पुलिस तक पहुंचा भी दी थी। पुलिस और जांच एजेंसियां अगर इस जानकारी के आधार पर अलर्ट हो जाती तो कश्मीर पर हमला टाला जा सकता था।
ये कहना तो अभी जांच का विषय है लेकिन यूपी के एडीजी (कानून-व्यवस्था) दलजीत चौधरी के अनुसार इस मामले की जांच एटीएस को सौंप दी गई है।
रामपुर के एक आरटीआई कार्यकर्ता से खाड़ी देश की एक युवती फेसबुक के जरिये जुड़ी हुई है। यह युवती मूलरूप से पटना की रहने वाली है। आरटीआई कार्यकर्ता के फेसबुक वॉल पर मोबाइल नंबर भी दर्ज है, जिस पर वह व्हाट्सएप चलाते हैं। सोशल साइट के जरिए यह महिला उनसे व्हाट्सएप से जुड़ी। 5 सितंबर को खाड़ी देश की इस महिला ने आरटीआई कार्यकर्ता को मैसेज भेजे थे। इसमें उसने बताया कि इरफान यूनुस नाम के पाकिस्तानी शख्स के बारे में उसके पास जानकारी है, जिसे शेयर कर रही है। यह शख्स आजाद कश्मीर से है, जो कश्मीर में आतंकवादी घटना को अंजाम देने की फिराक में है। इसके बाद उसने आरटीआई कार्यकर्ता को व्हाट्सएप पर ही उस संदिग्ध का फोटो और अन्य जानकारियां भी शेयर कीं।

आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि फोटो और अन्य जानकारियों का प्रिंट लेकर उन्होंने एसपी को रजिस्टर्ड डाक से भेजा। इस पर एसपी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। आरटीआई कार्यकर्ता के मुताबिक, 8 सितंबर को उन्होंने एसपी को पत्र भेजा और 9 सितंबर की शाम को एलआईयू ने उससे संपर्क किया। 10 सितंबर को आईबी और एसटीएफ लखनऊ की टीम ने भी रामपुर आकर उससे जानकारी ली। उन्होंने उस युवती का नंबर एसटीएफ को दिया और उससे बात भी कराई। इस पूरे मामले में जब रामपुर के पुलिस अधीक्षक संजीव त्यागी से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश पुलिस के एडीजी, कानून व्यवस्था, दलजीत चौधरी ने भी इस सुचना के मिलने की पुष्टि की है लेकिन उस पर तुरंत फुरंत कार्रवाई क्यों नहीं हुई इस पर गोलमोल जबाव देते हैं। उन्होंने कहा, ‘रामपुर पुलिस को इस मामले की सूचना मिली थी, जिसकी जांच आईजी एटीएस कर रहे हैं। फिलहाल उरी हमले से इसका कनेक्शन होने की पुष्टि नहीं हुई है