बुधवार, 28 सितंबर 2016

उड़ी हमले के बाद एक और सख्त कदम : सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने इस्लामाबाद नहीं जाएंगे पीएम

Photo Courtesy : PMO 
नई दिल्‍ली: उड़ी हमले के बाद एक और सख्त कदम उठाते हुए भारत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन में शिरकत नहीं करेंगे। सार्क के नियमों के मुताबिक फिर ऐसे किसी भी सम्मेलन को सार्क सम्मेलन नहीं माना जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस आशय की जानकारी दी। श्री स्वरूप के मुताबिक भारत का मानना है कि क्षेत्रीय सहयोग और आतंक एक साथ नहीं चल सकते।
सार्क सम्मेलन के इस बार के अध्यक्ष नेपाल को भारत ने अपनी इस राय से अवगत करा दिया है। भारत ने कहा कि जिस तरह सरहद पार से लागातार आतंकी हमले हो रहे हैं, जिस तरह से एक देश क्षेत्र के दूसरे सदस्य देशों के आंतरिक मामलों में लागातार दख़लंदाज़ी कर रहा है, ऐसे में एक सफल सार्क सम्मेलन नहीं हो सकता। बयान के मुताबिक भारत क्षेत्रीय सहयोग, संपर्क के लिए दृढ़संकल्प है लेकिन ये सब आतंक मुक्त माहौल में ही हो सकते हैं। फिलहाल जो माहौल बना है उस माहौल में भारत इस्लामाबाद में हो रहे इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले सकता। विकास स्वरूप ने बताया, लगातार सीमापार से बढ़ते आतंकवादी हमले और उसको लेकर रिश्तों में बढ़ती दूरियों के बाद जो स्थिति पैदा हुई है उसके चलते सरकार इस्लामाबाद में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने में असमर्थ है।
सुत्रों के मुताबिक सार्क के कुछ अन्य सदस्य देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भुटान ने भी सम्मेलन के बारे में शंका जताई है। वैसे ये पहला मौक़ा नहीं है कि सार्क सम्मेलन रद्द हुआ हो, ऐसा पहले भी हुआ है और कई बार सार्क सम्मेलन देर से भी हुए हैं। लेकिन इस बार आसार नहीं लग रहे कि देर से भी इस साल ये सम्मेलन हो सकता है।
इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है कि उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के ट्वीट से ये जाना कि भारत इस्लामाबाद में होने वाले 19वें सार्क सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा। इस संदर्भ में उन्होंने किसी आधिकारिक सूचना से इंकार करते हुए भारत के इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

प्रधानमंत्री के सार्क सम्मेलन में ना शामिल होने के ऐलान से पहले विदेश मंत्रालय की तरफ से पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया गया और उन्हें उड़ी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के सबूत सौंपे गए। उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान पर आतंकवाद को पनाह देने का परोक्ष रूप से आरोप लगाते हुए पूरी दुनिया से उसे अलग-थलग करने का आह्वान किया था। 

कोई टिप्पणी नहीं: