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| Photo Courtesy : ADG PI |
नई दिल्ली : सूत्रों के अनुसार इस स्ट्राइक को 200 से 500 मीटर के
दायरे में 7 अलग-अलग जगहों पर अंजाम
दिया गया।
सेना के जवान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के 2 किलोमीटर अंदर तक पहाड़ियों, जंगलो को पार करते हुए पहुंचे थे।
सर्जिकल स्ट्राइक
करने से पहले उड़ी में जहां सेना के 18 जवान शहीद हुए थे, वहां पर सैनिकों ने
भारी फायरिंग कर पाकिस्तान का ध्यान बटाया गया ताकि सैनिक पाकिस्तान के कब्जे वाले
इलाके में प्रवेश कर सकें।
रात के साढ़े
बारह बजे का वक्त था। पुंछ से एएलएच ध्रुव पर 4 और 9 पैरा के 25 कमांडो सवार होकर पाकिस्तान के कब्जे वाले
कश्मीर में दाखिल हुए। नियंत्रण रेखा पार कराके हेलिकॉप्टर ने इन कमांडोज़ को जंगल
में उतार दिया। पाकिस्तानी सेना की फायरिंग की आशंका के बीच इन कमांडोज़ ने
तक़रीबन तीन किलोमीटर का फासला रेंग कर तय किया। देश में तबाही मचाने के लिये यहां
आतंकियों के लॉन्च पैड्स भिम्बर, केल, तत्तापानी और लीपा इलाकों में स्थित थे।
इन कमांडोज़ को कवर
देने के लिए भारतीय वायुसेना के विमान पूरी तरह तैयार थे।
सर्जिकल स्ट्राइक
में गए जवानों को साफ निर्देश था की किसी भी सैनिक या दुर्घटना होने पर किसी की
बॉडी वहां छोड़ के नहीं आना है।
इस ऑपरेशन को देर
रात 12.30 बजे शुरू किया गया और
सुबह 4.30 बजे इसे समाप्त किया
गया।
पाकिस्तानी सेना
को भारत के इस कदम की भनक तक नहीं लगी। हमले से पहले आतंकियों के लॉन्चिंग पैड्स
पर खुफिया एजेंसियां एक हफ्ते से नज़र रखे हुए थीं। रॉ और एमआई पूरी मुस्तैदी से
आतंकवादियों की एक-एक हरकत पर नज़र रखे हुए थी। सेना ने हमला करने के लिये कुल छह
लॉन्चिंग पैड का लक्ष्य रखा था, हमले के दौरान
इनमें से सात लॉन्चिंग पैड को पूरी तरह तबाह कर दिया।
कमांडोज़ तवोर और
एम-4 जैसी राइफलों, ग्रेनेड्स और स्मोक ग्रेनेड्स से लैस थे। उनके
पास अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चिंग, नाइट विज़न
डिवाइसेज़ और हेलमेट माउण्टेड कैमरे भी थे।
पलक झपकते ही
कमांडोज़ ने आतंकियों पर ग्रेनेड से हमला किया। अफरा तफरी मचते ही स्मोक ग्रेनेड
के साथ ताबड़तोड़ फायरिंग की। देखते ही देखते 38 आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। हमले में पाकिस्तानी सेना
के दो जवान भी मारे गए। भारतीय सेना के दो पैरा कमांडोज़ भी लैंड माइंस की चपेट
में आने के कारण घायल हुए हैं।
सुबह 4.30 बजे भारतीय कंमाडो सात आतंकी लॉन्च पैड को
नष्ट करके वापस लौट आए। हर लांच पैड पर 30 से 40 आतंकी ठहरे हुए थे और
सेना ने पहले ही कहा है कि "बड़े पैमाने पर नुकसान" हुआ है।
रात साढ़े बारह
बजे शुरू हुए इस ऑपरेशन को साढ़े चार बजे तक ख़त्म कर लिया गया। दिल्ली में इस
ऑपरेशन की तैयारी सेना मुख्यालय में रात आठ बजे से ही हो गई थी।
राजधानी में
बुधवार शाम कोस्टगार्ड कमांडर कॉफ्रेंस का डिनर रखा गया था। जिसमें रक्षा मंत्री
मनोहर पर्रिकर, एनएसए अजीत डोभाल
और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग को पहुंचना था। इस डिनर में जाने की बजाय यह
तीनों रात आठ बजे सीधे सेना मुख्यालय में मौजूद वॉर रूम में पहुंचे।
पूरे ऑपरेशन के
दौरान रात में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेना प्रमुख जनरल
दलबीर सिंह ऑपरेशन की निगरानी करते रहे।
इस दौरान ऑपरेशन की जानकारी लगातार प्रधानमंत्री मोदी को भी दी जा रही थी।
राष्ट्रीय
सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने रात ही में अपनी अमेरिकी समकक्ष सूसैन राइस से फोन
पर बातचीत भी की।
सूत्रों से पता
चला है कि सेना प्रमुख दलबीर सुहाग ने कहा है कि सेना ने अपने कहे का पालन किया और
चुनी हुई जगह और समय पर इसका जवाब दिया है। ऑपरेशन के बाद सुरक्षा हलकों में
पाकिस्तान को उसी की भाषा में सबक सिखाने की जितनी ख़ुशी है उतनी ही सतर्कता भी है।
और इसलिये तीनों सेनाएं और अर्द्धसैनिक बल अपने अधिकतम अलर्ट पर हैं।
सूत्रों के
मुताबिक सेना और बीएसएफ की छुट्टियों पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है। जम्मू और
कश्मीर और पंजाब में सीमा से सटे इलाकों को एहतियातन ख़ाली कराया जा रहा है।
बीएसएफ की भी अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। गुजरात से लेकर कश्मीर तक सीमा पर हाई
अलर्ट लागू कर दिया है।
गुजरात की
समुद्री सीमा पर कोस्टगार्ड भी सतर्क है। वायुसेना को भी किसी भी आपात स्थिति से
निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।
सेना के सूत्रों
का कहना है कि सेना ने इस ऑपरेशन की वीडियोग्राफी भी की है जिसे आने वाले समय में
रिलीज किया जाएगा।

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