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| Photo Courtesy : PMO |
नई दिल्ली: सिधु जल समझौते पर भारत सरकार ने
सख्ती से आगे बढ़ने का मन बनाया है। नई दिल्ली में सिंधु जल समझौते पर उच्चस्तरीय
बैठक के बाद सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ‘खून
और पानी एक साथ नहीं बह सकते’। सरकार
सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार कर रही है।
बताया जा रहा है कि बैठक में सिंधु जल समझौते
पर भारत के नए रूख से संबंद्ध कई फैसले लिए गए हैं। भारत से पाकिस्तान को पानी
नियंत्रित करने वाली व्यवस्था ‘पर्मानेंट
इंडस कमीशन’ की बैठक को आतंकवाद मुक्त माहौल
बनने तक रोकने का फैसला किया गया है। बैठक में एक अहम फैसले के तहत टुलबुल
नेवीगेशन सिस्टम पर भारत दुबारा काम शुरू करने पर पुनर्विचार करेगा। वर्ष 2007 से
भारत ने इस पर काम रोक दिया था। अगर पाकिस्तान अपना रवैया नहीं बदलता है तो इसे
दोबारा शुरू किया जा सकता है।
पीएम मोदी की बैठक में एक अंतर्मंत्रालयी टास्क
फोर्स बनाने का फैसला भी लिया है। यह
टास्क फोर्स तय करेगी कि भारत कैसे और मजबूती के साथ पश्चमी नदियों के पानी के
इस्तेमाल पर अपनी दावेदारी पेश कर सकता है। 1960 में समझौते के मुताबिक अभी भारत
पूर्वी नदियों का पानी इस्तेमाल करता है।
इस के साथ बैठक में चेनाब नदी पर तीन नए बांध
पाकुल डुल, सवालकोट और बुरसर बांध का निर्माण
कार्य जिन पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ उन पर जल्द काम शुरू किया जाने का फैसला
किया गया।
संधि की शर्तों के मुताबिक भारत सिंध नदी समुह
के 20 प्रतिशत पानी का उपयोग कर सकता है। बैठक में बताया गया कि भारत फिलहाल आठ
फ़ीसदी पानी का ही उपयोग करता है लिहाजा शेष बचे पानी के उपयोग का भी निर्णय हुआ।
इसके लिए पश्चिमी नदियों में 18000 मेगावॉट क्षमता के विधुत उत्पादन की संभावनाओं
पर आगे बढ़ने की सहमति हुई है।
उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर 1960 को भारत के
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाक राष्ट्रपति अयूब खान ने सिंधु नदी समुह के
पानी को लेकर एक संधि पर हस्ताक्षर किए। इसमें तय हुआ कि सिंधु नदी बेसिन में बहने
वाली 6 नदियों को पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बांटा जाएगा। पूर्वी हिस्से में
बहने वाली सतलज, रावी और व्यास के पानी पर भारत का
पूरा अधिकार होगा। वहीं पश्चिमी हिस्से में बह रही सिंधु,चिनाब
और झेलम के पानी का भारत सीमित इस्तेमाल कर सकेगा। संधि के मुताबिक भारत इन नदियों
के पानी का कुल 20 प्रतिशत पानी ही रोक सकता है।
बैठक में माना जा रहा है कि चीन को लेकर उठ रही
चिंताओं पर भी बात हुई। सूत्रों के मुताबिक पीएम ने कहा कि जब चीन संधि का हिस्सा
है ही नहीं तो चिंता करने की कोई बात नहीं। दरअसल कहा जा रहा था कि चीन भारत के
लिए सिंधु नदी का पानी रोक सकता है। 1960
में हुए समझौते के तहत आने वाली 6 नदियों में से एक सिंधु नदी की शुरुआत चीन से और
दूसरी नदी सतलुज की शुरुआत तिब्बत से होती है।
एक आशंका के मुताबिक कहा जा रहा था कि अगर चीन
ने भारत में आने वाले पानी को ही रोक दे तो फिर हमारे यहां भाखड़ा डैम, कारचम
वांगटू हाईड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट और नाथपा झाकरी डैम में पानी नहीं आएगा। चीन
को लेकर इन सभी आशंकाओं को बैठक में खारिज कर दिया गया। बैठक में पीएम के अलावा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश
सचिव ए जयशंकर, दो प्रिंसिपल सेक्रेटरी, जल
संसाधन सचिव भी मौजूद थे।

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