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| Photo Courtesy : India Today |
श्रीनगर
: कश्मीर
घाटी में आतंकियों ने नया टारगेट खोजा है। स्कूल जलाओ ताकि कश्मीर घाटी के बच्चों की
ज़िन्दगी संवरने का मुख्य जरिया ही न रहे। एक तरफ तो घाटी में बंद की वजह से बच्चे
ऐसे ही स्कूल नहीं जा पा रहे जबकि दूसरी आतंकी लगातार सरकारी स्कूलों को निशाना
बना रहे हैं। हालांकि दूसरी तरफ कश्मीरी अलगाववादी नेताओं के बच्चे मजे से अपनी
स्कूली पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर
में आतंकी हमलों और सीमापार से फायरिंग के बीच घाटी में बच्चों के स्कूलों को निशाना
बनाया जा रहा है। राज्य की अलगाववादी ताकतों और आतंकियों ने पिछले 3 महीने में 27
स्कूलों को जलाया है। रविवार को अनंतनाग के ऐशमुकाम के जवाहर नवोदय विद्यालय को
आतंकियों ने फूंक दिया। पिछले दो दिन में 3 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया।
इस घटना को लेकर केंद्र सरकार ने भी जम्मू कश्मीर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। वहीं
जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है।
जम्मू
कश्मीर हाईकोर्ट की श्रीनगर बेंच मामले की संज्ञान लेकर कहा है कि स्कूलों में आग
की घटनाओं ने झकझोर दिया है और इस स्थिति पर विचार करने की जरूरत है। स्कूलों की
इमारत जलाने वाले शिक्षा के दुश्मन हैं। वहीं मुख्य सचिव, डीजीपी, शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को आदेश दिया है कि स्कूलों को जलने से
बचाने के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएं। 7 नवंबर को मामले पर अगली सुनवाई होनी है।
जम्मू
कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने स्कूलों को जलाने की घटना पर कहा
है कि इसके पीछे बड़ा षडयंत्र दिख रहा है। कुछ लोग नहीं चाहते की जम्मू कश्मीर के
बच्चे पढ़े-लिखे हों।
कश्मीर
के अनंतनाग जिले में एक सरकारी स्कूल की इमारत में आग लगा दी गई। रविवार को लगाई
गई इस आग पर आस-पास के लोग जब तक काबू पाते, इमारत
का ज्यादातर हिस्सा जल गया था। जिस स्कूल में आग लगाई गई वह अनंतनाग का ऐशमुकाम
स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय है।
उधर
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने इसे मूर्खता और देशद्रोह से
मिली हुई घटना करार दिया है। उन्होंने कहा कि अपने ही बच्चों के साथ ऐसा सलूक किया
जा रहा है। देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। स्थानीय लोग भी इसका विरोध कर रहे हैं।
वहीं जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने कहा कि ऐसा करने वाले लोगों को
मध्यकालीन युग की तराफ धकेल रहे हैं। बच्चों के फ्यूचर को खराब कर रहे हैं। आपने
देखा है कि हमारे बच्चे IAS
में जा रहे हैं, टॉप कर रहे हैं। मेनस्ट्रीम में जा रहे
हैं। अगर ऐसा ही होता रहा तो इन्हें पत्थर मारने वाले कहां मिलेंगे? यही सोचकर यह किया जा रहा है।
कश्मीर
में पिछले 112 दिनों से स्कूलों में कोई क्लास वर्क नहीं हो रहा है। आतंकी बुरहान
वानी के मारे जाने के बाद से जब से घाटी में प्रदर्शन शुरू हुए हैं, तब से 25 शिक्षण संस्थानों की इमारतों
को आग लगाकर ध्वस्त कर दिया गया है। कश्मीर के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूल 8
जुलाई 2016 से बंद हैं।
खास
बात ये है कि जहां सभी स्कूल बंद थे वहीं, श्रीनगर
के दिल्ली पब्लिक स्कूल ने अपने यहां पढ़ने वाले 573 बच्चों के एग्जाम करवाए।
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की पोती भी उसी स्कूल में पढ़ती है। वह10वीं
क्लास में है। स्कूल ने कड़ी सुरक्षा के बीच 1 से 5 अक्टूबर तक अपने इंटरनल एग्जाम
दिए।
गिलानी
की जो पोती डीपीएस में पढ़ती है उसके पिता का नाम नईम जफर गिलानी है। वह गिलानी के
सबसे बड़े बेटे हैं। नईम अपने पिता की किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं और उनसे अलग
श्रीनगर में रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर उनकी बेटी पेपर नहीं देती तो उसकी
पढ़ाई खराब होती और उसके मार्च में होने वाले फाइनल एग्जाम में नहीं बैठने दिया
जाता।
इस बीच घाटी में स्कूलों पर हमले के बीच वहां पढ़ने
वाले बच्चों के परिजनों का भी प्रदर्शन शुरू हो गया है। परिजन कह रहे हैं कि स्कूल
बंद करने से कौन सी आजादी मिल जाएगी? कश्मीर में पिछले तीन
महीने से ज्यादा से फैली बदअमनी का असर वहां के छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।

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