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| Photo Courtesy : PMO |
शिमला: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को
हिमाचल प्रदेश में चीन की सीमा के पास रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाके में
सैनिकों के साथ दिवाली मनाई। प्रधानमंत्री बगैर किसी पूर्व कार्यक्रम के चांगो नाम
के एक गांव में भी गए और कहा कि लोगों के आतिथ्य सत्कार और उनकी खुशी ने उन्हें
अभिभूत कर दिया।
प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार तीसरी दीवाली सेना और
अर्धसैनिक बलों के जवानों के साथ मनाने के लिए प्रधानमंत्री आज सुबह साढ़े सात बजे
दिल्ली से रवाना हुए। साढे आठ बजे के करीब वो चंडीगढ पहुंचे। वहां से भारतीय
वायुसेना के हेलिकॉप्टर के जरिये हिमाचल प्रदेश के किन्नौर पहुंचे। किन्नौर में
उनका हेलिकॉप्टर सोमडु के पास उतरा, जहां से वो सुमडो के लिए रवाना हुए, जहां पर आईटीबीपी
का कैंप था। रास्स्ते में चांगो गांव आया, जहां वो अपना काफिला रोककर गाड़ी से उतर पड़े और गांव वालों
से मिले। इस दौरान पीएम मोदी ने गांव के सभी लोगों से मुलाकात की, जिसमें युवा, महिलाएं और छोटे
बच्चे भी शामिल थे। गांव वालों के अनुरोध पर उन्होंने हिमाचली टोपी भी पहनी और साथ
में फोटो भी खिचाये।
हरे रंग की पोशाक पहने प्रधानमंत्री ने सुमोध नाम की जगह पर
इंडो-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), डोगरा स्काउट्स और सेना के जवानों से मुलाकात की। सुमोध, राजधानी शिमला से
330 किलोमीटर दूर है
और किन्नौर तथा लाहौल-स्पीति जिलों की सीमा पर स्थित है। करीब दो घंटे तक वो यहां
रुके और इस दौरान न सिर्फ जवानों को उन्होंने मिठाई खिलाई, बल्कि खुद उनके
हाथ से मिठाई भी खाई। सुमडो से प्रधानमंत्री साढे बारह बजे के करीब रवाना हुए। खास
बात ये है कि जब देश के लोग रेडियो और टेलीविजन पर पीएम मोदी के मन की बात सुन रहे
थे, उस वक्त मोदी खुद सुरक्षा बलों के बहादुर जवानों के बीच
मौजूद थे।
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| Photo Courtesy : PMO |
प्रधानमंत्री मोदी जवानों से खुलकर मिले। उनके हाथ में
मिठाई से भरी प्लेट थी। उन्होंने जवानों को मिठाई खिलाई। एक जवान ने भी जवाब में
प्रधानमंत्री को मिठाई खिलाई। प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत
डोभाल और सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग भी थे।
एक अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सीमा सड़क संगठन
(बीआरओ) की शाखा जेनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स (जीआरईएफ) के कर्मियों से भी
सुमोध में मुलाकात की। इसके बाद पीएम मोदी ने किन्नौर जिले के चांगो गांव में
लोगों से मुलाकात की। किन्नौर अपने स्वादिष्ट सेबों के लिए जाना जाता है।
प्रधानमंत्री को अचानक अपने बीच पाकर गांववाले हैरान रह गए
और उन्होंने नारे लगाकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ
कई फोटो खिंचवाई। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 में पहली दिवाली
सियाचिन में सैनिकों के साथ मनाई थी।
प्रधानमंत्री के उत्तराखंड स्थित माना
गांव नहीं पहुंचने से वहां मौजुद जवानों में थोड़ी निराशा जरूर हुई। हालांकि वो इस
बात से थोड़े खुश भी थे कि प्रधानमंत्री हिमाचल में उनके ही भाईयों जवानों के साथ
हैं। उल्लेखनीय है कि मीडिया रिपोर्ट्स में प्रधानमंत्री के उत्तराखंड स्थित भारत
चीन सीमा पर मौजुद अंतिम गांव माना जाने की चर्चा थी। तभी से माना स्थित आईटीबीपी
के जवान प्रधानमंत्री के साथ दिवाली मनाने की खबर से उत्साहित थे।


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