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| Photo Courtesy : PMO |
बीजिंग: पाक के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी लांच पैड पर भारत
की ओर से की गई सर्जिकल स्ट्राइक का असर अब चीन में दिखाई दे रहा है। चीन ने पहले तिब्बत
में अपने सबसे बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए ब्रह्मपुत्र नदी की एक सहायक नदी को रोक
दिया तो दूसरी तरफ पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर
प्रतिबंध लगाने वाली भारत के प्रस्ताव के रास्ते में फिर से अड़ंगा डाल दिया। इससे
मसूद अजहर को फिर से छह महीने की मोहलत मिल गई।
ब्रह्मपुत्र नदी के सहायक
नदी पर बांध बनाने के चीन के कदम से भारत के असम, सिक्कम और अरुणाचल प्रदेश में पानी की आपूर्ति में कमी आ
सकती है।
चीन यह हरकत ऐसे समय में कर रहा है जब भारत ने उड़ी में सेना मुख्यालय
में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से सिंधु जल समझौते पर समीक्षा करने का फैसला
किया है। ऐसे में चीन का यह नया रूख इस आशंका को जन्म देता है कि कहीं वह
पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत पर दवाब बनाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है। हालांकि
चीन ने भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव को लेकर किसी का पक्ष नहीं लिया है और बातचीत
से मामले का हल निकालने की अपील की है। इस कदम के पीछे साजिश की आशंका इसलिए भी है
क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान यह धमकी दे चुका है कि अगर भारत ने सिंधु नदी का पानी
रोका तो वह चीन के जरिए ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रुकवा देगा।
चीन की सरकारी न्यूज
एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ब्रह्मपुत्र
नदी पर बन रहे चीन के इस हाइड्रो प्रोजेक्ट पर करीब 740 मिलियन डॉलर की लागत आएगी। इसी के चलते चीन ने इस नदी को
रोक दिया है। यह प्रोजेक्ट तिब्बत के जाइगस में है जो सिक्किम के नजदीक पड़ता है।
जाइगस से ही ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल में बहते हुए प्रवेश करती है। इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य जून 2014 में शुरू हुआ था और 2019 में इसका निर्माण कार्य पूरा होना है। इसी साल मार्च में
जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर लाल जाट ने कहा था कि भारत ने इस निर्माण से भारत पर
पड़ने वाले प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चीन से बात की है। हालांकि दोनों
देशों के बीच कोई जल संधि नहीं है, लेकिन दोनों देशों ने सीमा की तरफ बहने वाली नदियों को लेकर
विशेष स्तर का एक मैकेनिज्म तैयार किया है।
उधर, चीन फिर से
पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर के समर्थन में आ गया
है। भारत ने जैश प्रमुख को अंतराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया
था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन ने भारतीय प्रस्ताव पर
तकनीकी प्रतिबंध लगा रखा है। चीन के रोक की अवधि सोमवार को समाप्त होने जा रही है।
उसने रोक की अवधि और छह माह के लिए बढ़ा दी है।
चीन के विरोध नहीं करने
पर भारत का प्रस्ताव पारित हो जाता। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग
ने कहा, "भारत ने
मार्च 2016 में 1267 प्रतिबंध सूची में अजहर को रखने का आवेदन दिया था। आवेदन
पर हमारी तकनीकी रोक की अवधि बढ़ाई जा चुकी है। समिति को मामले पर चर्चा के लिए और
समय मिलेगा। इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों से बातचीत की जा सकेगी।"
इस वर्ष 31 मार्च को चीन ने भारत की राह में बाधा उत्पन्न की थी। भारत
ने परिषद की प्रतिबंध समिति से जैश-ए-मोहम्मद नेता और पठानकोट हमले के सूत्रधार
अजहर को प्रतिबंधित घोषित करने का अनुरोध किया था।
संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय इकाई में चीन अकेला देश है जिसने भारत के आवेदन का
विरोध किया है। परिषद के अन्य 14 सदस्य देश नई दिल्ली के समर्थन में खड़े हैं। अन्य देश अजहर
को 1267 प्रतिबंध
सूची में शामिल कराने का समर्थन करते हैं। यदि भारत का प्रयास सफल रहता है तो अजहर
की संपत्ति जब्त की जाएगी और उसकी विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

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