सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

सर्जिकल स्ट्राइक पर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा

Photo Courtesy : The Indian Express
नई दिल्ली : पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में आतंकी कैंपों को नष्ट करने के लिए किए गए सर्जिकल स्ट्राइल में पाकिस्तानी सेना की दो पोस्ट को भी तबाह किया गया था। सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में ये बड़ा दावा किया गया है। ऑर्गनाइजर में लिखा गया है कि भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान आतंकियों के पांच लॉन्च पैड के साथ पाकिस्तानी सेना की दो चौकियों को भी तबाह कर दिया था।
संघ के मुखपत्र के मुताबिक, 'पाकिस्तानी सेना की ये दोनों पोस्ट आतंकियों के लॉन्च पैड के साथ बनी हुई थीं और इसलिए सेना ने इन्हें भी तबाह कर दिया। सेना ने जो टारगेट चुना था, वो उरी की 19वीं डिवीजन, कुपवाड़ा की 28वीं डिवीजन और राजौरी की 25वीं डिवीजन के अधिकार क्षेत्र में था।
ऑर्गनाइजर के ताजा अंक में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, एच आवर 28 सितंबर की आधी रात का वक्त था। सेना की शब्दावली में एच आवर से मतलब उस वक्त से है, जब हमला करना होता है। 28 सितंबर को सुरक्षा संबंधी कैबिनेट की समिति सीसीएस को इस सर्जिकल स्ट्राइक का प्लान बता दिया गया था। इस स्ट्राइक का मकसद पीओके में आतंकियों के अड्डों को निशाना बनना और पाकिस्तान को ये संदेश देना था कि भारत हमलावरों को सजा जरूर देगा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर तुंरत सहमति बनी थी। मिलिट्री ऑपरेशंस रूम में 28 सितंबर से 29 सितंबर की सुबह तक लगातार हलचल रही। उड़ी हमले का बदले लेने के लिए की गई सेना की इस कार्रवाई का अब तक का यह पहला विस्तृत विवरण है। रिपोर्ट के अनुसार इस कार्रवाई को अंजाम देने वाले जवानों की टीमें 28 सितंबर की दोपहर तक निर्धारित लक्ष्य उड़ी की 19वीं डिविजन ,कुपवाड़ा की 28वीं डिविजन और रजौरी की 25वीं डिविजन के तीनों तरफ से आगे बढ़ीं। एच-आवर के कुछ घंटे पहले कुपवाड़ा डिवीजन ने अभियान के ठीक विपरीत दिशा में स्थिति चौकियों पर छोटे हथियारों से गोलियां चलाईं और मोर्टार के गोले दागे। यह कवायद पाकिस्तानी सेना का ध्यान भटकाने के लिए की गई थी।
पाकिस्तानी सेना ने जैसे ही गोलीबारी का जवाब देना शुरू किया विशेष सुरक्षा बलों की टीमें धीरे-धीरे नियंत्रण रेखा पार कर पीओके में घुसने लगीं। इसके बाद ये टीमें पीर पंजाल के दक्षिण में पुंछ सेक्टर में बेलानी और नांगी टेकरी बटालियन क्षेत्रों तथा नौगाम सेक्टर में तुतमारी गली के पास बंट गईं। तड़के दो बजे तक टीमें लक्षित ठिकानों पर पहुंच गईं इसके बाद पांच लॉन्च पैड और उनके पास स्थित पाकिस्तान सेना की दो चौकियों को ध्वस्त कर दिया गया और उसमें मौजूद सभी लोग मारे गए। भारतीय सेना ने आतंकियों के पांच लॉन्च पैड के साथ पाक सेना की दो चौकियों को भी तबाह कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकियों के लॉन्च पैडों पर जो भी मौजूद था, सभी को भारतीय सेना ने ढेर कर दिया। हालांकि डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने ये नहीं बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक में कितने आतंकी मारे गए।
रिपोर्ट के मुताबिक पूरा अभियान पर्रिकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की निगरानी में चलाया गया और सर्जिकल स्ट्राइक करने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति की 28 सितंबर को हुई बैठक में लिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अभियान का उद्देश्य पीओके में आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करना और यह संदेश देना था कि भारत हमले का जवाब दिए बिना नहीं रहेगा। इस अभियान को तुरंत मंजूरी मिल गई। प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को अभियान पर नजर रखने और समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी।
इससे पहले 18 से 25 सितंबर के बीच सुरक्षा मामलों पर भारत के शीर्ष नीति निर्धारकों के साथ बैठकें की गई जिसमें पाकिस्तान को माकूल जवाब देने के कदमों पर चर्चा की गई। सिंधु जल संधि की समीक्षा करना, दक्षेस सम्मेलन का बहिष्कार करना, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद को समर्थन देने वाला देश बताना, ये सभी पाकिस्तान को घोरने के लिए सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। इन सभी कदमों के बीच पीओके में आतंकवादी शिविरों पर हमले की तैयारियां चल रही थीं। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी अनुसंधान संगठन और देश की खुफिया एजेंसी रॉ को आतंकवादी शिविरों और लॉन्च पैड की सटीक जानकारी देने के लिए कहा गया।

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